- राज्यसभा के सभापति ने 'आप' के एक गुट के BJP में विलय को मंजूरी दे दिया है.
- भाजपा के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है और बहुमत के आंकड़े 123 से केवल एक सीट पीछे रह गई है.
- वर्ष 1988 के बाद पहली बार कोई दल अकेले दम पर राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंचा है, जिसमें भाजपा अग्रसर है.
राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी (आप) के एक गुट के BJP में विलय को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही 'आप' के 7 सांसद औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो गए हैं. राज्यसभा के ताजा आंकड़ों के अनुसार डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता अब बीजेपी के सांसद माने जाएंगे. इसके बाद बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है.
बहुमत के आंकड़े 123 से सिर्फ एक सीट पीछे
इस विलय के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में अब केवल 2 सांसद रह गए हैं. इसके साथ ही राज्यसभा में भाजपा की स्थिति ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है. यदि सात मनोनीत सांसदों और दो निर्दलीय सांसदों—दिलीप रे और कार्तिकेय शर्मा—को भी जोड़ लिया जाए, तो भाजपा बिना किसी सहयोगी दल के बहुमत के आंकड़े 123 से सिर्फ एक सीट पीछे रह जाती है. इससे पहले वर्ष 1988 में कांग्रेस आखिरी बार अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंची थी. यानी पिछले लगभग 40 वर्षों में कोई भी दल अकेले दम पर इस स्थिति तक नहीं पहुंच सका था, लेकिन अब बीजेपी धीरे‑धीरे उस स्तर की ओर बढ़ रही है.

बीजेपी की स्थिति और मजबूत होगी
इस साल के अंत तक बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो सकती है, क्योंकि अभी 35 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. सहयोगी दलों को मिलाकर बीजेपी की कुल संख्या राज्यसभा में 148 तक पहुंच चुकी है, जो दो‑तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद नजदीक है. इतनी बड़ी संख्या के साथ बीजेपी अब राज्यसभा में कई अहम विधेयकों को आसानी से पारित कराने की स्थिति में आ गई है.
विपक्ष के लिए बड़ा झटका
दूसरी ओर यह विपक्ष के लिए बड़ा झटका है. हाल ही में महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाए गए संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को सरकार लोक सभा में पारित नहीं कर सकी थी. इसके विरोध में 230 वोट पड़े थे जो विपक्षी एकता का सबूत है. लेकिन अब हालात बदल जाएंगे. लोक सभा में चाहे सरकार को दो-तिहाई बहुमत पाने में परेशानी हो. लेकिन राज्य सभा में वह इसके काफी नजदीक पहुंच गए हैं.

आम आदमी पार्टी के लिए ये बड़ा झटका
अमूमन सर्वदलीय बैठकों में भी सरकार की ओर से निमंत्रण संख्या बल के आधार पर मिलता है. कई बार पांच से कम सदस्य संख्या वाली पार्टियों को नहीं बुलाया गया. हालांकि, लोक सभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद हैं और ऐसे में उसके संसदीय दल में अब भी 6 सांसद हैं. संसदीय समितियों में भी आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व घटेगा और विपक्ष की बैठकों में भी उसकी आवाज कमजोर पड़ेगी.
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