राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की एक अहम बैठक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के ‘देवगिरी' सरकारी निवास पर आयोजित हुई, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने हिस्सा लिया. बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधान परिषद चुनाव, राज्यसभा उम्मीदवार और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन बैठक के दौरान सामने आई अंदरूनी खींचतान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
आपस में भिड़ गए सुनील तटकरे और छगन भुजबल
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, वरिष्ठ नेता छगन भुजबल समेत कई प्रमुख विधायक मौजूद थे.सूत्रों के मुताबिक, चर्चा के दौरान सुनील तटकरे और छगन भुजबल के बीच तीखी बहस देखने को मिली. बताया जा रहा है कि तटकरे ने पार्टी के भीतर कुछ नेताओं को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ने पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करने वाले चुनिंदा नेताओं को ही निशाना क्यों बनाया जाता है और मुश्किल समय में न तो विधायक और न ही शीर्ष नेतृत्व खुलकर समर्थन में सामने आता है.
प्रफुल्ल पटेल मीटिंग से रहे दूर
बैठक में वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही. हालांकि, प्रफुल्ल पटेल ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका पहले से तय कार्यक्रम था और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी दे दी थी. इस पूरी बैठक को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में चुनाव आयोग (ECI) को सौंपी गई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची से सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल दोनों के नाम गायब पाए गए थे. इसके बाद से पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक बदलावों को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पार्टी टूटने की चर्चाओं पर भी विस्तार से बात हुई. कई विधायकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रोहित पवार जैसे कुछ नेताओं की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का पार्टी को तुरंत और राजनीतिक रूप से जवाब देना चाहिए. हालांकि, बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी साफ किया कि पार्टी से कोई विधायक टूटकर नहीं जाएगा और संगठन पूरी तरह एकजुट है.
'सुनेत्रा पवार के पास हो चुनावी फैसलों की जिम्मेदारी'
विधान परिषद चुनाव को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई. विधायकों ने सुझाव दिया कि चुनाव संबंधी सभी फैसलों का अधिकार सुनेत्रा पवार को दिया जाए. साथ ही यह भी राय सामने आई कि जिन क्षेत्रों में पार्टी के विधायकों की संख्या अधिक है, वहां पार्टी को मजबूती से चुनाव लड़ना चाहिए. देवगिरी में हुई इस बैठक ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि एनसीपी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव और समीकरण बन रहे हैं. आने वाले दिनों में विधान परिषद चुनाव और पार्टी की रणनीति को लेकर होने वाले फैसले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा असर डाल सकते हैं.
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