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आधुनिक शिक्षा प्रणाली से पहले शिक्षा देने वाले 8 प्राचीन भारतीय गुरु

छात्र गुरु के आश्रम में रहकर केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिकता, जीवन-कौशल और आध्यात्मिक मूल्यों की भी शिक्षा प्राप्त करते थे. भारत की इसी परंपरा ने ऐसे अनेक गुरु दिए, जिनकी शिक्षाएं सदियों बाद भी प्रेरणा हैं. 

आधुनिक शिक्षा प्रणाली से पहले शिक्षा देने वाले 8 प्राचीन भारतीय गुरु

आज स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रमुख केंद्र हैं, लेकिन प्राचीन भारत में गुरुकुल प्रणाली ज्ञान का मुख्य आधार थी. छात्र गुरु के आश्रम में रहकर केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिकता, जीवन-कौशल और आध्यात्मिक मूल्यों की भी शिक्षा प्राप्त करते थे. भारत की इसी परंपरा ने ऐसे अनेक गुरु दिए, जिनकी शिक्षाएं सदियों बाद भी प्रेरणा हैं. 

1. आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध शिक्षक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक थे. उनकी पुस्तक 'अर्थशास्त्र' शासन, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन का महत्वपूर्ण ग्रंथ मानी जाती है. उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य का मार्गदर्शन कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

2. महर्षि वेदव्यास

महर्षि वेदव्यास को वेदों का संकलन और वर्गीकरण करने का श्रेय दिया जाता है. वे महाभारत के रचयिता भी माने जाते हैं. भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. 

3. महर्षि पतंजलि

योग दर्शन के प्रमुख आचार्य महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र की रचना की. उनके विचारों ने योग को केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और आत्म-विकास का मार्ग बताया. आज भी दुनिया भर में योग शिक्षा का आधार उनके सिद्धांत माने जाते हैं. 

4. गुरु द्रोणाचार्य

महाभारत के अनुसार, द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु थे. उन्हें धनुर्विद्या और युद्धकला का महान शिक्षक माना जाता है. उनकी शिक्षा में अनुशासन, अभ्यास और लक्ष्य के प्रति समर्पण को विशेष महत्व दिया गया. 

5. महर्षि याज्ञवल्क्य

याज्ञवल्क्य उपनिषदों के प्रमुख दार्शनिकों में गिने जाते हैं. बृहदारण्यक उपनिषद में उनके संवाद ज्ञान, आत्मा और ब्रह्म के गहन दार्शनिक विचार प्रस्तुत करते हैं. उनके प्रश्नोत्तर आधारित शिक्षण को भारतीय बौद्धिक परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. 

6. महर्षि वाल्मीकि

महर्षि वाल्मीकि को रामायण का रचयिता माना जाता है. परंपरा के अनुसार उन्होंने भगवान राम के पुत्र लव और कुश को शिक्षा दी. उनकी रचना ने साहित्य, नैतिकता और आदर्श जीवन के मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचाया. 

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7. आदि शंकराचार्य

आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया और पूरे भारत में चार प्रमुख मठों की स्थापना की. उन्होंने तर्क, दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान को नई दिशा दी तथा भारतीय दार्शनिक परंपरा को मजबूत किया. 

8. महर्षि वशिष्ठ

महर्षि वशिष्ठ वैदिक परंपरा के प्रमुख ऋषियों में माने जाते हैं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार वे भगवान राम के कुलगुरु थे. उनकी शिक्षाओं में सत्य, धर्म, आत्मसंयम और कर्तव्य पालन पर विशेष बल दिया गया है. 

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