- केरल की स्क्रीनिंग कमिटी की तीन बैठकें हो चुकी हैं जिसमें कई सांसदों ने विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है
- के सुरेश और सुधाकरण जैसे वरिष्ठ सांसद केरल में विधानसभा चुनाव लड़कर मंत्री पद के दावेदार बनना चाहते हैं
- के सी वेणुगोपाल का नाम भी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए चर्चाओं में हैं
कांग्रेस में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है.जहां-जहां चुनाव होने वाले हैं वहां की स्क्रीनिंग कमिटी मिल रहीं हैं और उस प्रदेश के नेताओं से सलाह मशविरा कर रही हैं.कांग्रेस ने चुनाव होने वाले दो राज्यों पर अपना फोकस रखा है केरल और असम.कांग्रेस को लगता है यही दो राज्य हैं जहां वो अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है वैसे यहां भी गठबंधन में ही कांग्रेस जाती है. मगर यहां वो लीडर की भूमिका में है जबकि तमिलनाडु और पुडुचेरी में डीएमके बड़ी पार्टी है और पश्चिम बंगाल में उनके पास कुछ भी खोने के लिए नहीं है.
कई दिग्गज लड़ना चाहते हैं विधानसभा चुनाव
स्क्रीनिंग समिति की इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बात रही कि कई सांसदों ने केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही और इसके लिए पार्टी से अनुमति मांगी है.जैसे कि केरल से कांग्रेस के 8 बार के सांसद के सुरेश जो कि लोकसभा में कांग्रेस के चीफ व्हीप भी हैं विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं. के सुरेश को यह उम्मीद थी कि यदि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव आता है तो 8 बार के सांसद होने के नाते उनकी दावेदारी बनती है. लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद परंपरा के अनुसार विपक्ष को जाता है. मगर अभी तक इसकी कोई सुगबुगाहट नहीं है.यही हाल के सुधाकरण का भी है, वे केरल कांग्रेस के पिछड़ी जाति के नेताओं में से सबसे बड़े चेहरे हैं.सुधाकरण भी विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं.दरअसल, कई सांसदों को लगता है कि केरल में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है ऐसे में यदि वो विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं तो मंत्री पद के दावेदार अपने आप बन जाएंगे.
गेंद अब कांग्रेस आलाकमान के पाले में है
इन सब में सबसे बड़ा नाम के सी वेणुगोपाल का है वे कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन मंत्री हैं. और राहुल गांधी के सबसे करीबी लेकिन क्या वो भी विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं. इस पर कोई जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुई है क्योंकि यदि वेणुगोपाल विधानसभा का चुनाव लड़े तो वो सीधे मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाएंगे. यदि बात शशि थरूर पर भी लागू होती है.अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है कि वे क्या निर्णय लेते हैं.बीजेपी में तो सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़वाने की प्रथा है,इसके पीछे ये तर्क दिया जाता है कि इससे चुनाव में अच्छा माहौल बनता है.मगर कांग्रेस भी ऐसा करेगी यह पार्टी को तय करना होगा.के सुरेश ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि कांग्रेस आलाकमान जो भी फैसला लेगी उसे वो मानेंगे.
यह भी पढ़ें: राहुल गांधी से खफा शशि थरूर, कांग्रेस की बैठक से कर सकते हैं किनारा- सूत्र
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं