- मुंबई जिमखाना क्लब को अब जल्द ही मार्केट रेट पर किराया देना पड़ सकता है.
- एक सरकारी समिति की तरफ से 6 महीने की जांच के बाद एक रिपोर्ट सौंपी गई है.
- जिसमें आम लोगों को मुंबई जिमखाना में एंट्री दिए जाने की मांग भी की गई है.
मुंबई के पॉश इलाके में बने जिमखाना क्लब में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. क्योंकि अब यहां की किराया दल बदल सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने यह सिफारिश की है कि सरकारी जमीन पर बने जिमखाना क्लब अब मार्केट रेट के हिसाब से किराया वसूला जाए. जबकि यह भी सुझाव दिया गया है कि इस किराए को हर पांच साल में रिवाइज भी किया जाना चाहिए. ऐसे में अगर यह सिफारिशें लागू होती हैं तो फिर अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. किराए के अलावा इस समिति ने कुछ और सिफारिशों को भी लागू करने की मांग की है.
क्या है मुंबई जिमखाना का मामला
दरअसल, मुंबई जिमखाना शहर का सबसे महंगा और रसूखदार क्लब माना जाता है, जो अंग्रेजों के जमाने में यहां बनाया गया था. यह क्लब बना तो सरकारी जमीन पर है, लेकिन इस क्लब की सदस्यता बहुत महंगी है. बावजूद इसके सरकार को किराए के नाम पर पैसा ज्यादा नहीं मिलता है. मई 2026 में जब दिल्ली जिमखाना का विवाद सामने आया था. तभी महाराष्ट्र सरकार की तरफ से एक समिति का गठन किया गया था. कोंकण संभागीय आयुक्त रूबल अग्रवाल को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. जहां समिति ने करीब 6 महीने की विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र के राजस्व विभाग को सौंपी है. इस रिपोर्ट में कई अहम जानकारियां सरकार को दी गई हैं.
मुंबई जिमखाना क्लब को लेकर समिति की सिफारिशें
मुंबई जिमखाना क्लब को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पांच अहम सिफारिशें सरकार से की गई हैं. बताया गया है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट के आधार पर ही कुछ नई सिफारिशें मुंबई जिमखाना में लागू करने की मांग की है. जिसमें किराया सबसे अहम है. मुंबई जिमखाना क्लब को लेकर पांच प्रमुख सिफारिशें
- मुंबई जिमखाना क्लब का किराया मार्केट-रेट पर तय होना चाहिए. साथ ही इस किराए की हर 5 साल में समीक्षा कर बढ़ोत्तरी होनी चाहिए.
- यहां होने वाले किसी भी इवेंट, शादी, कॉन्सर्ट या कॉन्फ्रेंस समेत अन्य किसी कार्यक्रम के लिए 1.5 लाख रुपए का शुल्क लिया जाना चाहिए.
- क्लब में यहां के मेंबर्स के साथ-साथ अब आम जनता को भी एंट्री मिलनी चाहिए. सभी को इसका एक्सेस देना चाहिए.
- प्राकृतिक आपदाओं या फिर चुनावों के समय में सरकार इसके मैदान का इस्तेमाल कर सकें, इसके अलावा अपना कार्यक्रम भी आयोजित कर सकती है.
- जिमखाना के बोर्ड में अब जिला कलेक्टर को 'एक्स-ऑफिसियो' सदस्य के रूप में शामिल करना अनिवार्य होगा, जबकि उनके सुधारों को भी सुना जाना चाहिए.
9 टीमों ने 6 महीने तक की जांच
राज्य सरकार की तरफ से गठित की गई सरकारी समिति की 9 टीमों ने 6 महीने तक जिमखानों का औचक सीक्रेट निरीक्षण किया है. जिसमें कई बड़ी जानकारियां सामने आई हैं. जिसमें कुछ अवैध निर्माण, बैंकेट्स, म्यूजिकल कॉन्सर्ट और कॉर्पोरेट कॉन्फ्रेंस किराए पर दी जा रही थे, स्पोर्ट्स कल्चर बढ़ावा देने की जगह नाममात्र का काम किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि सरकार की इन सख्तियों के बाद अब आने वाले समय में कुछ बड़े बदलाव दिख सकते हैं.
जिमखाना क्लब से बढ़ेगी कमाई
मुंबई में लगभग 10 से 16 प्रमुख जिमखाना क्लब है. जो शहर की 664 एकड़ जमीन में फैले हुए हैं. यह जमीन शहर के कुल हिस्से का 20 प्रतिशत हिस्सा है. एक तरफ मुंबई में प्रति व्यक्ति औसतन केवल 1.28 वर्ग मीटर ही ओपन स्पेस है, दूसरी तरफ कुछ क्लबों के पास ही इतनी जमीन है. अब तक इनसे सालाना केवल 2 करोड़ रुपए तक का ही किराया आता था. लेकिन नई सिफारिशे लागू होने के बाद क्लबों का संचालन खर्च कई गुना बढ़ जाएगा. जिससे किराया भी कई गुना बढ़ेगा. वहीं जिन जगहों पर केवल कुछ चुनिंदा लोग ही जा सकते थे, वहां अब देश के सभी नागरिक जा सकेंगे यह एक अहम बदलाव होगा.
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