दिल्‍ली के 'मटका मैन' अलग नटराजन, जो लोगों को बांटते हैं साफ पानी और गुणवत्‍तापूर्ण खाना

हजारों लोग, दिल्‍ली शहर के विभिन्‍न स्‍थानों में अलग द्वारा स्‍थापित किए गए मटकों पर निर्भर हैं. सभी श्रमिकों को पता रहता है कि इस एरिया में 'मटकामैन' के स्‍टेंड में पानी रहेगा.

नई दिल्‍ली :

दक्षिणी दिल्‍ली के पंचशील पार्क एरिया के  73 वर्षीय 'कैंसर सर्वाइवर' (कैंसर पर जीत हासिल करने वाले) एक खास मिशन पर हैं. हर सुबह वे अपनी 'मोडिफाइड'  (संशोधित) वैन पर इस मिशन के लिए निकल पड़ते हैं. 'मटकामैन' के नाम से लोकप्रिय अलग नटराजन (Alag Natrajan) का यह मिशन है-हर शख्‍स के लिए स्‍वच्‍छ पानी उपलब्‍ध कराना. करीब 30 वर्ष लंदन में रहने के बाद नटराजन एक दशक पहले ही भारत लौटे हैं. विदेश में आलीशान जिंदगी जीने के बाद, भारत वापस आए इस शख्‍स को आर्थिक समानता और गरीबों की पीड़ा ने अंदर तक झकझोर दिया और उन्‍होंने इस दिशा में काम करने का फैसला किया. अलग कहते हैं कि उनके पास पर्याप्‍त (धन) है ऐसे में उन्‍होंने अपने जीवन को उन लोगों के लिए समर्पित कर दिया है जिन्‍हें इसकी सबसे ज्‍यादा जरूरत है. उन्‍होंने कहा, "मुझे अब पैसों की कोई जरूरत नहीं है.  मेरे पास शानदार कार खरीदने के लिए पर्याप्‍त पैसा है कि लेकिन ज्‍यादा पैसा होने  का क्‍या फायदा. " मैंने अंतरात्‍मा की आवाज पर जरूरतमंदों की मदद करना चुना है. हम सभी की अंतरात्‍मा है लेकिन कई बार हम लालच के कारण 'यह' नहीं करते."   

अलग शुरुआत में गरीब और ऐसे लोगों के दाह संस्‍कार, जिनके अंतिम संस्‍कार के लिए कोई आगे नहीं आता था, में मदद करते थे. बाद में उन्‍होंने अपनी दो वैनों को नया रूप दिया और पानी बांटना शुरू किया और फिर हर सप्‍ताह कम से कम दो बार खाना बांटने लगे. उनके काम की जो सबसे महत्‍वपूर्ण बात है, वह है-गरिमा के साथ सेवा प्रदान करना. वे कहते हैं, "मैं लगभग 250 लोगों को खाना उपलब्‍ध कराता हूं.  मैं एक बात जानता है, वह यह कि आप जो भी करें, अच्‍छी तरह से करें. मैं जो खाना प्रदान करता हूं कि वह अच्‍छी गुणवत्‍ता का और हाइजनिक हो. मैंने तुरंत खाना बांटना शुरू नहीं किया. मैंने शुरुआत खीरे/ककड़ी (cucumbers) से की, इसके बाद इडली और अब  भोजन पर आ गया हूं. " उन्‍होंने कहा, "ये लोग मेरे अतिथि हैं, यदि मैं इन्‍हें अच्‍छा भोजन नहीं दे सकता तो खाना सर्व करने के कोई मायने नहीं हैं. मैं उन्‍हें वैसा ही खाना सर्व करता हूं जैसा अपने मेहमानों को करता हूं." 73 साल के अलग, जरूरतमंदों को केवल खाना ही नहीं, फोल्‍डेबल कुर्सियां भी देते हैं ताकि लोग जब खाना खाएं तो रोड के बजाय इन कुर्सियों पर बैठ सकें. 

अलग नटराजन के इस सेवाकार्य में उनकी पत्‍नी बैकग्राउंड में रहते हुए मैनेजर के तौर पर काम करती हैं. सीता नटराजन कहती हैं, "इससे पहले हम लंदन में रहते थे, बाहर जाते थे, खूब यात्रा करते थे. विश्‍वास कीजिए उनके (अलग के) पास पहले पॉर्श (Porsche) थी, अब हमारे पास 120 सीसी का स्‍कूटर है. वह अपने ऊपर कुछ भी खर्च करना नहीं चाहते. पैसा खर्च करने का उनकी अवधारणा अब बदल गई है. मैं इसे लेकर बेहद खुश हूं. यह उन्‍हें व्‍यस्‍त और खुश रखता है. वे सब कुछ अपनी दम पर करते हैं लेकिन काम और राशि पर नजर रखने के लिए कोई तो होना चाहिए, मैं यह करती हूं. " 

अलग पूरी दिल्‍ली में यात्रियों को पानी उपलब्‍ध कराने के लिए दिनभर काम करते हैं, उनका यह काम गर्मी से जूझ रहे इस शहर के लिए 'जीवनरक्षक' का काम करता है. हजारों लोग, दिल्‍ली शहर के विभिन्‍न स्‍थानों में अलग द्वारा स्‍थापित किए गए मटकों पर निर्भर हैं. सभी श्रमिकों को पता रहता है कि इस एरिया में 'मटकामैन' के स्‍टेंड में पानी रहेगा. वे कहते हैं, "हमें बाहर कहीं और पानी नहीं मिलता." बस-ट्रक ड्राइवर और अन्‍य यात्री भी यहीं पानी पीते हैं. पानी खत्‍म होने की स्थिति में एक नंबर भी दिया जाता है. वे बताते हैं, "जब हम इस नंबर पर कॉल करते हैं तो 'मटकामैन' आकर फिर से इन मटकों को भर देते हैं फिर चाहे दिन का कोई सा भी समय हो. "

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पंचशील पार्क के करीब सिक्‍युरिटी गार्ड के तौर पर काम करने वाले रमेश कहते हैं, "आप पानी खरीद नहीं सकते क्‍योंकि यह महंगा है. मेरे जैसा शख्‍स पानी नहीं खरीद सकता और न ही हम बंगले के मालिक से बार-बार पानी के लिए कह सकते हैं." जिन लोगों को 'मटकामैन' की ओर से तैयार कराया गया भोजन मिलता है, उनका अनुभव पांच सितारा होटल की तरह का होता है. एक ऑटो रिक्‍शा ड्राइवर धरमवीर कहता है, "जूस, फल और लस्‍सी, वे लंच में खाने की वैरायटी उपलब्‍ध करते हैं. वे मटकों को साफ करते हैं और इस काम में किसी तरह की औपचारिकता नहीं करते. कई बार हम सोचते हैं कि हम घर जाएंगे और खाएंगे और पैसे बचाने के लिए पूरा दिन भूखे रहेंगे लेकिन कई लोग भोजन के लिए उन पर निर्भर हैं. वे हर किसी को सम्‍मान और Hygienic भोजन देते हैं." कूड़ा एकत्रित करने वाला रफीअल इस्‍लाम कहता है, "आज उन्‍होंने राजमा, आलू, आम, तरबूज, कुलचे और सलाद दिया, यह पांच स्‍टार होटल की तरह का अनुभव है." रफीअल कहते हैं, "खाना, पानी, शादी या मौत की स्थिति में पैसा, जब जरूरत होती है वे हर तरह से मदद करते हैं. लॉकडाउन के दौरान जिसने मदद मांगी, उन्‍होंने पैसे, राशन, गरम कपड़ों, दवाओं के जरिये हर किसी की मदद की. जब हम उन्‍हें देखते हैं तो बेहद खुशी होती है. मैंने अपनी पूरी जिंदगी में दिल्‍ली में उनके जैसा शख्‍स नहीं देखा. वह सब कुछ खुद करते हैं और जैसा सम्‍मान वह देते हैं, वैसा सम्‍मान तो हमें अपने घर में भी नहीं मिलता."