- मॉनसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा ने मिलाकर कुल 20 बिल बिना बहस के पास किए गए हैं
- 2026 के मॉनसून सत्र में 7000 मिनट समय बर्बाद होने से करीब 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
- इतिहास में कई बार पूरे सत्र कामकाज हंगामे के कारण ठप हो चुके हैं
संसद का मॉनसून सत्र में कितना कामकाज हुआ है इस पर आप बहस कर सकते हैं. देखने पर लगता है कि मॉनसून सत्र में कोई कामकाज नहीं हुआ. लेकिन सरकार ने इस सत्र में लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर 20 बिल पास करा लिए. यह भी सच्चाई है कि ये सारे बिल बिना किसी बहस के शोरगुल या विपक्ष के वॉकआउट के बीच कराए गए हैं.
पहले भी हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं कई सत्र
मगर यह कोई पहला मौका नहीं है जब पूरा सत्र ही हंगामे के भेंट चढ़ गया हो. यदि इतिहास में झांके तो कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब पूरे सत्र में कोई कामकाज नहीं हुआ हो. बोफोर्स प्रकरण से लेकर मौजूदा मॉनसून सत्र तक कई ऐसे उदाहरण हैं जब लोकसभा ठप रही.
2010 का शीतकालीन सत्र और 2G विवाद: 2010 का शीतकालीन सत्र 2जी घोटाले के मुद्दे पर प्रभावित रहा था. पूरे सत्र के दौरान संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मांग को लेकर लगातार हंगामा होता रहा और कामकाज नहीं हो पाया.
2012 में कॉमनवेल्थ गेम्स और लोकपाल पर गतिरोध: 2012 के मॉनसून सत्र में कॉमनवेल्थ गेम्स और लोकपाल विधेयक जैसे मुद्दों पर भारी बवाल देखने को मिला. उस दौरान लोकसभा के निर्धारित 60 घंटे के मुकाबले केवल 23 घंटे ही कामकाज हो पाया था.
2015 का मॉनसून सत्र: 2015 का मॉनसून सत्र व्यापम घोटाले और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी के विदेश चले जाने के मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गया था. इस सत्र में केवल 46 फीसदी कामकाज ही हो पाया था.
नोटबंदी के मुद्दे पर नहीं चल पाया 2016 का शीतकालीन सत्र: 2016 का शीतकालीन सत्र नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की वजह से प्रभावित रहा. इस दौरान लोकसभा के करीब 92 घंटे बर्बाद हुए थे.
2018 में दो सत्र रहे हंगामेदार: 2018 के बजट सत्र के दूसरे चरण में बैंकिंग घोटाले और अविश्वास प्रस्ताव जैसे मुद्दों के कारण कामकाज प्रभावित हुआ था.
इसके बाद 2018 के मॉनसून सत्र में राफेल विमान सौदे और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ. इस सत्र में केवल 15 फीसदी कामकाज ही हो पाया था.
2023 में मणिपुर हिंसा का मुद्दा छाया रहा: 2023 का मॉनसून सत्र भी काफी हंगामेदार रहा था. पूरे सत्र के दौरान मणिपुर हिंसा का मुद्दा छाया रहा और सदन में बहुत कम कामकाज हो पाया.
2026 के मानसून सत्र में 7,023 मिनट बर्बाद
अब 2026 के मॉनसून सत्र की बात करें तो अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 7,023 मिनट का समय बर्बाद हो चुका है. लोकसभा में प्रति मिनट कामकाज की लागत करीब ढाई लाख रुपये बताई जाती है. इस हिसाब से सदन में कामकाज न होने की वजह से अब तक लगभग 175 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
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