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कौन है चिनतुआंग? म्यांमार से भारत और बांग्लादेश में चल रहा ड्रग नेटवर्क कैसे टूटा... पूरी इनसाइड स्टोरी

एनसीबी ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यांमार के ड्रग तस्कर चिनतुआंग को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. वह सिर्फ एक ड्रग सप्लायर नहीं था, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था.

कौन है चिनतुआंग? म्यांमार से भारत और बांग्लादेश में चल रहा ड्रग नेटवर्क कैसे टूटा... पूरी इनसाइड स्टोरी
सांकेतिक तस्वीर.
  • NCB ने म्यांमार के कुख्यात ड्रग तस्कर थानचिनतुआंग को दिल्ली से गिरफ्तार किया है
  • थानचिनतुआंग का नेटवर्क म्यांमार से मेथामफेटामाइन और हेरोइन भारत के कई राज्यों और बांग्लादेश तक सप्लाई करता था
  • नेटवर्क में लोकल एजेंट, ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर, हवाला ऑपरेटर और फाइनेंशियल हैंडलर शामिल थे
नई दिल्ली:

भारत-म्यांमार सीमा के जरिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर NCB ने अब तक की सबसे बड़ी और अहम कार्रवाई करते हुए म्यांमार के कुख्यात ड्रग तस्कर थानचिनतुआंग उर्फ चिनतुआंग उर्फ तलुआंगा को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. एजेंसियों के मुताबिक चिनतुआंग सिर्फ एक ड्रग सप्लायर नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था, जो म्यांमार से भारत और बांग्लादेश तक फैले बड़े नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था. उसकी गिरफ्तारी को उत्तर-पूर्व भारत में सक्रिय ट्रांसनेशनल ड्रग कार्टेल के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.

NCB के अधिकारियों के अनुसार चिनतुआंग म्यांमार के चिन स्टेट के बुलफेक इलाके का रहने वाला है और पिछले कई वर्षों से भारत-म्यांमार सीमा के जरिए बड़े पैमाने पर मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी कर रहा था. 

कहां-कहां फैला था इसका नेटवर्क?

जांच एजेंसियों का दावा है कि उसके नेटवर्क की कुल अवैध ड्रग तस्करी करीब 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की है. वह म्यांमार से ड्रग्स की खेप भेजता था, जो मिजोरम, मणिपुर, असम और त्रिपुरा के रास्ते भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाई जाती थी. इसके बाद यही नेटवर्क बांग्लादेश तक सप्लाई चेन को आगे बढ़ाता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि चिनतुआंग बेहद संगठित तरीके से काम करता था. उसके नेटवर्क में लोकल एजेंट, ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर, बॉर्डर कैरियर, हवाला ऑपरेटर और फाइनेंशियल हैंडलर शामिल थे. ड्रग्स की खेप को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग रास्तों से भेजा जाता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों को भनक न लगे. कई बार इन खेपों को सामान्य कारोबारी सामान या ट्रांसपोर्ट माल के बीच छिपाकर भेजा जाता था.

कई राज्यों में दर्ज हैं मामले

NCB के मुताबिक चिनतुआंग लंबे समय से एजेंसियों की रडार पर था. उसके खिलाफ कई राज्यों में NDPS एक्ट के तहत मामले दर्ज थे. NCB के दो बड़े मामलों में वह मुख्य आरोपी था. इसके अलावा मिजोरम के चंपाई पुलिस स्टेशन में दर्ज दो मामलों और मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के छह मामलों में भी उसका नाम सामने आया था. हालांकि वह लगातार लोकेशन बदलकर और अपने नेटवर्क के जरिए खुद को बचाता रहा.

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ऐसे पकड़ में आया इसका पूरा नेटवर्क

चिनतुआंग का नाम सबसे पहले 2024 के उस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रमुखता से सामने आया था जिसमें खावजॉल के दुल्ते इलाके के पास NCB ने 14 किलो मेथामफेटामाइन और 2.8 किलो हेरोइन बरामद की थी. उस केस में जांच के दौरान पता चला कि पूरी खेप म्यांमार बेस्ड नेटवर्क से आई थी और उसके पीछे चिनतुआंग का हाथ था. 

इसके बाद 2025 में आइजोल में 49.1 किलो मेथामफेटामाइन की बड़ी खेप पकड़ी गई, जिसमें भी जांच एजेंसियों को उसी नेटवर्क के तार मिले.

इन दोनों मामलों के बाद NCB ने नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की. एजेंसी ने टेक्निकल सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रैकिंग, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और ग्राउंड इंटेलिजेंस के जरिए पूरे सिंडिकेट की परतें खोलनी शुरू कीं. कई महीनों तक लगातार निगरानी के बाद एजेंसी को चिनतुआंग की गतिविधियों की सटीक जानकारी मिली और फिर दिल्ली में एक विशेष ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

पूरी सप्लाई चेन को कंट्रोल करता था चिनतुआंग

जांच एजेंसियों के मुताबिक चिनतुआंग सिर्फ बॉर्डर पार से ड्रग्स भेजने तक सीमित नहीं था बल्कि वह भारत में मौजूद अपने नेटवर्क के जरिए पूरी सप्लाई चेन को नियंत्रित करता था. कौन सी खेप किस रास्ते जाएगी, कौन व्यक्ति रिसीव करेगा, पैसा कहां पहुंचेगा और हवाला चैनल कैसे इस्तेमाल होंगे—इन सभी चीजों की मॉनिटरिंग उसी के निर्देश पर होती थी.

NCB ने इस नेटवर्क से जुड़े कई अहम आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. इनमें वुंगखंथावना नाम का आरोपी शामिल है, जिसे चिनतुआंग का बेहद करीबी माना जाता है. जांच एजेंसियों के मुताबिक वही म्यांमार से आने वाली खेपों की मूवमेंट और डिलीवरी को मैनेज करता था. कई राज्यों में ड्रग्स की सप्लाई पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका थी.

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नेटवर्क से जुड़े कई लोग हो चुके हैं गिरफ्तार

इस नेटवर्क में ललरमपारी नाम की महिला का नाम भी सामने आया. जांच में पता चला कि वह पूरे सिंडिकेट की हवाला ऑपरेटर थी और ड्रग्स से आने वाले करोड़ों रुपये के पैसों को अलग-अलग खातों और चैनलों के जरिए घुमाने का काम करती थी. NCB ने उसे 8 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया था. बाद में जांच के दौरान ड्रग्स की कमाई से खरीदी गई लगभग 56 लाख रुपये की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया. एजेंसियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है और आगे और बड़ी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं.

इसके अलावा असम के श्रीभूमि जिले के रहने वाले अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन उर्फ मिथु को 20 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. एजेंसियों के मुताबिक वह भारत में चिनतुआंग का बड़ा ऑपरेटिव था और असम कॉरिडोर के जरिए ड्रग्स की आवाजाही संभालता था. वह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन का काम देखता था. इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को जाबरुल हक नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो नेटवर्क का अहम लिंक माना जा रहा है.

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अब आर्थिक नेटवर्क को खत्म करेगी NCB

NCB ने इस पूरे मामले में सिर्फ ड्रग्स बरामद करने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि अब एजेंसी पूरे आर्थिक नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है. जांच के दौरान कई बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं, जिन्हें अस्थायी तौर पर फ्रीज किया गया है. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रग्स की कमाई कहां निवेश की गई, किन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं और हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा किन देशों तक पहुंचाया गया. NDPS एक्ट और PMLA के तहत संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

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भारत-म्यांमार बॉर्डर पर एक्टिव है ड्रग कार्टेल

जांच में यह भी सामने आया है कि भारत-म्यांमार सीमा का इस्तेमाल लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल कर रहे हैं. म्यांमार के चिन और सागाइंग इलाके से ड्रग्स तैयार होकर पहले मिजोरम और मणिपुर पहुंचती है, फिर वहां से अलग-अलग नेटवर्क के जरिए असम, त्रिपुरा और देश के अन्य हिस्सों में सप्लाई होती है. कई मामलों में इन ड्रग्स की खेप बांग्लादेश तक भी पहुंचाई जाती है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे बेहद संगठित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट सक्रिय हैं.

NCB का कहना है कि अब एजेंसी “नेटवर्क सेंट्रिक इन्वेस्टिगेशन” मॉडल पर काम कर रही है. यानी सिर्फ खेप पकड़ने की बजाय पूरे सिंडिकेट को खत्म करने की रणनीति अपनाई जा रही है. इसी के तहत “टॉप टू बॉटम” और “बॉटम टू टॉप” दोनों तरीके से जांच की जा रही है, ताकि बड़े सप्लायर से लेकर छोटे कैरियर तक हर व्यक्ति को पकड़ा जा सके.

NCB के अनुसार 2026 में यह दूसरा बड़ा म्यांमार बेस्ड ड्रग सप्लायर है जिसे गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले मार्च 2026 में म्यांमार के चिन स्टेट के रहने वाले लालह्मिंगसांगा को गिरफ्तार किया गया था. एजेंसियों का मानना है कि आने वाले समय में भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े और भी बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर एजेंसियों के निशाने पर हैं.

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