महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार को मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा, तीन तलाक कानून के क्रियान्वयन और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर हुई चर्चा अचानक तीखे राजनीतिक और वैचारिक टकराव में बदल गई. भाजपा विधायक देवयानी फरांदे द्वारा उठाए गए मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक ने जब जवाब देना शुरू किया, तो सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला.
स्थिति उस समय और अधिक गरमा गई जब सना मलिक ने पाकिस्तान, कुरान और मुस्लिम पर्सनल लॉ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में भी कुरान के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था लागू की जानी चाहिए. उनके इस बयान पर भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कुछ सदस्य उनके समर्थन में खड़े दिखाई दिए.
क्या था पूरा मामला?
भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने नियम 105 के तहत लक्षवेधी सूचना पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया है, लेकिन महाराष्ट्र में उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा.
उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं को बहुविवाह, तलाक और घरेलू अत्याचार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. फरांदे ने कहा कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में भी बहुविवाह की घटनाएं बहुत कम हैं, जबकि भारत में मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है.
उन्होंने सरकार से पूछा कि राज्य में समान नागरिक संहिता कब लागू की जाएगी और क्या इसके लिए कोई विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी.
सना मलिक ने क्यों जताई नाराजगी?
देवयानी फरांदे के वक्तव्य के बाद सना मलिक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को केवल मुस्लिम समाज से जोड़कर देखना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि बहुपत्नीत्व केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है और अन्य धर्मों में भी ऐसे मामले देखने को मिलते हैं. सना मलिक ने कहा कि मुस्लिम समाज में बहुपत्नीत्व को धार्मिक मान्यता प्राप्त है और इसे केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान ने कोई नया कानून नहीं बनाया है, बल्कि कुरान में जो व्यवस्था बताई गई है, उसका पालन किया है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में भी कुरान के निर्देशों का सम्मान होना चाहिए.
सना मलिक ने तीन तलाक के मुद्दे पर भी अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि "तलाक-ए-बिद्दत" और इस्लाम में मान्य अन्य तलाक प्रक्रियाओं में अंतर है तथा तीन तलाक को लेकर जो कानून बनाया गया, वह ऐसी व्यवस्था पर आधारित था जो व्यवहार में पहले से व्यापक रूप से लागू नहीं थी.
"देश संविधान से चलता है, कुरान से नहीं"
सना मलिक के वक्तव्य के दौरान भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि चर्चा का विषय तीन तलाक कानून के क्रियान्वयन से जुड़ा है, न कि पाकिस्तान या धार्मिक व्याख्याओं से.
भातखलकर ने सदन में कहा, "यह देश संविधान से चलता है, कुरान से नहीं. यहां पाकिस्तान और धार्मिक परंपराओं पर भाषण देने की आवश्यकता नहीं है."
महायुति के भीतर भी दिखे अलग-अलग स्वर
इस पूरे घटनाक्रम की एक खास बात यह रही कि जहां भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के विधायक सना मलिक के बयान का विरोध कर रहे थे, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के कुछ सदस्य उनके समर्थन में दिखाई दिए.
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को महायुति के भीतर विभिन्न मुद्दों पर मौजूद वैचारिक मतभेदों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. हालांकि गठबंधन के स्तर पर किसी प्रकार के मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
यूसीसी पर सरकार का बड़ा संकेत
हंगामे के बीच गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित करेगी. उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी.
विधानसभा में हुई यह चर्चा केवल मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि समान नागरिक संहिता, धार्मिक परंपराओं, संविधान और व्यक्तिगत कानूनों के बीच संतुलन जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच गई. सना मलिक और भाजपा विधायकों के बीच हुई तीखी बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि यूसीसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ का विषय आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और विधानमंडल की बहसों का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है.
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