पंजाब के लुधियाना जिले की 49 साल की करमजीत कौर अपनी मेहनत और आत्मनिर्भरता की वजह से चर्चा में हैं. उन्होंने अपने खेती और पशुपालन के प्रेम की वजह से शादी तक नहीं की. वो अपना पूरा ध्यान खेती और डेयरी के कारोबार पर लगाती हैं. आज उनके डेयरी फार्म में 110 से ज्यादा गाय-भैंस हैं. इनसे रोज करीब 100 लीटर दूध पैदा होता है.इस दूध को अपने ग्राहकों तक करमजीत खुद ही पहुंचाती हैं. काम बढ़ता देख उनका भाई भी कनाडा की स्थायी नागरिकता छोड़कर भारत आ गए हैं और वो अपनी बहन का हाथ बंटाते हैं.
बहन के लिए छोटे भाई ने छोड़ दी कनाडा की नागरिकता
लुधियाना शहर के पास रट्टोवाल गांव की रहने वाली करमजीत को मोटरसाइकिल, ऑटो रिक्शा, एसयूवी और ट्रैक्टर तक चलाने में महारत हासिल है.उन्होंने एक स्थानीय अखबार से अपनी कहानी साझा की. इसमें वो कहती हैं,''हवाई जहाज और ट्रेन को छोड़कर मैं सब कुछ चला सकती हूं.'' अपने काम के प्रति उनके लगाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके छोटे भाई ने कनाडा की स्थायी नागरिकता (पीआर) छोड़ दी और उनके कारोबार में हाथ बंटाने के लिए भारत लौट आए.
करमजीत का यहां तक का सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा. शादी नहीं करने के फैसले के कारण उन्हें रिश्तेदारों के ताने सहने पड़े और आलोचनाएं झेलनी पड़ीं. लेकिन उनके माता-पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा और कभी उन पर शादी करने का दबाव नहीं बनाया.

अपने ग्राहकों तक दूध पहुंचाने का काम करमजीत खुद करती हैं. इस काम में वो देर रात तक व्यस्त रहती हैं.
Photo Credit: Social Media
करमजीत कहती हैं,''मेरे माता-पिता जानते थे कि मुझे खेती का शौक है. उन्होंने कभी मुझ पर शादी करने का दबाव नहीं डाला. आज मैं अपने परिवार के साथ खुश और संतुष्ट हूं. मेरी मां, भाई और उसका परिवार मेरे साथ रहता है. मैं अपने काम में व्यस्त रहती हूं और अपनी जिंदगी से खुश हूं.''
साल में कितना कमाती हैं करमजीत
करमजीत के डेयरी फार्म में रोजाना करीब 10 क्विंटल दूध का उत्पादन होता है. वह खुद दूध ग्राहकों तक पहुंचाती हैं. शाम के समय उनका काम बढ़ जाता है और कई लोगों तक दूध पहुंचाने के कारण उन्हें देर रात तक व्यस्त रहना पड़ता है. वह अपनी 35 एकड़ जमीन पर खेती भी करती हैं. फसलों की देखभाल वो खुद करती हैं.
करमजीत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देती हैं. उनका कहना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए, ताकि अपनी जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े.उन्होंने 'ट्रिब्यून' अखबार से कहा,''आज मैं अपने लिए टीवी, मोबाइल फोन, गाड़ी या कोई भी दूसरी चीज खरीद सकती हूं. जब मन करता है, विदेश घूमने भी जाती हूं. इससे ज्यादा और क्या चाहिए?” सालाना का कारोबार कितना होता है, इस सवाल पर उन्होंने कोई आंकड़ा तो नहीं दिया, लेकिन कहा,''वाहेगुरु दी बड़ी मेहर है.''
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