- कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया का इस्तीफा, डीके शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे
- सिद्धारमैया ने कहा, कांग्रेस की नई सरकार को उनका समर्थन, हाईकमान ने मुझे इस्तीफा देने को कहा, मैंने ऐसा किया
- शिवुकमार की धर्म-ज्योतिष में आस्था, लेकिन सिद्धारमैया नास्तिक हैं, डीके की संपत्ति 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा
Karnataka New CM DK Shivakumar Biography: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के अगला सीएम बनने की संभावना है. दोनों ही नेता कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीति के धुरी रहे हैं. सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय की कुरुबा जाति से ताल्लुक रखते हैं, जबकि शिवकुमार वोक्कालिग्गा समुदाय से. खासियत की बात करें तो सिद्धारमैया नास्तिक हैं और अंधविश्वासों से दूर रहते हैं. जबकि डीके शिवकुमार आस्था और ज्योतिष में गहरा विश्वास रखते हैं. वो बेहद धार्मिक और बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं. ज्योतिष और अंकशास्त्र पर विश्वास के साथ हमेशा अपने गले में विशेष लॉकेट और हाथों में धागे बांधते हैं. सिद्धारमैया जहां गरीब किसान परिवार में जन्मे, वहीं डीके शिवुकमार एक अमीर सियासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता भी कांग्रेस के बड़े नेता थे.
डीके शिवकुमार की छात्र राजनीति से शुरुआत और देवेगौड़ा को टक्कर
डीके शिवकुमार ने छात्र नेता के तौर पर राजनीति शुरू की. मात्र 23 साल की उम्र में कांग्रेस ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के खिलाफ सथानूर सीट से उतारा. शिवकुमार बेहद मामूली अंतर से हार गए, लेकिन जेडीएस की नींव हिला दी.1989 में उन्होंने पहला चुनाव जीता. कनकपुरा से लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीत चुके शिवकुमार को प्यार और सम्मान से कनकपुरा बंदे (कनकपुरा की चट्टान) कहा जाता है. किसी भी लहर में कनकपुरा विधानसभा सीट से शिवकुमार को हरा पाना नामुमकिन जैसा रहा है.
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कांग्रेस के संकटमोचक हैं डीकेएस
कर्नाटक कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को कांग्रेस संकटमोचक कहा जाता है. विधायकों को टूटने से बचाने या सरकार बनाने का वक्त हो तो हाईकमान को डीके शिवकुमार याद आते हैं. 2002 में विलासराव देशमुख सरकार पर संकट आया तो बेंगलुरु के रिसॉर्ट में विधायकों को सुरक्षित रखकर सरकार बचाई. 2017 में गुजरात राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की सीट बचाने के वक्त भी 44 कांग्रेसी विधायकों को कर्नाटक के रिसॉर्ट में ठहराया.
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देश के सबसे अमीर नेताओं में से एक डीके शिवकुमार
शिवकुमार भारत के सबसे अमीर नेताओं में से एक हैं. वो देश के सबसे अमीर विधायकों और मंत्रियों की सूची में शुमार हैं. 2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी संपत्ति 1400 करोड़ रुपये से अधिक है. उनका मुख्य कारोबार रियल एस्टेट और एजुकेशन सेक्टर में है.2020 में जब उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) का अध्यक्ष बनाया गया तो पार्टी मजबूत बनकर उभरी. 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ. डीके शिवकुमार को साल 2019 मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया. उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में करीब 50 दिन बिताने पड़े.
सिद्धारमैया 10 साल की उम्र तक स्कूल नहीं गए, बर्थडे भी याद नहीं
सिद्धरमैया का जन्म मैसूर के सिद्धरामनहुंडी गांव में एक गरीब किसान परिवार में कुरुबा समुदाय में हुआ था. गरीबी के कारण 10 साल की उम्र तक वो स्कूल नहीं जा पाए. खेतों में काम करने और पशुपालन में उनका समय बीता. फिर सीधे 5वीं कक्षा में दाखिला मिला. पिता को जन्मतिथि याद नहीं थी तो तुक्के से 12 अगस्त 1948 लिखवा दिया जो आज भी उनका बर्थडे है.सिद्धरमैया पढ़ाई में तेज निकले और गांव के पहले स्नातक बने. मैसूर यूनिवर्सिटी से बीएससी और फिर एलएलबी की डिग्री हासिल की. राजनीति में एंट्री से पहले सिद्धारमैया ने वकालत की और लॉ कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाया.
राजनीति में किस्मत से एंट्री
वो हमेशा सफेद कुर्ता और पांचे (लुंगी) पहनते हैं. कंधे पर हमेशा एक शॉल रहता है, जिसे वे बार-बार एक कंधे से दूसरे कंधे पर बदलते रहते हैं. सिद्धरमैया का राजनीति में आने का इरादा नहीं था. कहा जाता है कि मैसूर कोर्ट में मशहूर वकील और किसान नेता प्रोफेसर नंजुंडास्वामी की निगाह उन पर पड़ी. उनके भाषण से प्रभावित होकर सिद्धरमैया को चुनाव लड़ने को कहा.सिद्धरमैया ने 1983 में भारतीय लोक दल के टिकट पर चामुंडेश्वरी सीट से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गए. इस जीत ने रातोंरात पूरे मैसूर क्षेत्र में उन्हें सुर्खियों में ला दिया.

siddaramaiah vs dk shivakumar
सिद्धारमैया का रिकॉर्ड
सिद्धरमैया पॉलिटिक्स के साथ अर्थशास्त्र विशेषज्ञ भी हैं. जेडीएस सरकार में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के दौरान शानदार वित्तीय प्रबंधन किया. कर्नाटक सरकार को कभी भी बैंक से अतिरिक्त कर्ज की जरूरत नहीं पड़ी. उन्होंने 13 से अधिक बार कर्नाटक का बजट पेश किया.सिद्धारमैया 2013 से 2018 के बीच मुख्यमंत्री रहे. तब वो पिछले 40 सालों में कर्नाटक के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने जिन्होंने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया. दोबारा 2023 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बने.
अहिंदा आंदोलन और कांग्रेस में एंट्री
2005-2006 के दौरान सिद्धारमैया की पुरानी पार्टी जेडीएस से अनबन हुई. उन्होंने अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदा यानी पिछड़े वर्ग और दलित) आंदोलन को हवा दी. फिर देवेगौड़ा का साथ छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. देवेगौड़ा परिवार के जोरदार प्रचार के बावजूद कांग्रेस से चामुंडेश्वरी सीट से उपचुनाव सिर्फ 257 वोटों से जीते.

Siddaramaiah vs DK Shivkumar
बेटा हो सकता है राजनीतिक उत्तराधिकारी
उनकी पत्नी पार्वती हैं.सिद्धरमैया के बेटे राकेश सिद्धरमैया और डॉ. यतींद्र सिद्धरमैया हैं. राकेश को सिद्धरमैया का असली राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. लेकिन साल 2016 में बेल्जियम की यात्रा के दौरान 38 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. पेशे से डॉक्टर यतींद्र को न चाहते हुए भी अपने पिता को संभालने के लिए राजनीति में कदम रखना पड़ा. वो वरुणा सीटर से विधायक रहे हैं और एमएलसी हैं. नई सरकार में उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है.
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