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हाई कोर्ट पहुंचकर सीनियर IAS अफसर ने बिना शर्त मांगी माफी, जानें क्या है पूरा मामला?

अदालत का आदेश टालना एक सीनियर आईएएस अफसर को इस कदर भारी पड़ा कि उन्हें खुद जज के सामने हाजिर होना पड़ा और माफी तक मांगनी पड़ी. इसके बाद भी जस्टिस ने कड़ी फटकार लगा दी.

हाई कोर्ट पहुंचकर सीनियर IAS अफसर ने बिना शर्त मांगी माफी, जानें क्या है पूरा मामला?
केरल हाईकोर्ट में सीनियर IAS हनीश ने मांगी बिना शर्त माफी, जज ने लगाई थी फटकार, जानें क्या है करोड़ों का काजू निगम घोटाला
NDTV Reporter

Kochi News: केरल हाईकोर्ट में सोमवार को एक हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम देखने को मिला. राज्य के सीनियर आईएएस अधिकारी मोहम्मद हनीश को अदालत के आदेशों की अवमानना (Contempt of Court) के मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा. लगातार कोर्ट के निर्देशों को नजरअंदाज करने वाले मोहम्मद हनीश ने अब डिवीजन बेंच के सामने एक हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांग ली है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक टॉप ब्यूरोक्रेट को कोर्ट में इस तरह से झुकना पड़ा? आइए इस पूरे मामले को समझते हैं.

आखिर क्यों भड़के जज? पूछे तीखे सवाल

यह पूरा विवाद केरल राज्य काजू विकास निगम (KSCDC) के पूर्व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने की मंजूरी से जुड़ा है. जब मोहम्मद हनीश उद्योग विभाग के प्रधान सचिव थे, तब उन्होंने हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से बार-बार इनकार कर दिया था. सोमवार की सुनवाई में जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने सख्त लहजे में हनीश से पूछा, 'क्या मेरा यह कहना सही है कि आप इस अदालत के आदेशों और फैसलों को समझने में सक्षम हैं? क्या आपने हमारे आदेशों को बार-बार पढ़ा है? अगर हां, तो फिर आप निर्देशों के मुताबिक आदेश क्यों जारी नहीं कर सके?' 

कोर्ट ने साफ कहा कि हनीश ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया और अपनी राय पहले ही बना ली थी.

गिरफ्तारी की चेतावनी, बहानेबाजी पड़ी भारी

इस मामले में याचिकाकर्ता कडाकम्पल्ली मनोज ने अवमानना याचिका दायर की थी. 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने हनीश के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उन्होंने मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना किया था. कोर्ट ने उन्हें नया आदेश जारी करने को कहा, लेकिन उन्होंने फिर इसे ठुकरा दिया. इसके बाद कोर्ट ने उन्हें शुक्रवार (19 जून) को पेश होने का आदेश दिया था. तब हनीश के वकील ने दलील दी कि वह अब काजू विभाग नहीं संभाल रहे हैं और बजट के कामों में व्यस्त हैं. उन्होंने ऑनलाइन पेशी की मांग की, लेकिन अदालत ने सारी दलीलें खारिज कर दीं. जस्टिस बदरुद्दीन ने यहां तक चेतावनी दे दी थी कि अगर हनीश सोमवार को पेश नहीं हुए, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. हनीश ने कोर्ट में पेश होने से बचने के लिए डिवीजन बेंच में अपील भी की थी, लेकिन वह खारिज हो गई. आखिरकार उन्हें अदालत के सामने आना ही पड़ा.

क्या है करोड़ों का 'काजू निगम घोटाला'?

यह पूरा विवाद केएससीडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक के.ए. रतीश, पूर्व अध्यक्ष ई. कासिम और आर. चंद्रशेखरन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर टिका है. आरोप है कि इन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर एम/एस जेएमजे ट्रेडर्स के मालिक जैमोन जोसेफ के साथ मिलकर ठेके बांटे, जिससे सरकारी निगम को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ. हाईकोर्ट को इन अधिकारियों के खिलाफ शुरुआती सबूत मिल गए थे, इसीलिए कोर्ट सरकार से इन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने को कह रहा था.

2 जुलाई को अगली सुनाई, नए सचिव को अल्टीमेटम

सोमवार की सुनवाई में अदालत ने मोहम्मद हनीश की बिना शर्त माफी को रिकॉर्ड पर ले लिया है और यह भी नोट किया है कि उन्हें उद्योग विभाग के सचिव पद से हटा दिया गया है. अब इस माफीनामे पर विचार करने और आगे की कार्रवाई तय करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई तक टाल दी गई है.

वहीं, वन एवं काजू विकास विभाग का मौजूदा प्रभार संभाल रहे सचिव के. बिजू को हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने उन्हें मामले में दूसरा प्रतिवादी बनाने की अनुमति देते हुए साफ कहा है कि वह 9 जुलाई तक कथित भ्रष्ट पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी का आदेश हर हाल में जारी करें. इसके लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उनके खिलाफ भी अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी.

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