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कानपुर BOI घोटाले में बड़ा फैसला: 5 दोषियों को 3 साल की सजा, बैंक को ₹41.50 लाख का नुकसान कैसे पहुंचाया?

Kanpur Bank Fraud Case: लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट ने कानपुर के बैंक ऑफ इंडिया घोटाले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और ₹3.4 लाख का जुर्माना लगाया है. फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब ₹41.50 लाख की धोखाधड़ी सामने आई है.

कानपुर BOI घोटाले में बड़ा फैसला: 5 दोषियों को 3 साल की सजा, बैंक को ₹41.50 लाख का नुकसान कैसे पहुंचाया?

Kanpur Bank Fraud Case: उत्‍तर प्रदेश में लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट ने कानपुर से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही सभी पर कुल ₹3.4 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है. यह फैसला 31 मार्च को सुनाया गया, जिसमें कई सालों से चल रही सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय दिया.

कानपुर बैंक घोटाला कैसे हुआ?

यह मामला 11 जनवरी 2008 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर जोन के जोनल मैनेजर की शिकायत पर CBI ने FIR दर्ज की थी. जांच में सामने आया कि लाल बंगला शाखा में उस समय तैनात सीनियर मैनेजर नरेश चंदर भारद्वाज ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक साजिश रची. इस साजिश के तहत हाउसिंग लोन, ओवरड्राफ्ट मॉर्गेज और ऑटो फाइनेंस जैसे लोन फर्जी नामों और काल्पनिक व्यक्तियों के नाम पर स्वीकृत किए गए.

जांच एजेंसी के अनुसार, इन लोन को मंजूरी देने के लिए जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. इस तरह की अनियमितताओं के चलते बैंक ऑफ इंडिया को करीब ₹41.50 लाख का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को इसका सीधा फायदा पहुंचा.

जांच और कोर्ट की कार्यवाही

CBI ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 26 अप्रैल 2010 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद यह केस कई वर्षों तक कोर्ट में चला, जहां दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य पेश किए गए. सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने पांचों आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई.

इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में तत्कालीन बैंक अधिकारी के अलावा चार निजी व्यक्ति भी शामिल हैं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस साजिश में अन्य लोग भी जुड़े थे, जिनमें विक्रम दीक्षित का नाम भी सामने आया था.

इस फैसले को बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. CBI अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा दिलाना एजेंसी की प्राथमिकता है, ताकि ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके.

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