- मार्को रूबियो ने पीएम मोदी से हुई बैठक को सकारात्मक और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बताया
- अमेरिका भारत के साथ रक्षा, तकनीकी सहयोग और निवेश के नए क्षेत्रों को तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है
- भारत ने ऊर्जा आयात में विविधता अपनाई है और अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग को रणनीतिक रूप से अहम माना है
एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से मीटिंग बहुत पॉजिटिव रही. अमेरिका और भारत के संबंधों की नींव बहुत मजबूत है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के संबंध भी दोनों देशों के बीच काफी अच्छे रहे हैं. दोनों देश के रिश्ते बेहद करीबी हैं. अभी अमेरिकी दूतावास में भी मैंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारे रुख और दृष्टिकोण में भारत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ये दौरा इस रिश्ते में और नए क्षेत्रों को खोलने और ढूंढने के लिए है.
मार्को रूबियो ने कहा, 'हम डिफेंस में भारत के साथ को-प्रोडक्शन करना चाहते हैं. टेक्नोलॉजी में मिलकर काम करना चाहते हैं. निवेश में साथ काम करना चाहते हैं. भारतीय कंपनियों ने ही अकेले 20 बिलियन डॉलर का अमेरिका में निवेश किया हुआ है. तो ये रिश्तों में नई संभावनाएं तलाशने का दौरा है.'
#NDTVExclusive | "India-US ties only growing": US Secretary of State Marco Rubio (@SecRubio) to @VishnuNDTV pic.twitter.com/8egRkkhnc2
— NDTV (@ndtv) May 23, 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी बहुत बिजी रहते हैं. वो अभी विदेश के दौरे से आए हैं. लेकिन हम उन्हें जल्द व्हाइट हाउस में देखना चाहेंगे. हम उन्हें इसी साल दिसंबर में जी 20 शिखर सम्मेलन में भी देखना चाहेंगे.
क्वाड क्या अब भी महत्वपूर्ण
क्या क्वाड अब फिर से महत्वपूर्ण हो गया? इस सवाल पर मार्को रूबियो ने कहा, 'कौन कहता है क्वाड महत्वपूर्ण नहीं है. मैं ऐसा नहीं मानता. मैं तो मानता हूं कि ये पहले से और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. क्वाड में हम चार शक्तिशाली देश हैं. चार आर्थिक शक्ति हैं. हम चारों मिलकर दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. एक उदाहरण मान लीजिए रेयर अर्थ मिनरल्स सप्लाई चेन का संकट. इससे निपटने के लिए हम चारों देशों की टेबल पर कुछ ना कुछ है. क्वाड के पास इतनी ताकत है कि वो कई समस्याओं पर ध्यान दे सकता है. क्वाड के साथ चुनौती मुद्दों को प्राथमिकता देना है. क्वाड से ठोस परिणाम मिलने चाहिए.'
भारत की ऊर्जा जरूरतों पर
मार्को रूबियो ने कहा, 'इंडिया बहुत बुद्धिमानी से अपने ऊर्जा जरूरतों के लिए कई देशों को साध रहा है. वो दुनिया के किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहते. होर्मुज इसका एक उदाहरण है. भारत ने ऊर्जा आयात में विविधता लाकर बुद्धिमानी का परिचय दिया है. अमेरिका के पास निर्यात के लिए पर्याप्त ऊर्जा भंडार है. ये भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी. वेनेजुएला से भी ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकती हैं. तो इस तरह से दोनों देशों के लिए ऊर्जा सहयोग महत्वपूर्ण है.'
क्या ईरान पर हमला होने वाला है?
प्रेसीडेंट ट्रंप के अपने बेटी की शादी नहीं अटेंड करने और वाशिंगटन में मौजूद होने की खबरों को ईरान पर हमले से जोड़ने पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, 'मैं टाइमफ्रेम पर कुछ नहीं कहूंगा. ईरान के साथ युद्ध हमेशा नहीं चल सकता. ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता. ईरान होर्मुज में जो कर रहा है, वह अवैध है. वो धमकी दे रहे हैं. वो कॉमर्शियल जहाजों पर हमले कर रहे हैं. अभी भी बातचीत चल रही है. या तो डिप्लोमेसी से हल होगा या किसी अलग तरीके से. ईरान की समस्या का समाधान किसी ना किसी तरह से होना ही चाहिए. यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे का समाधान होना चाहिए.'
भारतीयों को ग्रीन कार्ड वीजा मिलने में क्या प्रॉब्लम?
भारतीयों को ग्रीन कार्ड वीजा मिलने की दिक्कतों पर मार्को रूबियों ने कहा, 'ये सिर्फ इंडिया के बारे में नहीं है. ये पूरी दुनिया के लिए है. अमेरिका ने फैसला किया कि इमिग्रेशन पर अपने सिस्टम को ठीक करना होगा. फैक्ट ये है कि सभी देश ये समझ रहे हैं और ये इंडिया के बारे में नहीं है कि ग्लोबल सिचुएशन है. हमारे देश में 20 मिलियन लोग अवैध रूप से घुस आए. हमने ग्रीन कार्ड सिस्टम में भी कई लूपहोल देखे. तो हमने तय किया कि हम रिफॉर्म करेंगे. जब भी आप कोई रिफॉर्म करते हैं तो समस्याएं आती ही हैं. मगर लॉन्ग टर्म में ये सिस्टम बहुत स्टेबल होगा. ये सिस्टम भारतीयों और हमारे लिए, दोनों के लिए बेहतर साबित होगा.'
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