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लोकतंत्र बचाने के लिए आज सुप्रीम कोर्ट के लॉन में जुटेंगे वकील, पढ़ेंगे संविधान की प्रस्तावना

बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एसोसिएशन ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में शांतिपूर्ण छात्रों और बार सदस्यों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा और अनुचित बल प्रयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है.

लोकतंत्र बचाने के लिए आज सुप्रीम कोर्ट के लॉन में जुटेंगे वकील, पढ़ेंगे संविधान की प्रस्तावना
सुप्रीम कोर्ट के लॉन में वकील पढ़ेंगे संविधान की प्रस्तावना.
नई दिल्ली:

देश में संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए कई वकील गुरुवार दोपहर करीब 1:15 बजे सुप्रीम कोर्ट के लॉन में इकट्ठा होगे. इस दौरान वे मिलकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगे. हालांकि इन दौरान वे कोई नारे नहीं लगाएंगे. वे सिर्फ संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगे और राष्ट्रगान गाएंगे. सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने भी वकीलों से एकजुटता दिखाने के लिए बिना नारेबाजी किए लॉन में इकट्ठा होने की अपील की है. बुधवार  रात से ही सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के ग्रुप में एक मैसेज तेजी से सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें लिखा है, "लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ".

बता दें कि इससे पहले, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एसोसिएशन फॉर एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड ने कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस और RAF की कार्रवाई की निंदा करते हुए सार्वजनिक बयान जारी किए थे.
SCBA ने अपने प्रस्ताव कहा, "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन निर्दोष छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करता है, इसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए, इस घटना में SCBA के सदस्य भी घायल हुए हैं."

एसोसिएशन ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में शांतिपूर्ण छात्रों और बार सदस्यों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा और अनुचित बल प्रयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है. उन्होंने अधिकारियों से घटना की तत्काल, निष्पक्ष जांच समय पर करने और बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की.

संसद मार्च में पुलिस की कार्रवाई का विरोध

बता दें कि बुधवार को 650 से ज्यादा वकीलों ने एक बयान जारी कर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में संसद मार्च पर पुलिस की कार्रवाई को संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया था. उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग भी की. हालांकि  सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस एक्शन को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सीजेआी ने कहा,  "हमारा समय बर्बाद न करें."

ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब दिल्ली हाई कोर्ट ने  बुधवार को केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर विरोध मार्च के दौरान पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप वाली तीन जनहित याचिकाओं पर जवाब मांगा है.

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