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महाराष्ट्र में फिर एक होगा पवार परिवार? शरद पवार के पास दो विकल्प, लेकिन एक अड़चन भी

अभी तक अपने 50 साल से ऊपर के राजनीतिक जीवन में शरद पवार ने कभी बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया. लेकिन इसी वजह से उनकी पार्टी भी टूटी, अब एनसीपी जिसका नेतृत्व सुनेत्रा पवार के हाथ में है एनडीए का हिस्सा है.

महाराष्ट्र में फिर एक होगा पवार परिवार? शरद पवार के पास दो विकल्प, लेकिन एक अड़चन भी
  • शरद पवार ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की, इसके बाद NCP के एनडीए गठबंधन में जाने की चर्चा शुरू हो गई
  • आरोप है कि कांग्रेस और एनसीपी के सांसदों को तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है
  • एनसीपी का कहना है कि शरद पवार की पार्टी न तो एनडीए में जा रही है और न ही कांग्रेस में विलय का कोई विचार है
मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार कुछ ना कुछ होता रहता है. वहां राजनीतिक पार्टियों का टूटना और मिलना चल रहा है. शिवसेना दो बार टूट गई, तो एनसीपी भी एक बार टूट चुकी है. अब वहां पर एक बार फिर जुड़ने की बात हो रही है. इस बार चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि शरद पवार वाली एनसीपी का क्या होगा? क्योंकि जब से उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना दोबारा टूटी है, ये चर्चा जोरों पर है. इस बीच ये भी कहा गया कि शरद पवार एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच विकल्प तलाश रहे हैं.

शरद पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने विधानसभा चले गए, तो फिर इन चर्चाओं को और बल मिल गया. उसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात अचानक नहीं थी, पहले से सब तय था. सरकार के लोगों ने मुझे बताया है कि शरद पवार के सांसदों को तोड़ने की कोशिश हो रही है, यही नहीं कांग्रेस के सांसदों को भी तोड़ने की कोशिश हो रही है.

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उधर शरद पवार की तरफ से रोहित पवार, जो उनके पोते लगते हैं, और विधायक भी हैं उन्होंने कहा कि ना हम एनडीए में जा रहे हैं और ना कांग्रेस में. हमारा कोई भी सांसद परिसीमन बिल का समर्थन नहीं करेगा. कुछ ऐसी ही बातें अनिल देशमुख ने भी की, जो अघाडी सरकार में मंत्री थे.

इन सब मुद्दों पर बात करते हुए सुप्रिया सुले ने एनडीटीवी से कहा, “पिछले 12 सालों से मेरे शपथ ग्रहण की खबरें आ रही हैं. सत्ता में जाने को लेकर हमारी किसी से कोई चर्चा नहीं हुई है. हमारा सिक्का खरा है. हमारे आठों सांसद रोज मेरे संपर्क में रहते हैं. पवार साहब और शिंदे जी की मुलाकात अचानक हुई. कांग्रेस के साथ विलय का सवाल ही नहीं उठता है. हां अजित दादा के साथ जाना जरूर तय हुआ था.”

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हालांकि ये सब वो बातें हैं जो राजनीति में कैमरे पर बोली जाती है, राजनीति में पर्दे के पीछे भी बहुत कुछ चल रहा होता है. इतना तो तय है कि शरद पवार ही सब तय करेंगे कि उनकी पार्टी का आगे क्या होना है और अभी तक अपने 50 साल से ऊपर के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया. लेकिन इसी वजह से उनकी पार्टी भी टूटी, अब एनसीपी जिसका नेतृत्व सुनेत्रा पवार के हाथ में है एनडीए का हिस्सा है.

शरद पवार के पास दो ही विकल्प हैं या तो वो कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के साथ रहें, लेकिन इसमें दिक्कत ये है कि उनके सांसद इस बात से परेशान हैं कि अगला लोकसभा चुनाव वो कैसे जीतेंगे, क्योंकि तब तक शायद शरद पवार राजनीति में उतने सक्रिय ना रहें. या दूसरा विकल्प है कि दोनों एनसीपी एक हो जाए, जैसा कि अजित पवार के वक्त का प्लान था. इससे महाराष्ट्र में एनसीपी की ताकत भी बढ़ेगी, मगर बात फिर वहीं पर आ जाती है कि उन्हें एनडीए का हिस्सा बनना पड़ेगा.

बीजेपी फिलहाल शरद पवार की पार्टी को लेकर हड़बड़ी में नहीं है, वो इस इंतजार में है कि शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? और जब तक ये नहीं होता महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार की एनसीपी को लेकर कयासों का दौर जारी रहेगा.

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