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इस साल कमजोर रहेगा मॉनसून, 8 फीसदी कम बारिश का अनुमान! मौसम विभाग ने बढ़ा दी टेंशन

IMD Weather Monsoon Update: इस साल देश में कहां कब मॉनसून आएगा, कितनी बारिश होगी? मौसम विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया है.

इस साल कमजोर रहेगा मॉनसून, 8 फीसदी कम बारिश का अनुमान! मौसम विभाग ने बढ़ा दी टेंशन
  • मौसम विभाग ने बताया कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश दीर्घावधि औसत का केवल बयासी प्रतिशत रह सकती है
  • अल नीनो प्रभाव के कारण देश के कई हिस्सों में मॉनसून की बारिश सामान्य से आठ प्रतिशत कम रहने का अनुमान है
  • देश के मध्य और अन्य कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना के कारण खेती प्रभावित हो सकती है

दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में चिलचिलाती गर्मी ने परेशान करना शुरू कर दिया है. लोगों को अभी से बारिश का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर चिंता वाली बात बताई है. मौसम विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मॉनसून-2026 का पूर्वानुमान जारी किया है.मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की चाल 'सामान्य' से थोड़ी सुस्त रह सकती है और कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 92% रहने का अनुमान है. यानी इस साल सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश होगी. कम बारिश होने के पीछे की वजह 'अल-नीनो' प्रभाव है. शुरुआती संकेत यही हैं कि इस साल देश के कई हिस्सों में बादल उतने मेहरबान नहीं होंगे जितनी उम्मीद की जा रही थी. हालांकि मई में मौसम विभाग एक और अपडेटेड फॉरकास्ट जारी करेगा.

सामान्य से कम होगी बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून जो कि जून से सितंबर के बीच आता है, उसमें सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है.इस साल देशभर में मॉनसून की औसत बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का 92% रहने की संभावना है. आईएमडी के अनुसार 96% से 104% के बीच की बारिश को 'सामान्य' माना जाता है.

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अल नीनो बढ़ाएगा टेंशन

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मॉनसून सीजन के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने की आशंका है, जो बारिश को कमजोर करने का एक प्रमुख कारक हो सकता है. हालांकि उत्तर-पश्चिमी भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है, जबकि देश के मध्य और अन्य कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की सबसे ज्यादा संभावना है. 

कम बारिश का किसानों पर क्या पड़ेगा असर?

IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने NDTV से बात करते हुए कहा, हमारा अनुमान है की अल नीनो की स्थिति जून तक न्यूट्रल रहेगी. इसका ज्यादा असर अगस्त और सितंबर 2026 में मॉनसून पर पड़ने का अंदेशा है. भारत में अधिकतर खरीफ फसलों की बुवाई जून और जुलाई महीने में होती है. ऐसे में हमारा अनुमान है की इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश होने का महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुवाई पर ज्यादा असर नहीं होगा.
 

मॉनसून के पूर्वानुमान की 5 बड़ी बातें

  • इस साल पूरे देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है.
  • इस साल कुल वर्षा लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 92% रह सकती है.
  • मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो की वजह से कम बारिश होने का अनुमान है.
  • देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहेगी, जिससे खेती पर असर पड़ सकता है.
  • पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश की उम्मीद है.
मौसम विभाग ने सीजन के अंत तक हिंद महासागर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बनने की संभावना जताई गई है, जो कमजोर पड़ रहे मॉनसून को थोड़ी राहत दे सकता है. यह मॉनसून का पहला प्रारंभिक पूर्वानुमान है. मौसम विभाग मई 2026 के आखिरी हफ्ते में दूसरा अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा, जिसमें क्षेत्रवार बारिश की और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.

इन दिनों देश भर में मौसम का मिजाज बदला हुआ है. पिछले हफ्ते जहां दिल्ली समेत उत्तर भारत में बारिश हो रही थी, वहीं अब तेजी से तामना में इजाफा हुआ है.

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हिमांशु शेखर मिश्रा
Senior Editor, Political & Current Affairs
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