विज्ञापन

महाराष्ट्र में आरक्षण पर चौतरफा रण-मराठा, ओबीसी, एससी...कौन क्या मांग रहा है?

ओबीसी समाज की विभिन्न मांगों को लेकर एडवोकेट मंगेश ससाने अपने 4 साथियों के साथ अंतरवाली सराटी में सांकेतिक अनशन पर बैठे थे.

महाराष्ट्र में आरक्षण पर चौतरफा रण-मराठा, ओबीसी, एससी...कौन क्या मांग रहा है?
महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर प्रदर्शन
PTI

महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. इस समय 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स मिलने पर हलचल है. इस मुद्दे को लेकर विधायक प्रसाद लाड और मंत्री विखे पाटिल एक अहम बैठक कर रहे हैं. इस बैठक में मराठवाड़ा के नागरिकों को कुनबी यानी OBC मानकर कुनबी प्रमाणपत्र बांटने की प्रक्रिया पर अहम चर्चा हो रही है. 

मराठवाड़ा के सभी अनुविभागीय अधिकारी SDO, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी BDO वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक से जुड़े हैं. 10 दिन से अनशन आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल सरकार द्वारा खोजे गए 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर मराठों को ओबीसी कोटे के तहत तुरंत कुनबी प्रमाण पत्र देने की मांग कर रहे हैं.

दूसरी तरफ मराठा आरक्षण, कुनबी प्रमाणपत्र और जाति सत्यापन की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का अनशन आज दसवें दिन में प्रवेश कर गया है. सरकार उनकी मांगों पर समाधान निकालने का प्रयास कर रही है.. दूसरी ओर जालना के अंतरवली सराटी में अनशन पर बैठे ओबीसी नेता मंगेश ससाणे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

जालना में मराठा प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू करने वाले ओबीसी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने कार्रवाई की है, OBC नेता एडवोकेट मंगेश ससाने और उनके 4 साथियों को हिरासत में लिया गया है. एडवोकेट मंगेश ससाने और उनके 4 साथियों ने जालना के अंतरवाली सराटी में सांकेतिक अनशन शुरू किया था, ऐसे में अब ओबीसी प्रदर्शनकारियों को अनुमति नकारे जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है.

ओबीसी समाज की विभिन्न मांगों को लेकर एडवोकेट मंगेश ससाने अपने 4 साथियों के साथ अंतरवाली सराटी में सांकेतिक अनशन पर बैठे थे. पुलिस ने इस अनशन को अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

जानकारी के लिए बता दें कि कुनबी प्रमाण पत्र वह आधिकारिक दस्तावेज है जो महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के कुछ लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग OBC का आरक्षण प्राप्त करने का रास्ता दिखाता है. कुनबी महाराष्ट्र में पारंपरिक रूप से खेती और पशुपालन से जुड़ी एक जाति है, जिसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा माना गया है और यह पहले से ओबीसी श्रेणी में आती है.

इतिहास में मराठा और कुनबी एक ही सामाजिक दायरे के हिस्से रहे हैं. कई पुराने सरकारी दस्तावेजों जैसे हैदराबाद गजट में मराठा समुदाय के लोगों को भी कुनबी के रूप में दर्ज किया गया है. चूंकि मराठा समुदाय के लोग सामान्य या अलग कोटे में आते हैं, इसलिए वे ओबीसी के तहत मिलने वाले लाभों को पाने के लिए खुद को कुनबी साबित करना चाहते हैं.

यह प्रमाण पत्रधारक को कुनबी जाति का होने का अधिकार देता है जिससे वे ओबीसी आरक्षण के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं. यह प्रमाण पत्र हर मराठा को नहीं मिलता. इसके लिए पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड या हैदराबाद और बॉम्बे गजट में अपने पूर्वजों के नाम कुनबी के रूप में दर्ज होने का सबूत देना पड़ता है.

महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाई गई विशेष समितियां जैसे शिंदे समिति इन पुराने रिकॉर्ड्स की जांच कर रही हैं और पात्रता के आधार पर ही कुनबी या मराठा-कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी हो रहा है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Reservation, Maharashtra
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com