नई दिल्ली:
लोकसभा चुनाव (Lok sabha election 2024) के बाद आज सुबह आठ बजे शुरू हुई मतगणना के प्रारंभिक रुझानों में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. एनडीए को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश में लगता दिख रहा है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी को लगभग 40 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है. समाजवादी पार्टी को रूझानों में 35 सीटों पर बढ़त दिख रही है वहीं कांग्रेस पार्टी जिसे पिछले चुनाव में महज एक सीट मिली थी वो 8 सीटों पर आगे है.
- अखिलेश यादव फैक्टर: अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में भी अन्य विपक्षी दलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया था. समाजवादी पार्टी के साथ लंबे समय से मुस्लिम और यादव वोट जुड़े रहे हैं. गठबंधन को इसका फायदा होता दिख रहा है.
- राहुल गांधी और अखिलेश यादव की दोस्ती: 2017 की चुनाव में हार के बाद भी समाजवादी पार्टी और राहुल गांधी एक बार फिर एक मंच पर आए. भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की छवि में हुई सुधार का लाभ कांग्रेस सपा गठबंधन को मिलता दिख रहा है.
- सामाजिक समीकरण: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है. टिकट बंटवारे में सपा और कांग्रेस ने इस बात को बेहद अहम माना.
- बीएसपी के वोट बैंक का मिला लाभ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीएसपी हमेशा से एक बड़ी फैक्टर रही है. हालांकि पिछले कुछ चुनावों में बसपा के आधार वोट में गिरावट देखने को मिल रही है. इस चुनाव में संभावना जतायी जा रही है कि बसपा के वोट का कुछ हिस्सा कांग्रेस और सपा गठबंधन के साथ गया है.
- एंटी इंकम्बेंसी: केंद्र में बीजेपी की 10 साल से सरकार है वहीं उत्तर प्रदेश में भी पिछले 7 साल से बीजेपी की सत्ता है. ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी देखी जा रही है. इसका नुकसान भी एनडीए को होता दिख रहा है.
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