- युद्ध के कारण 16 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट कच्चे तेल की कीमत US$ 142.69 प्रति बैरल तक पहुंच गई.
- 01 मार्च से 16 मार्च 2026 के बीच कच्चे तेल की औसत कीमत US$ 108.23 प्रति बैरल तक बढ़ चुकी है.
- फरवरी 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत US$ 69.01 प्रति बैरल थी, जो अब तक 56.83 प्रतिशत बढ़ी है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से 16 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 142.69/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गयी. इस वजह से 01 मार्च से 16 मार्च, 2026 के बीच कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 108.23/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानि, मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से अब तक कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत फरवरी की औसत कीमत के मुकाबले 16 मार्च, 2026 तक 39.22 अमेरिकी डॉलर/बैरल तक बढ़ चुकी है, यानि 56.83% महंगी!

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारत सरकार वे तेल के आयात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को एक्टिवेट कर दिया है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, भारत की क्रूड सप्लाई secured है. भारत में हर दिन की खपत 55 लाख बैरल कच्चे तेल की है. औसतन Strait of Hormuz से जितना कच्चा तेल आता है आज हमने उससे ज़्यादा क्रूड ऑयल की सप्लाई डायवर्सिफिकेशन के ज़रिये मैनेज कर लिया है. भारत आज 40 देशों से क्रूड आयात करता है. भारत में 70% क्रूड ऑयल का आयात आज Strait of Hormuz के अलावा दूसरे समुद्री मार्गों से आ रही है, पहले ये 55% होता था.
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