- कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जल्द इस्तीफा देकर डीके शिवकुमार को सत्ता सौंप सकते हैं
- राज्य में केवल तीन मुख्यमंत्री ही पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा कर पाए हैं
- कर्नाटक में सबसे कम समय तक सीएम रहने वाले नेता कौन-कौन हैं
कर्नाटक में इन दिनों सियासत तेज है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस डीके शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री बना सकती है. वहीं सिद्धारमैया जल्द ही सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे. सिद्धारमैया ने अभी तक सीएम के रूप में कार्यकाल पूरा नहीं किया है. उनके इस्तीफा देने के साथ ही कर्नाटक की सत्ता बीच कार्यकाल ही दूसरे मुख्यमंत्री को मिलेगी. ऐसा पहली बार नहीं होगा. कर्नाटक में मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने का पुराना इतिहास है. गठबंधन टूटना, दलबदल, गुटबाजी, दिल्ली की दखल और पार्टी के भीतर की बगावतें अक्सर कार्यकाल को छोटा करती रही हैं. कर्नाटक में केवल तीन ही मुख्यमंत्री ऐसे रहे, जिन्होंने अपना पांच साल कार्यकाल पूरा किया.
किस-किस मुख्यमंत्रियों ने पूरा किया कार्यकाल?
1. एस. निजालिंगप्पा (1962 से 1968
कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे एस. निजालिंगप्पा वो पहले नेता थे, जो राज्य के मुखिया के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर पाए थे. उस वक्त कर्नाटक को मैसूर राज्य के रूप में जाना जाता था. निजालिंगप्पा को आधुनिक कर्नाटक के निर्माताओं में गिना जाता है. वो कांग्रेस के दिग्गज नेता थे. उन्होंने 21 जून 1962 से 28 मई 1968 बतौर मुख्यमंत्री काम किया. उनके समय में कांग्रेस के भीतर मजबूत अनुशासन था, जिसके कारण वे लंबे समय तक टिके रहे. बाद में वे उन्होंने कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी भूमिका निभाई और 1960 के दशक में कांग्रेस अध्यक्ष बने.
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2. डी. देवराज उर्स (1972 से 1977)
डी. देवराज उर्स को कर्नाटक की राजनीति में सामाजिक सुधारों का जनक माना जाता है. वे एक ही विधानसभा चुनाव के बाद लगातार पूरे 5 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले राज्य के पहले नेता बने. उर्स 20 मार्च 1972 से 31 दिसंबर 1977 तक कर्नाटक के सीएम रहे. कांग्रेस के विभाजन के दौरान वे इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी रहे. उर्स ने भूमि सुधारों और पिछड़े वर्गों, वंचित समुदायों के लिए बनाई गई नीतियों के माध्यम से कर्नाटक के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया.
3. सिद्धारमैया (2013 से 2018)
कर्नाटक के मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सीएम के रूप में कार्यकाल पूरा किया. उर्स के बाद सिद्धारमैया पिछले 40 वर्षों में अपना पूरा टर्म निभाने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने. उन्होंने 13 मई 2013 से 17 मई 2018 राज्य की कमान संभाली. 2013 के चुनावों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला था. सिद्धारमैया ने अपनी 'AHINDA'अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित राजनीति के दम पर सरकार को बिना किसी आंतरिक संकट के पूरे 5 साल तक चलाया.
मई 2023 में वे दोबारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने और जनवरी 2026 में उन्होंने डी. देवराज उर्स को पीछे छोड़ते हुए कर्नाटक के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है.
कर्नाटक के सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे ये नेता
- बी.एस. येदियुरप्पा: कर्नाटक के इतिहास में सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बी.एस. येदियुरप्पा के नाम है. वे साल 2018 में केवल 3 दिन के लिए ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ सके थे. इससे पहले 2007 में येदियुरप्पा महज 7 दिन के लिए सीएम रहे थे.
- सदानंद गौड़ा: येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद वे 2011 से 2012 तक केवल 11 महीने के लिए मुख्यमंत्री रहे.
- जगदीश शेट्टार: बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी के चलते जगदीश शेट्टार 2012 से 2013 तक केवल 10 महीने ही इस पद पर रह सके.
- एस. आर. बोम्मई: साल 1988-89 में एस. आर. बोम्मई जनता दल सरकार के तहत केवल 281 दिन (करीब 9 महीने) ही मुख्यमंत्री रहे.
कर्नाटक में क्या चल रहा?
कर्नाटक की राजनीति में सियासी सरगर्मी काफी तेज है. माना जा रहा है कि राज्य की सत्ता की कमान डीके शिवकुमार को मिल सकती है. 2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनी तो सबसे बड़ा सवाल यही था कि सीएम कौन बनेगा. सीएम की रेस में सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों के नाम ही सबसे आगे थे. बताया जाता है कि कांग्रेस नेताओं ने जो समझौता कराया उसके अनुसार सिद्धारमैया को कमान सौंपी गई और ढाई साल बाद यह जिम्मेदारी डीके को मिलनी थी. हालांकि कांग्रेस ने कभी इस समझौते की पुष्टि नहीं की.
अब बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे इस पद पर उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और राज्य में चल रहे सत्ता संघर्ष का भी अंत हो जाएगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नौ बार के विधायक आरवी देशपांडे ने सिद्दारमैया के पद छोड़ने की लगभग पुष्टि कर दी. देशपांडे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "ऐसा कल या परसों हो सकता है." उन्होंने यह भी कहा कि सिद्दारमैया के उनके विरोधी पक्ष के लिए रास्ता साफ करने की खबर उनके जैसे कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक थी. इस मामले पर कांग्रेस हाईकमान से विचार-विमर्श किया गया और निर्णय लिया गया.
यह भी पढ़ें: कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया नहीं जाना चाहते राज्यसभा, उनको 2 साल तक विधायक रहना है- सूत्र
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