- वडोदरा के लंगर आयोजकों को अमरनाथ यात्रा के लिए कम से कम हजार एलपीजी सिलेंडरों की तत्काल आवश्यकता है.
- स्थानीय स्तर पर गैस की आपूर्ति अत्यंत कम होने के कारण श्रद्धालुओं की सेवा प्रभावित होने का खतरा है.
- ठंडे मौसम में गर्म भोजन और पानी यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं.
वडोदरा की गलियों में जहां इन दिनों बाबा बर्फानी के जयकारे गूंजने चाहिए थे, वहां अब चिंता और अनिश्चितता का माहौल है. आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और लंगर आयोजकों के चेहरों पर भक्ति के साथ-साथ गहरी बेचैनी दिखाई दे रही है. इस बार चुनौती किसी मौसम या मार्ग की नहीं, बल्कि रसोई गैस की भारी कमी की है, जिसने आस्था की इस यात्रा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
1000 सिलेंडरों की जरूरत, आपूर्ति न के बराबर
वडोदरा से अमरनाथ जाने वाले विभिन्न भंडारा और लंगर आयोजकों का कहना है कि यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की सेवा के लिए कम से कम 1000 एलपीजी सिलेंडरों की तत्काल जरूरत है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्थानीय स्तर पर गैस की आपूर्ति बेहद सीमित है.
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एक आयोजक ने NDTV से बातचीत में कहा, 'बिना गैस के हम सेवा कैसे देंगे? सरकार को इस संकट को प्राथमिकता देनी होगी.' उनका कहना है कि अगर जल्द विशेष कोटा नहीं मिला तो चाय, नाश्ता और भोजन. सब कुछ ठप हो सकता है.
ठंड में खाली चूल्हे, सेहत पर बड़ा खतरा
अमरनाथ यात्रा की ऊंचाई, कठिन चढ़ाई और कड़ाके की ठंड में गर्म भोजन और पानी श्रद्धालुओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है. आयोजकों का कहना है कि ईंधन की कमी सिर्फ लंगर सेवा ही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है.
एक यात्री ने चिंता जताते हुए कहा, 'हमारी आस्था सरकार के फैसले पर टिकी है. उम्मीद है कि हमें भूखे पेट यात्रा नहीं करनी पड़ेगी.'
सरकार से विशेष हस्तक्षेप की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वडोदरा के आयोजकों ने राज्य और केंद्र सरकार से यह यात्रा विशेष मामला मानने की अपील की है. मांग है कि अमरनाथ यात्रा के लिए प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
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फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन श्रद्धालुओं को अब भी भरोसा है कि सरकार समय रहते हस्तक्षेप करेगी. आस्था की यह यात्रा सिर्फ पैरों से नहीं, भरोसे से पूरी होती है. सवाल यही है- क्या सरकार का फैसला वडोदरा से बाबा बर्फानी तक की इस राह को आसान बना पाएगा, या गैस की कमी श्रद्धालुओं की सेवा पर भारी पड़ जाएगी?
(रिपोर्ट- चिराग पटेल)
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