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पिज्जा, पास्ता, नूडल्स... कांवड़ियों के मेन्यू में फास्टफूड का भी इंतजाम, पोहा-जलेबी से हक्का नूडल्स तक

कांवड़ियों के लिए दोपहर के भोजन में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजा रोटियों के साथ रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों की व्यवस्था है.

पिज्जा, पास्ता, नूडल्स... कांवड़ियों के मेन्यू में फास्टफूड का भी इंतजाम, पोहा-जलेबी से हक्का नूडल्स तक
कांवर शिविर में मौजूद कांवड़ियों को खाना परोसते स्थानीय जनप्रतिनिधि.
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मेरठ:

सावन के महीने में हर ओर बोल बम के जयकारे की गूंज है. जगह-जगह कांवड़ यात्रियों की धूम दिख रही है. हरिद्वार से निकलकर पश्चिमी यूपी, हरियाणा और राजस्थान के अलग-अलग जगहों के लिए भक्त गुजर रहे हैं. उनके लिए तमाम तरह की व्यवस्थाएं भी की गई हैं.  इस बीच यह रोचक जानकारी मेरठ से सामने आ रही है. जहां सावन कांवड़ यात्रा में सात्विक परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं को बिना प्याज-लहसुन के देसी व्यंजनों के साथ पास्ता, पिज्जा, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसे आधुनिक व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं. 

सुबह की शुरुआत पोहा-जलेबी से, शाम के नास्ते में हक्का नूडल्स तक

दरअसल कांवड़ यात्रा में सेवा, स्वच्छता और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है और कांवड़ मार्ग पर लगे शिविरों में शिवभक्तों के स्वागत के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की गई हैं. कांवड़ियों के लिए पूरे दिन का भोजन निर्धारित किया गया है. सुबह की शुरुआत चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी से होती है, जबकि नाश्ते में समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो परोसे जा रहे हैं.

दोपहर के भोजन में शाही पनीर से लेकर चूरचूर नान तक

दोपहर के भोजन में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजा रोटियों के साथ रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों की व्यवस्था है. शाम के वक्त श्रद्धालुओं को स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट व रेड सॉस पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज, मैकरोनी, सूप और बर्गर परोसे जा रहे हैं.

रात के खाने में छोले-पूड़ी से लेकर खीर हलवा तक

वहीं रात के खाने में कावंडि़यों को छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, दाल, ताजी रोटियों के साथ खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड और गुलाब जामुन परोसे जा रहे हैं. शिविरों में लस्सी, छाछ, जूस, चाय, कॉफी और शीतल पेयजल की भी निरंतर व्यवस्था है.

शिविर में लगी है आटा गूंधने और रोटी बनाने की मशीन 

‘कंकरखेड़ा व्यापार संघ' के शिविर में तकनीक ने सेवा को नयी गति दी है. शिविर संयोजक नीरज मित्तल और व्यवस्था संचालक राजेश खन्ना के अनुसार 20 किलो आटा एक साथ गूंधने वाली मशीन और ऑटोमैटिक रोटी मशीन लगाई गई है.

उन्होंने बताया कि मशीन एक मिनट में करीब 16 और एक घंटे में लगभग 900 रोटियां तैयार कर रही है. प्रतिदिन छह से सात हजार रोटियां बनाई जा रही हैं. सब्जियां काटने और मसाले तैयार करने के लिए भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कम समय में हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार हो रहा है.

मोदीपुरम स्थित शिविर संचालक दल के सदस्य सुधीर रस्तोगी ने बताया कि उपवास रखने वाले कांवड़ियों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है.

इस बार अनेक शिविरों को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाया गया है. ‘मां कांवड़ सेवा शिविर' के संचालक अमित मूर्ति का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाना है.

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