- लोकसभा अध्यक्ष ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है
- इन संसदीय समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता और सांसद शामिल होकर सहयोग बढ़ा रहे हैं
- मैत्री समूहों के माध्यम से सांसद अपने विदेशी समकक्षों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगे और अनुभव साझा करेंगे
दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के मकस से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है. यह कदम संकेत देता है कि भारत की संसद विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाना चाहती है, ताकि पारंपरिक राजनय के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी मजबूत संबंध बने रहें.
सभी दलों की भागीदारी: वरिष्ठ नेताओं की व्यापक मौजूदगी
इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल भी हैं. वरिष्ठ नेताओं में रवि शंकर प्रसाद, एम. थंबीदुरई, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ'ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, संबित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य नेता शामिल हैं.
ये भी पढ़ें : बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ समारोह में ओम बिरला की शिरकत, तारिक रहमान से हुई मुलाकात
जिन देशों के साथ मैत्री समूह बने
जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
मकसद: प्रत्यक्ष संवाद, सीख और विश्वास
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधा संवाद करने का अवसर देना है. वे अपने अनुभव साझा करेंगे, एक-दूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाएंगे. इससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी और आपसी समझ बेहतर होगी. इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियां, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियां जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी.
संसदीय राजनय पर लोक सभा अध्यक्ष का जोर
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि संसदीय राजनय भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाता है. उनके नेतृत्व में संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी की है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जो संवाद और सहयोग में विश्वास रखता है.
लंबी अवधि का सहयोग: संसद-से-संसद और जनता-से-जनता संपर्क
संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर देते हुए यह पहल विदेश संबंधों में एक व्यापक और भागीदारी आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है. ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे. इस तरह भारत की संसद देशों के बीच एक सेतु के रूप में और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगी.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहुदलीय शिष्टमंडल की पहल
ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे. अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह संदेश दिया गया कि देश की सुरक्षा और हितों के मामले में भारत एकजुट है. इस पहल से संवाद, समावेश और सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास को दर्शाया गया, जो कि भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है.
आगे का रोडमैप: और देशों के साथ समूहों का विस्तार
लोकसभा द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पहले चरण में जहां 60 से अधिक देशों के साथ समूह बने हैं, वहीं भविष्य में कई अन्य देशों के साथ भी इन समूहों के गठन के प्रयास जारी हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं