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मुंबई: अपने ही देश की बेरुखी का शिकार पाकिस्तानी नागरिक, पुलिस स्टेशन में रहने को मजबूर

कराची का रहने वाला शख्स छह महीने जेल की सजा काट चुका है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा ट्रैवल परमिट नहीं जारी किए जाने की वजह से पुलिस स्टेशन में रहने को मजबूर है.

मुंबई: अपने ही देश की बेरुखी का शिकार पाकिस्तानी नागरिक, पुलिस स्टेशन में रहने को मजबूर
पाकिस्तानी अधिकारी अपने नागरिक के लिए ट्रैवल परमिट नहीं जारी कर रहे हैं. (File Photo: Representative)
  • 65 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक सजा पूरी करने के बाद भी मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में फंसा हुआ है.
  • भारत ने कई बार कूटनीतिक स्तर पर संपर्क किया, लेकिन पाकिस्तान ने ट्रैवल परमिट जारी नहीं किया है.
  • कागजी कार्रवाई में देरी के कारण नादिर को महीनों से पुलिस की निगरानी में रहना पड़ रहा है.
मुंबई:

भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने और रहने के आरोप में छह महीने की सजा पूरी करने के बाद भी 65 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक नादिर मुनीर खान मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में फंसा हुआ है. पेशे से कराची का कपड़ा व्यापारी खान अपनी सजा पूरी कर चुका है, लेकिन उसे पाकिस्तान डिपोर्ट करने वापस भेजने करने की प्रक्रिया अभी भी अधर में लटकी है. कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क करने के बावजूद, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक मुनीर खान के लिए जरूरी ट्रैवल परमिट जारी नहीं की है, जिसके चलते वह महीनों से पुलिस की देखरेख में थाने में ही रहने को मजबूर है.

भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने और रहने के जुर्म में अपनी कानूनी सजा पूरी कर चुका एक 65 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक अब अपने ही देश की कूटनीतिक लेट-लतीफी का खामियाजा भुगत रहा है.

कराची का रहने वाला यह शख्स अपनी छह महीने की जेल की सजा काट चुका है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा यात्रा अनुमति जारी न किए जाने की वजह से पिछले कई महीनों से मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में रहने को मजबूर है.

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तानी नागरिक नादिर मुनीर खान (65) मूल रूप से कराची का निवासी है और पेशे से एक कपड़ा व्यापारी है. नादिर को भारत में अवैध दस्तावेजों के जरिए प्रवेश करने और छिपकर रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. कोर्ट ने उसे इस अपराध के लिए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी.

नादिर जेल की सजा पूरी कर चुका है. कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, सजा पूरी होने के बाद किसी भी विदेशी नागरिक को उसके गृह देश वापस भेज दिया जाता है, लेकिन नादिर के मामले में ऐसा नहीं हो सका. नादिर मुनीर खान की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया पूरी तरह से कागजी कार्रवाई और पाकिस्तानी अधिकारियों की उदासीनता के कारण अधर में लटकी हुई है.

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भारतीय प्रशासन और मुंबई पुलिस ने कूटनीतिक स्तर पर इस मामले को कई बार उठाया है. आधिकारिक माध्यमों से बार-बार संपर्क किए जाने और रिहाई की सूचना दिए जाने के बावजूद, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक नादिर के लिए जरूरी 'ट्रैवल परमिट' जारी नहीं किया है. बिना इस परमिट के उसे सरहद पार नहीं भेजा जा सकता.

पुलिस स्टेशन बना 'अस्थायी ठिकाना'

अंतरराष्ट्रीय नियमों के चलते, जब तक पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए आधिकारिक दस्तावेज नहीं सौंपता, तब तक भारतीय एजेंसियां उसे डिपोर्ट नहीं कर सकतीं. इसी तकनीकी और कूटनीतिक पेच की वजह से पिछले कई महीनों से नादिर खान को दक्षिण मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में कड़ी निगरानी में रखा गया है. 

एक तरफ जहां यह 65 वर्षीय बुजुर्ग नागरिक अपने घर लौटने की राह देख रहा है, वहीं दूसरी ओर कागजी कार्रवाई में हो रही इस देरी ने मुंबई पुलिस के लिए भी बेवजह की एक प्रशासनिक जिम्मेदारी खड़ी कर दी है.

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