मॉनसून करीब एक हफ्ते की देरी के बाद महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई पहुंच गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, 23 जून को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मुंबई सहित महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा के बाकी हिस्सों, और छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है. अगले 2-3 दिनों में मॉनसून के उत्तर अरब सागर और गुजरात के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. इसके बाद के 3-4 दिनों में यह झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी आगे बढ़ सकता है.
मॉनसून पर मौसम विभाग का अपडेट
मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से उत्तर भारत के राज्यों की उम्मीदें भी जगी हैं कि वहां भी जल्द बारिश दस्तक देगी और प्रचंड लू से राहत मिलेगी. महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद मॉनसून उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ इस महीने के अंत तक पहुंच सकता है. इसके बाद उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों की बारी आएगी.

अल नीनो का मॉनसून पर असर
अलनीनो के प्रभाव में कमजोर मॉनसून का असर दिखाई दे रहा है. मॉनसून में 1 से 22 जून के बीच देश में बारिश की कमी बढ़कर 43 फीसदी हो गई है. इस साल कमजोर मॉनसून का प्रभाव पर दिखने लगा है. भारत मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जून के पहले तीन हफ्तों में अब तक देश में औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. मौसम के पूर्वानुमान में भारत मौसम विभाग ने कहा है कि आमतौर जून के 22 दिनों के बीच देश में औसतन 106 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड होती है, लेकिन इस साल इस अवधि में सिर्फ 60.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है.
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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में बारिश की कमी
सबसे ज्यादा मॉनसून की बारिश की कमी मध्य भारत क्षेत्र (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि) में दर्ज की गई है, जहां 22 दिनों में ये कमी औसत से 67 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. पूर्वी और उत्तर पूर्व भारत में बारिश की कमी 22 दिनों के दौरान औसत से 40% कम रही है. इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 28 फीसदी रही है. जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी बढ़कर 15 फीसदी हो गई है. इसकी एक बड़ी वजह अल नीनो के कारण मॉनसून का कमजोर पड़ना है.

अल नीनो का असर मॉनसून पर
सबसे ज्यादा बारिश की कमी मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 22 दिनों में ये कमी औसत से 67 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. पूर्वी और उत्तर पूर्व भारत में बारिश की कमी 22 दिनों के दौरान औसत से 40% कम रही है. इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 28 फीसदी रही है. जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी बढ़कर 15 फीसदी हो गई है. इसकी एक बड़ी वजह अल नीनो के कारण मॉनसून का कमजोर पड़ना है.
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जलाशयों में पानी की रिकॉर्ड कमी
देश के बड़े जलाशयों में औसत से कम बारिश का असर दिख रहा है. केंद्रीय जल आयोग की 18 जून की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 जून को देश के 166 बड़े जलाशयों में उपलब्ध लाइव स्टोरेज 50.457 बीसीएम था. पिछले साल जलाशयों में ये जल भंडार 58.249 बीसीएम था. पिछले साल के मुकाबले इन बड़े जलाशयों में 18 जून तक पानी का लाइव स्टोरेज लेवल 13.37 फीसदी कम है.

गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के 53 बड़े जलाशयों में भी संचित जल का स्तर पिछले साल से कम हो गया है. सेंट्रल वाटर कमीशन के मुताबिक, 18 जून को इन 53 बड़े जलाशयों में कुल जल स्तर11.125 BCM ही था. यह इनकी कुल क्षमता का 29.20 फीसदी है. पिछले यह जल भंडारण स्तर 31.72 फीसदी था. पूर्वी भारत के 27 बड़े जलाशयों और दक्षिणी भारत के 47 बड़े जलाशयों में भी पानी का स्तर पिछले साल के मुकाबले काफी कम रिकॉर्ड किया गया.
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