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120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने से मेरी ज़िंदगी बदल गई, मैं बना टॉपर: हॉस्टल में रहने वाले छात्र रितिक अरोड़ा की कहानी

120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने की आदत ने कैसे बदली जिंदगी, सुधरे नंबर और बना टॉपर – हॉस्टल में रहने वाले छात्र का Real Life Experience.

120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने से मेरी ज़िंदगी बदल गई, मैं बना टॉपर: हॉस्टल में रहने वाले छात्र रितिक अरोड़ा की कहानी
120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने का नतीजा: हॉस्टल में रहने वाला छात्र कैसे बना टॉपर.

Real Life Experience: हाल ही में मैं अपने भतीजे के कॉलेज गई थी. कोई इवेंट था जिसमें हम सभी परिवार के लोगों को इन्वाइट किया गया था. इस दौरान मैं अपने भतीजे के दोस्त रितिक से मिली. वह पूरी तरह बदल गया था. इससे पहले मैं पिछले साल मई में रितिक से मिली थी. तब और अब वाले रितिक में जमीन-आसमान का फर्क था. मैंने रितिक से जब पूछा कि कौन सा जिम जॉइन कर लिया है, तो उसने बताया कि उसने कोई जिम जॉइन नहीं किया है बल्कि अपनी एक आदत छोड़ दी है.  र‍िति‍क के इस अनुभव से मुझे समझ आया कि Students ke liye early morning routine क्यों फायदेमंद है.

यह Real Life Experience सिर्फ एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि एक छोटी‑सी आदत के बड़े असर की मिसाल है

बस उसने देर रात सोने और सुबह देर से उठने की आदत बदल ली है. रितिक नीमराना में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है. दिनभर की क्लासेज के बाद वह इतना थक जाता था कि खाने का भी मन नहीं करता था. ऊपर से देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रोल करने की आदत के कारण नींद भी पूरी नहीं हो पाती थी.  इसका असर यह हुआ कि पूरा दिन चिड़चिड़ापन रहता, थकान बनी रहती और वजन भी बढ़ने लगा. ऐसा लगने लगा था कि जिंदगी गलत ट्रैक पर जा रही है.

रितिक ने बताया कि- 

''अक्सर मैं रात में फोन लेकर लेट जाता था. सोचता था कि पूरा दिन तो मैं काम और पढ़ाई में लगा रहता हूं, थोड़ा समय तो अपने लिए निकाल ही सकता हूं. इसी चक्कर में मैं रात भर रील्स देखता रहता था. 12 बजे के बाद हर रील देखते हुए यही सोचता था कि ये वाली आखिरी है, इसके बाद फोन रख दूंगा. लेकिन कब सुबह के 3 बज जाते थे, पता ही नहीं चलता था.''

देर रात जागने की आदत ने कैसे बिगाड़ी पढ़ाई और सेहत

रात को देर से सोने की वजह से मैं सुबह भी देर से उठता था. इसके चलते मेरी कई क्लासेज मिस हो रही थीं. क्योंकि यहां तो मम्मी भी नहीं हैं जो मुझे जल्दी उठाकर भेज दें.

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Early morning routine real life experience. 

रितिक की इस बात ने मेरा दिल छू लिया. लगा कि बच्चे अपने करियर के लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं. अब मैं और जिज्ञासु हो गई थी, तो मैंने पूछा कि ये सब तो ठीक है, लेकिन तुम्हारी पर्सनैलिटी में ये बदलाव कैसे आया. रितिक ने कुछ ऐसा कहा जो मेरे दिल को छू गया. वह मुझे मामी ही कहता है. उसने कहा

:"मामी, यहां आकर पता चला कि मां और फैमिली क्या होती है. यहां हम देर रात तक पार्टी करते हैं, दोस्तों के साथ मस्ती करते हैं, ऐसा लगता है कि सभी अपने हैं और पूरी आजादी है. लेकिन सच कहूं तो यहां आकर ही समझ आया कि मां की रोकटोक असल में रोकटोक नहीं, चिंता थी. जब रात को पार्टी करने के बाद मैं थक कर क्लास नहीं ले पाता था, तो मां की बातें और उलाहने याद आते थे कि कैसे वो मेरा शेड्यूल बिगड़ने नहीं देती थीं.''

कई बार स्वाद के चक्कर में बाहर का ज्यादा खा लेता हूं और फिर पेट खराब हो जाता है या बीमार पड़ जाता हूं. तब पापा याद आते हैं, जो हमेशा मेरे लिए डॉक्टर की तरह घरेलू इलाज तैयार कर देते थे. मामी, यहां कोई नहीं है, सिवाय किताबों, कुछ दोस्तों और दीवारों के. मेरा हाल खराब होता जा रहा था.

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Real Life Experience Student. 

भई, इतनी देर तक सुनते-सुनते मेरी आंखों में आंसू आ गए. मैंने अपने भांजे की तरफ देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या वह भी ऐसा ही महसूस करता है. उसकी मुस्कान से मुझे तसल्ली हुई. मैंने फिर रितिक की तरफ देखा, वह बोलता ही जा रहा था, जैसे किसी के सामने पहली बार खुल रहा हो:

"देर रात तक जागने से मेरी आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो गए, बाल झड़ने लगे, चेहरे पर काले धब्बे उभर आए और मैं बीमार-बीमार सा रहने लगा था. क्लासेज से ज्यादा मेरा समय मेडिकल रूम में बीत रहा था."

रितिक ने बताया कि इसके बाद उसने तय किया कि अब देर रात तक जागकर पढ़ने की बजाए सुबह जल्दी उठकर पढ़ेगा. सुबह जल्दी उठने का ख्याल ही उसे डराता था, पर उसने खुद को 4 महीने की डेडलाइन दी और हर हाल में ऐसा करने का फैसला किया. 

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120 days early morning routine changed my life. 


रितिक ने कहा:

"मैंने तय किया कि मैं 120 दिनों तक सुबह 3 बजे उठूंगा और पढ़ूंगा. पहले हफ्ते तो यह मौत की सजा जैसा लगा.शुरुआत में बहुत मुश्किल हुआ. पहला हफ्ता किसी सजा जैसा था. लेकिन 15 दिन बाद इसकी आदत पड़ने लगी और फिर सुबह उठना उतना मुश्किल नहीं रहा. पहले मैं अलार्म लगाकर सोता था और अलार्म बजता रहता था, मेरे कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी. लेकिन अब बिना अलार्म के ही आंख खुल जाती है.

रितिक खुद आए बदलावों से बहुत खुश है. उसके चेहरे पर इस बार अलग ही रौनक थी. उसने बताया कि जिस दिन मैंने तय किया कि अगले 120 दिनों तक रोज सुबह जल्दी उठूंगा और नियमित वॉक पर जाऊंगा, उस दिन नहीं पता था कि यहीं से धीरे-धीरे मेरी जिंदगी में पॉजिटिव बदलाव शुरू होंगे.

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120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने के फायदे. 

120 दिनों तक सुबह जल्दी उठने के फायदे

नींद की क्वालिटी में सुधार: अब रोज 7–8 घंटे की बिना रुकावट नींद मिलती है. पहले सिर्फ 5 घंटे सोने से चिड़चिड़ापन रहता था, लेकिन अब रात को समय पर नींद आ जाती है. सुबह फ्रेश महसूस होता है और ब्लड प्रेशर भी स्थिर रहने लगा है.

ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करना: अच्छी नींद और सही रूटीन की वजह से दिनभर एनर्जी बनी रहती है. पढ़ाई पर फोकस बेहतर हुआ और मूड भी पहले से काफी अच्छा रहता है.स्किन में सुधार: पर्याप्त नींद से स्किन हेल्थ पर अच्छा असर पड़ा. पहले चेहरा थका और बेजान लगता था, अब ज्यादा हेल्दी और फ्रेश दिखता है.

डार्क सर्कल कम होना: नींद पूरी होने से आंखों के नीचे काले घेरे धीरे-धीरे कम होने लगे. सुबह चेहरे पर नेचुरल ग्लो आने लगा.नाश्ते के लिए पर्याप्त समय: सुबह जल्दी उठने से पौष्टिक नाश्ता बनाने और आराम से खाने का समय मिल गया है. इससे दिन की शुरुआत बेहतर होती है और लंबे समय तक एनर्जी बनी रहती है.

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ध्यान और फोकस बढ़ना: सुबह जल्दी उठने से ‘स्लीप इनर्शिया' की समस्या कम हुई. अब पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में पहले से ज्यादा ध्यान लगा पाता हूं. आपका दिमाग़ उसी पल नहीं जाग जाता जिस पल आप जागते हैं, यही वजह है कि जब आप पहली बार उठते हैं तो आपको थोड़ा सुस्त और भ्रमित महसूस हो सकता है.

स्किन में सुधार : अच्छी नींद स्किन को स्वस्थ रखने में मदद कर करती है. नींद की कमी से होने वाला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस इन समस्याओं को बढ़ा सकता है, जैसे मुंहासे, सोरायसिस, एटॉपिक डर्मेटाइटिस, स्किन का जल्दी बुढा दिखना. मेरी स्किन जो बेजान सी दिखने लगी थी, उनमें फिर से जान लौट आई.

नाश्ते के लिए अधिक समय : सुबह जल्दी उठने से पेट भरने वाला नाश्ता बनाने और उसे आराम से खाना का समय मिलने लगा.  बजाय इसके कि पहले की तरह चलते-फिरते जल्दी में कुछ खाऊं. दिन की शुरुआत एक पौष्टिक भोजन से करने पर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है  और इससे शरीर में एनर्जी भी रहने लगी.

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पाठकों के सवाल (FAQs)

1: क्या सुबह जल्दी उठने से वाकई पढ़ाई में फायदा होता है?
उत्तर: हां, सुबह का समय सबसे शांत और डिस्ट्रैक्शन‑फ्री होता है. इस दौरान दिमाग ज्यादा फ्रेश रहता है, जिससे पढ़ाई में फोकस बेहतर होता है और चीजें जल्दी समझ आती हैं. खासकर छात्रों के लिए सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करना ज्यादा असरदार साबित हो सकता है.

2: हॉस्टल में रहकर सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डाली जा सकती है?
उत्तर: हॉस्टल में रहकर सुबह जल्दी उठना शुरुआत में मुश्किल हो सकता है, लेकिन रात को समय पर सोना, मोबाइल से दूरी बनाना और एक तय रूटीन फॉलो करना मददगार होता है. धीरे‑धीरे शरीर इस रूटीन का आदी हो जाता है और बिना अलार्म भी सुबह आंख खुलने लगती है.

3: सुबह जल्दी उठने से सेहत पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: सुबह जल्दी उठने से नींद की क्वालिटी बेहतर होती है, दिनभर एनर्जी बनी रहती है और मानसिक तनाव भी कम होता है. इसके अलावा स्किन हेल्थ, डार्क सर्कल और पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी सुधार देखा जा सकता है.

4: क्या हर छात्र के लिए सुबह जल्दी उठना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, जरूरी यह नहीं है कि हर छात्र एक ही समय पर उठे, लेकिन एक अनुशासित और संतुलित दिनचर्या सभी के लिए फायदेमंद होती है. अगर कोई छात्र सुबह देर से उठता है, तो भी उसे पूरी नींद और नियमित पढ़ाई का समय जरूर बनाए रखना चाहिए.

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