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ईरान के राष्ट्रपति को लेकर पूछे गए सवाल में महुआ मोइत्रा ने कर दी गलती, विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में ईरान से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर विदेश मंत्रालय से सवाल किया है. मोइत्रा का सवाल अतारांकित था, इसलिए सरकार ने इसका मौखिक नहीं बल्कि लिखित जवाब दिया है. 

ईरान के राष्ट्रपति को लेकर पूछे गए सवाल में महुआ मोइत्रा ने कर दी गलती, विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
  • तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में ईरान से जुड़े विषय पर विदेश मंत्रालय से 3 प्रश्न पूछे.
  • महुआ मोइत्रा ने ईरान के पूर्व राष्‍ट्रपति हसन रूहानी को लेकर सवाल पूछा था. हालांकि उन्‍होंने इसमें गलती कर दी.
  • विदेश मंत्रालय ने महुआ मोइत्रा के सवालों का जवाब दिया और उनकी गलती की ओर भी ध्‍यान दिलाया.
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ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते संकट, क्षेत्रीय तनाव और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की हमले में मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज है. भारत में भी यह मुद्दा छाया हुआ है. इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में ईरान से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर विदेश मंत्रालय से सवाल किया. हालांकि ईरान के राष्‍ट्रपति को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर महुआ मोइत्रा ने गलती कर दी. हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस जवाल का जवाब दिया और महुआ मोइत्रा का ध्‍यान उनकी गलती की ओर भी दिलाया. 

लोकसभा में तृणमूल सांसद ने महुआ मोइत्रा ने अतारांकित प्रश्‍न किया था. इसलिए सरकार ने उनके सवाल का 27 मार्च को मौखिक नहीं बल्कि लिखित जवाब दिया है. हालांकि मोइत्रा के सवाल का विदेश मंत्रालय ने क्‍या जवाब दिया है, इसका जवाब जानने से यह जरूरी है कि उन्‍होंने सवाल क्‍या किया है. महुआ मोइत्रा ने भारत-ईरान संबंध शीर्षक के तहत तीन भागों में सवाल पूछा था.

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महुआ मोइत्रा ने पूछे थे ये सवाल? 

1. 2024 में ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी की मृत्यु के बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने वाले सरकारी अधिकारी का पद और पदनाम क्या था? 

2. अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने वाले सरकारी अधिकारी का पद और पदनाम क्या था ? 

3. प्रतिनिधित्व के स्तर में अंतर के कारण क्या हैं?

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विदेश सचिव ने जताया था शोक

सवाल सामान्य सा था लेकिन इसमें सरकार को घेरने की कोशिश भी थी. दरअसल विपक्ष इस बात के लिए सरकार की आलोचना करता रहा है कि खामेनेई की मौत के बाद मोदी सरकार ने तुरंत इसका शोक नहीं जताया और शोक जताने दिल्ली के ईरानी दूतावास गए भी तो विदेश सचिव विक्रम मिस्री. हालांकि इस सवाल में मोइत्रा ने एक तथ्यात्मक गलती कर दी. 

सरकार ने क्या दिया ये जवाब? 

आइए जानते हैं कि विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने तीनों सवालों का सिलसिलेवार क्‍या जवाब दिया है. 

1. यह प्रश्न नहीं उठता क्योंकि 2024 में ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी नहीं थे. 

2. अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद विदेश सचिव ने 5 मार्च 2026 को दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे.

3. यह प्रश्न नहीं उठता. 

2024 में किस ईरानी राष्ट्रपति की हुई मृत्यु? 

अब आप समझ गए होंगे कि वो तथ्यात्मक गलती क्या थी. दरअसल, जिस ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी का जिक्र मोइत्रा ने अपने पहले सवाल में किया है वो 2013 से 2021 तक पद पर थे और आज भी जीवित हैं. रूहानी के पद से हटाने के बाद उनकी जगह 2021 में राष्ट्रपति के पद पर इब्राहिम रईसी काबिज हुए, जिनकी मृत्यु 2024 में हुई थी. 

विपक्ष कर रहा विदेश नीति की आलोचना

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जब से शुरू हुआ है, तब से विपक्ष लगातार ईरान मामले पर विदेश नीति को लेकर सरकार पर हमलावर है. खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी इस बात का आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार ने इजरायल और अमेरिका के दबाव में ईरान से जुड़ी भारत की दशकों पुरानी नीति को बदल दिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ईरान पर हुए हमले और उसमें ईरान के सुप्रीम धार्मिक नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत को लेकर चुप्पी साधे हुए है और उसने इस हमले की निंदा नहीं की है. 

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