- डॉ. महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो का नया डायरेक्टर नियुक्त किया गया है
- उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने से पहले सुरक्षा तैयारियों और रणनीतियों में अहम भूमिका निभाई
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठन के बाद राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में योगदान दिया
सीनियर IPS अधिकारी डॉ. महेश दीक्षित को देश की सबसे अहम आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया डायरेक्टर बनाया गया है. महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं. वे अब तक IB में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे. दीक्षित मौजूदा आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका की जगह लेंगे. डेका 2022 से आईबी की कमान संभाल रहे थे.
सरकार ने की नियुक्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा जारी आदेश में लिखा है कि कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमिटी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर, IPS महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर बनाने को मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति IPS तपन कुमार डेका की जगह पर होगी. उनका कार्यकाल पद संभालने की तारीख से दो साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक रहेगा.

कौन हैं महेश दीक्षित?
डॉ महेश दीक्षित देश के सबसे अनुभवी इंटेलिजेंस ऑफिसर्स में गिने जाते हैं. उनके करियर के सबसे अहम अध्यायों में से एक अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले की तैयारी में उनकी भूमिका थी. घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि दीक्षित ने इस ऐतिहासिक कदम के सुरक्षा प्रभावों का आकलन करने में अहम भूमिका निभाई और बदलाव के दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रणनीतियां बनाने में मदद की.
तत्कालीन राज्य के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन के बाद, दीक्षित को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां सौंपी गईं. अधिकारियों का मानना है कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर में जनता का भरोसा बहाल करने में मदद की और साथ ही आतंकवाद और अलगाववादी तत्वों से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया.
जम्मू-कश्मीर में अहम इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां संभालने के दौरान, श्रीनगर ने 2023 में G20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक की सफलतापूर्वक मेजबानी की. इस कार्यक्रम ने काफी अंतरराष्ट्रीय ध्यान और भागीदारी आकर्षित की. शिखर सम्मेलन का सुचारू संचालन क्षेत्र के बेहतर होते सुरक्षा माहौल को दिखाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना गया. इसी दौरान, कई विदेशी राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों ने कश्मीर का दौरा किया, जो इस क्षेत्र के साथ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को दर्शाता है. इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दीक्षित ने जमीनी हकीकत और बदलती परिस्थितियों का सही आकलन करने में अहम भूमिका निभाई. इससे कूटनीतिक स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने और जमीनी हालात में भरोसे को मजबूत करने में मदद मिली.
अहम समय पर हुई दीक्षित की नियुक्ति
यह नियुक्ति एक अहम मोड़ पर हुई है, क्योंकि भारत आतंकवाद और कट्टरपंथ से लेकर साइबर खतरों और सीमा पार से गलत सूचना फैलाने वाले अभियानों जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. नए IB प्रमुख के तौर पर, दीक्षित से उम्मीद है कि वे आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा व इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने के मकसद से इंटेलिजेंस ऑपरेशन्स की देखरेख करेंगे.
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