महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय, विधान परिषद चुनाव के मौके पर एक बार फिर महायुति सत्तारूढ़ गठबंधन का आंतरिक विवाद खुलकर सामने आ गया है. शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है. सत्तार ने भावुक और तीखे लहजे में कहा, "भाजपा ने हमें नगर निगम और जिला परिषद चुनावों से बाहर कर दिया है. हमारा बड़ा भाई ही हमें खत्म करने पर आमादा है."
यह विवाद तब और गहरा गया जब अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार ने छत्रपती संभाजीनगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. इस सीट से महायुति ने आधिकारिक तौर पर भाजपा के सुहास शिरसाट को टिकट दिया है.
'कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के दबाव में भरा फॉर्म'
महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ बेटे के चुनावी मैदान में उतरने पर अब्दुल सत्तार ने सफाई दी. उन्होंने कहा, "सच कहूं तो यह फॉर्म हमने नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं ने भरा है. सिल्लोड विधानसभा क्षेत्र में हमारे 53 पार्षद हैं, इसलिए हमें मतदाताओं की भावनाओं का सम्मान करना पड़ता है. सभी गांवों के लोगों ने अपने-अपने तरीके से मेरे बेटे से अप्रत्यक्ष संपर्क किया और उसे पर्चा भरने के लिए कहा. इसी दबाव के चलते यह फॉर्म भरा गया है."

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सत्तार ने आगे बताया, "मुझे कल मुंबई बुलाया गया है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कल एक समन्वय बैठक बुलाई है. इस बैठक में वे जो भी आदेश देंगे, उसी के आधार पर उम्मीदवारी को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा. मैं इस मुद्दे पर सीधे चर्चा करूंगा."
'अब जिला सहकारी बैंक पर कब्जा करने की कोशिश'
भाजपा पर अपना हमला जारी रखते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, "पिछले दिनों दो महत्वपूर्ण चुनाव हुए नगर निगम और जिला परिषद. इन दोनों ही जगहों से हमें एक तरह से अस्थायी रूप से बेदखल कर दिया गया. लोकतंत्र में वे अपनी पार्टी का विस्तार कैसे करते हैं, यह उनका मामला है. लेकिन अब तीसरी लड़ाई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की है. उस चुनाव की प्लानिंग में भी हमारे (शिंदे सेना के) लोगों को अपने साथ मिलाकर जिला बैंक पर कब्जा करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं."
उन्होंने आगे कहा, "अगर इस तरह से हमारा बड़ा भाई ही हमें खत्म करने की कोशिश करेगा, तो इसका कोई इलाज नहीं है. हालांकि, एकनाथ शिंदे के समन्वय से देवेंद्र फडणवीस जो भी फैसला लेंगे, हम उनके आदेश का पालन करेंगे."
'हमारे त्याग के बिना आप सत्ता में नहीं आते'
सहयोगी दलों को आड़े हाथों लेते हुए अब्दुल सत्तार ने याद दिलाया, "हमने गठबंधन के लिए बहुत बड़ा त्याग किया है. हमारे इस त्याग के बिना आप लोग आज सत्ता में नहीं होते. एकनाथ शिंदे ने ढाई साल में जो क्रांतिकारी फैसले लिए, उसी की बदौलत महायुति सत्ता में आई है. लेकिन अब भाजपा सब कुछ भूल चुकी है. कामाख्या देवी ही जानती हैं कि हमने क्या किया और क्या नहीं."
इनपुट- मोहसिन शेख
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