Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं. एक ओर किसानों की कर्जमाफी योजना में बड़ा बदलाव किया गया है तो दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार के कुछ हालिया राजनीतिक कदमों ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है. इसी बीच शरद पवार ने राज्य सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें किसानों के लिए लागू की गई दो अहम शर्तों को वापस ले लिया गया है.
किसानों के हित में फैसला, सरकार का जताया आभार
शरद पवार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उपज के गिरते दामों के बीच राज्य सरकार ने कर्जमाफी योजना की घोषणा की थी. हालांकि इस योजना में दो ऐसी शर्तें रखी गई थीं जिनकी वजह से लाखों किसानों के लाभ से वंचित रहने की आशंका थी. पहली शर्त यह थी कि वर्ष 2019 की कर्जमाफी योजना का लाभ ले चुके किसानों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक ही फायदा मिलेगा. दूसरी शर्त नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए थी, जिसमें 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण का भुगतान करना अनिवार्य रखा गया था.
सततच्या नैसर्गिक आपत्ती ,शेतमालाचे कोसळलेले दर या पार्श्वभूमीवर राज्य सरकारने कर्जमाफी योजना जाहीर केली होती परंतु सदरील कर्जमाफी योजनेत शासनाने २०१९ कर्जमाफी योजनेचा लाभ घेतलेल्या शेतकऱ्यांना ५० हजार रुपयांपर्यंतचा कमाल लाभ देण्याची घातलेली अट तसेच नियमित कर्ज भरणाऱ्या…
— Sharad Pawar (@PawarSpeaks) July 10, 2026
रोहित पवार और किसान संगठनों की भूमिका
शरद पवार ने कहा, “राज्यभर के किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आज इन दोनों दमनकारी शर्तों को वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसके लिए हम सरकार का आभार व्यक्त करते हैं. इन दोनों शर्तों को हटाने के लिए संघर्ष करने वाले सभी किसान संगठनों, उनके नेताओं, राजनीतिक दलों, उनके नेताओं तथा इसमें अग्रणी भूमिका निभाने वाले विधायक रोहित पवार और उनके सभी सहयोगियों को बधाई.”
शरद पवार के इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में रोहित पवार और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेदों की चर्चाएं सामने आई थीं.
शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई राजनीतिक चर्चा
इससे पहले महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई थी जब शरद पवार ने विधानभवन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कक्ष में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की. कई वर्षों बाद सत्र के दौरान विधानभवन पहुंचे शरद पवार की इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए. इस दौरान एकनाथ शिंदे ने उनका स्वागत भी किया. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एनसीपी (शरद पवार गुट) के भविष्य और उसके संभावित राजनीतिक रुख को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं.
रोहित पवार की अनुपस्थिति भी बनी चर्चा का विषय
जानकारी के अनुसार शरद पवार कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद पर होने वाली बैठक के सिलसिले में विधानभवन पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने एकनाथ शिंदे के कक्ष में अपने विधायकों के साथ बैठक की. राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक हाल ही में हुई एक आंतरिक बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई थी. बताया जाता है कि कुछ विधायकों ने नेतृत्व से पार्टी की भावी दिशा को लेकर सवाल किए थे. इसी दौरान सत्ता पक्ष के साथ जाने की संभावनाओं की चर्चा भी हुई थी.
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