- सूरत पुलिस और आरटीओ ने तेज और चुभने वाली हाई बीम एलईडी लाइट लगाने वालों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया है.
- वाहन चालकों ने स्टैंडर्ड लाइट के बजाय मॉडिफाइड एलईडी लाइट लगाई है जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ता है.
- जांच के दौरान 54 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई और 3 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया.
सूरत वाहन चेकिंग अभियान, हाई बीम लाइट, आफ्टरमार्केट एलईडी लाइट
गुजरात के सूरत में तेज और चुभने वाली हाई एलईडी लाइट लगाने वालों पर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है. सड़क हादसों को रोकने के लिए सूरत पुलिस और आरटीओ ने संयुक्त अभियान चलाया है. इस पूरे मामले पर एनडीटीवी की टीम ने ग्राउंड पर जाकर हकीकत जानने की कोशिश की और जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली है.
राज्य वाहन परिवहन निगम के निर्देश के बाद सूरत में बड़े स्तर पर वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान खास तौर पर हाई बीम और आफ्टरमार्केट एलईडी लाइट लगाने वाले वाहनों को टारगेट किया जा रहा है.
एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियों में कंपनी द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड लाइट के बजाय मॉडिफाइड एलईडी लाइट लगा रखी है, जिससे सामने से आने वाले वाहन चालकों को गंभीर परेशानी होती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है.
जांच के दौरान अधिकारियों ने कई ऐसे वाहन पकड़े, जिनमें नियमों के विपरीत तेज सफेद एलईडी लाइट लगी हुई थी. इसी दौरान जब एक वाहन चालक को पुलिस ने रोका, तो वह तरह-तरह के बहाने बनाते नजर आया. चालक ने सफाई देते हुए कहा कि गाड़ी में लगी एलईडी लाइट उसने नहीं बल्कि उसके भाई ने लगवाई है. हालांकि, पुलिस ने नियमों का हवाला देते हुए चालक पर कार्रवाई की.
आरटीओ पुलिस इंस्पेक्टर अंकित शाह ने बताया कि कंपनी फिटेड लाइट के अलावा किसी भी प्रकार की आफ्टरमार्केट एलईडी कानूनन अवैध है और ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. एनडीटीवी की टीम जब मौके पर मौजूद थी, तब चेकिंग के दौरान चंद मिनटों में ही 54 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई और 3 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में नियमों का उल्लंघन किस स्तर तक हो रहा है.
पुलिस के मुताबिक पिछले एक महीने में करीब 250 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 182 के तहत 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं रोड सेफ्टी के तहत 1 हजार रुपये का अतिरिक्त दंड वसूला जा रहा है. यानी नियम तोड़ने वालों को कुल 6 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ रहा है.
जब एनडीटीवी की टीम ने अधिकारियों से पूछा कि बिना लक्स मीटर के यह जांच कैसे की जा रही है, तो अधिकारियों ने बताया कि आरटीओ और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से वाहन की जांच की जा रही है. विशेषज्ञ आसानी से पहचान कर लेते हैं कि लाइट कंपनी फिटेड है या बाद में मॉडिफाई की गई है.
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सीएमवीआर नियमों के तहत केवल AIS-009 और AIS-010 मानकों के अनुरूप लगी लाइट ही वैध मानी जाएगी. इसके अलावा किसी भी प्रकार की मॉडिफाइड एलईडी लाइट कानून का उल्लंघन है.
सूरत ट्रैफिक पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है. उनका कहना है कि तेज सफेद एलईडी लाइट सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है, इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई जरूरी है.
पुलिस ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कोई वाहन चालक बार-बार नियम तोड़ता है, तो उसका लाइसेंस रद्द करने या वाहन जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है. साथ ही इस मामले में छह महीने तक की जेल का प्रावधान भी है.
एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में साफ सामने आया है कि कई वाहन चालक नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. सूरत पुलिस और आरटीओ ने लोगों से अपील की है कि बेहतर विजन के लिए ऐसी लाइट का इस्तेमाल न करें, जो दूसरों की जान जोखिम में डाल दे.
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