- भारत के बनारस लोकोमोटिव वर्क्स से निर्मित दस रेल इंजन मोजाम्बिक को निर्यात किए जा चुके हैं
- बनारस रेल इंजन कारखाना ने 19 जुलाई 2023 को 2,500वां इलेक्ट्रिक रेल इंजन भारतीय रेलवे को समर्पित किया था
- बीएलडब्ल्यू ने अब तक कुल 10,822 रेल इंजन बनाए हैं, जिनमें डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों प्रकार के इंजन शामिल हैं
भारत में बने रेल इंजन अब दुनियाभर में धूम मचा रहे हैं. यह रेल इंजन 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के तहत अफ्रीका के देश मोजाम्बिक पहुंचे हैं. अब तक भारत 10 लोकोमोटिव यानी रेल इंजन भेज चुका है. इसका आखिरी बैच हाल ही में मापुटो पहुंचा. सबसे खास बात यह है कि ये रेल इंजन यूपी के बनारस में बने हैं. 'बनारस रेल इंजन कारखाना' (BLW) ने 'मेक इन इंडिया' की ताकत का लोहा पूरी दुनिया में मनवा दिया है. भारत में निर्मित अत्याधुनिक और शक्तिशाली रेल इंजन अब वहां की पटरियों पर भारत की इंजीनियरिंग कुशलता की रफ़्तार भरेगा.
रेल मंत्रालय ने शेयर की तस्वीरें
रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड'. बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) में निर्मित 3,300 एचपी वाले दो लोकोमोटिव का अंतिम बैच मापुटो पहुंचने के साथ ही भारतीय रेलवे ने मोजाम्बिक को कुल 10 लोकोमोटिव की आपूर्ति पूरी कर ली है, जो वैश्विक रेल निर्माण के क्षेत्र में भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है. इससे पहले 11 मार्च 2021 को पीयूष गोयल ने मोजाम्बिक को निर्यात के लिए 3000 एचपी केप गेज लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखाई थी.
Make in India, Make for the World 🚆🌍
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) April 20, 2026
With the final batch of two 3,300 HP locomotives manufactured at Banaras Locomotive Works (BLW) reaching Maputo, Indian Railways completes the supply of a total of 10 locomotives to Mozambique—showcasing India's strength in global rail… pic.twitter.com/kp0WRNn4JL
पिछले साल बनारस रेल इंजन कारखाने ने रचा था इतिहास
बता दें कि 19 जुलाई 2025 को बनारस रेल इंजन कारखाने ने इतिहास रचा था. बनारस रेल इंजन कारखाने ने बीते वर्ष 19 जुलाई को अपना 2,500वां इलेक्ट्रिक रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित किया था. महाप्रबंधक नरेशपाल सिंह ने अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी के 6,000 एचपी इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था.

यह समारोह भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ था. अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी नवाचार से निर्मित 2,500वां इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बीएलडब्ल्यू की तेज गति से काम करने की क्षमता को दर्शाता है. मात्र आठ वर्षों के भीतर इस उपलब्धि तक पहुंचना भारतीय रेलवे के विनिर्माण इतिहास में एक रिकॉर्ड है.
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अपनी स्थापना के बाद से बीएलडब्ल्यू ने कुल 10,822 इंजनों का निर्माण किया है, जिनमें 7,498 डीजल और 2,500 इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं. अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में इसने 472 इलेक्ट्रिक इंजनों का उत्पादन किया था. यह कारखाना अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डरों को भी पूरा कर रहा है। मोजाम्बिक की ओर से ऑर्डर किए गए दस एसी डीजल-इलेक्ट्रिक इंजनों में से दो को भेजा गया था. इस कारखाने से मोजाम्बिक को 10 लोकोमोटिव की आपूर्ति की जा चुकी है.
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(IANS के इनपुट के साथ)
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