- भारत और उज्बेकिस्तान के बीच नामंगन क्षेत्र में सातवें संस्करण का संयुक्त सैन्य अभ्यास डस्टलिक चल रहा है
- अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और युद्ध कौशल को बेहतर बनाना है
- पिस्टल फायरिंग, आरपीजी और ड्रोन उपयोग सहित विविध युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है
आतंक के खिलाफ कैसे कार्रवाई हो? कैसे पहाड़ी और शहरी क्षेत्रों में बेहतर तालमेल हो. इसी थीम को लेकर भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'डस्टलिक' उज्बेकिस्तान के नामंगन क्षेत्र में जारी है. वहां के गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में इसका आयोजन किया गया है. यह इस अभ्यास का सातवां संस्करण है. यह 12 अप्रैल से शुरू हुआ है और 25 अप्रैल तक चलना है. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता को मजबूत करना है. अभ्यास में खास ध्यान अर्ध-पहाड़ी इलाकों में युद्ध कौशल पर दिया जा रहा है. यह इलाका ऊबड़-खाबड़ है. अभ्यास में सैनिकों के लिए वास्तविक हालात तैयार किए गए हैं. साझा अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं रणनीति और तकनीक साझा कर रही हैं. वैसे यह अभ्यास हर साल आयोजित किया जाता है और बारी-बारी से दोनों देशों में होता है.
दोनों देशों की सेनाएं ले रहीं हिस्सा
14 दिनों के इस अभ्यास में दोनों सेनाओं के लगभग 60-60 सैनिकों हिस्सा ले रहे हैं. अभ्यास के दौरान सैनिकों को कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसमें एरिया फेमिलियराइजेशन यानी इलाके की जानकारी शामिल है. पिस्टल फायरिंग और रिफ्लेक्स शूटिंग का अभ्यास कराया जा रहा है.आरपीजी फायरिंग और बिना हथियार के लड़ाई भी इस ट्रेनिंग का हिस्सा रही. बायोनेट फाइटिंग यानी राइफल के आगे लगी संगीन से की जाने वाली आमने-सामने की करीबी लड़ाई का अभ्यास भी किया गया. मॉडर्न वॉरफेयर में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन यानी यूएवी के इस्तेमाल पर भी ट्रेनिंग दी गई. शहरी इलाकों में ‘फायर एंड मूव' ड्रिल कराई गई.

ऑपरेशन के दौरान घायल सैनिकों को निकालने की प्रक्रिया भी सिखाई गई. टोही और निगरानी की ट्रेनिंग दी गई. घर के अंदर घुसकर ऑपरेशन करने की ड्रिल कराई गई. पहाड़ चढ़ने और रस्सी से उतरने का अभ्यास भी हुआ. स्नाइपर ट्रेनिंग और दिशा-निर्देशन यानी नेविगेशन अभ्यास भी कराया गया. इन सभी गतिविधियों से ऑपरेशन की तैयारी मजबूत हो रही है.

अभ्यास में क्या-क्या शामिल?
अभ्यास में फिटनेस पर भी ज़ोर है. दौड़, एक्सरसाइज और योग इस अभ्यास का हिस्सा हैं. आने वाले दिनों में यह अभ्यास और कठिन होगा. इस अभ्यास में संयुक्त मिशनों पर फोकस बढ़ेगा. दुश्मन के ठिकानों पर हमले की ट्रेनिंग दी जाएगी. टारगेट को कब्जे में लेने की रणनीति सिखाई जाएगी. हेलीकॉप्टर के जरिए ऑपरेशन का अभ्यास होगा. जॉइंट कमांड और कंट्रोल सिस्टम पर भी काम किया जाएगा. इस अभ्यास में विशेष ऑपरेशन की प्रक्रियाओं को परखा जाएगा. इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं मिलकर अपनी ताकत और समन्वय को बेहतर बना रही हैं. ‘डस्टलिक 2026' से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सैन्य संबंध मजबूत होंगे. यह अभ्यास भविष्य में संयुक्त अभियानों के लिए अहम माना जा रहा है.
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