विज्ञापन
This Article is From Jul 05, 2022

मानसून ने पकड़ी रफ्तार, मध्य भारत और पश्चिमी तट पर अगले पांच दिन सक्रिय रहेगा मानसून, जानें मौसम का पुर्वानुमान

मध्य भारत में कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के चलते दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे इस क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई के समय भरपूर बारिश हुई है.

मानसून ने पकड़ी रफ्तार, मध्य भारत और पश्चिमी तट पर अगले पांच दिन सक्रिय रहेगा मानसून, जानें मौसम का पुर्वानुमान
अगले पांच दिनों तक मध्य भारत और पश्चिमी घाट में मानसून सक्रिय रहेगा
नई दिल्ली:

मध्य भारत में कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के चलते दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे इस क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई के समय भरपूर बारिश हुई है. मौसम कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि मध्य भारत और पश्चिमी तट पर अगले पांच दिन सक्रिय मानसून की स्थिति रहेगी, जबकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बुधवार से मौसमी बारिश होने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि मध्य प्रदेश के मध्य भागों में कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के तहत एक संबद्ध चक्रवाती परिसंचरण और गुजरात से महाराष्ट्र तक एक अपतटीय कम दबाव के क्षेत्र के चलते इन इलाकों के साथ-साथ तेलंगाना, केरल, तटीय कर्नाटक और ओडिशा में भी अगले पांच दिन के लिए व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान है.

मौसम कार्यालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ दिनों में हुई अच्छी बारिश की वजह से देश में इसकी कुल कमी पिछले शुक्रवार के आठ प्रतिशत के आंकड़े से घटकर दो प्रतिशत होने में मदद मिली है. दैनिक वर्षा पर आईएमडी के आंकड़ों से पता चलता है कि बारिश संबंधी कमी उत्तर प्रदेश (-48 फीसदी), झारखंड (-42 फीसदी), केरल (-38 फीसदी), ओडिशा (-26 फीसदी), मिजोरम (-25 फीसदी), मणिपुर (-24 फीसदी) और गुजरात (-22 प्रतिशत) बनी हुई है.

कृषि के मोर्चे पर, खरीफ फसलों की बुवाई धीमी रही है क्योंकि किसानों ने एक जुलाई तक 278.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 294.42 लाख हेक्टेयर थी. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि 43.45 लाख हेक्टेयर में चावल की बुवाई हुई है जो 2021 के 59.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में 16.11 लाख हेक्टेयर कम है.

वर्ष 2021 के 26.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस साल अभी तक 28.06 लाख हेक्टेयर में दलहन बोया गया है, जो 1.83 लाख हेक्टेयर अधिक है. वहीं, 2021 के 50.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस बार मोटे अनाज की खेती के कुल क्षेत्रफल में 46.34 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखी गई है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Monsoon, IMD, Heavy Rain, Kharif
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com