- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया है
- यशवंत वर्मा ने लोकसभा अध्यक्ष के पद हटाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले को चुनौती दी थी
- जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय पैनल की भ्रष्टाचार जांच की वैधता को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी
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हमें बताएं।सुप्रीम कोर्ट ने कैश कांड से सुर्खियों में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया. इस याचिका में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के उन्हें पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी. जस्टिस दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की पीठ ने वर्मा की याचिका पर आठ जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की ठुकराई पांच दलीलें ठुकराते हुए क्या कुछ कहा, जानिए-
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट का जवाब: कोर्ट ने कहा कि नहीं. पीठ ने साफ किया कि संबंधित प्रावधान केवल उसी स्थिति में लागू होता है जब दोनों सदनों द्वारा एक ही दिन दिए गए नोटिस स्वीकार किए जाएं. इससे किसी भी सदन के स्वतंत्र अधिकार पर कोई रोक नहीं लगती.
सुप्रीम कोर्ट का जवाब: इस पर कोर्ट की तरफ से टिप्पणी करते हुए कहा गया कि हां, उपसभापति ऐसा करने के लिए सक्षम थे.
सुप्रीम कोर्ट का जवाब: कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे की जांच की आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि उपसभापति के आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी. यहां तक कि यदि इस पर विचार किया जाए, तब भी इससे स्पीकर की कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि समिति के गठन में कुछ भी गैरकानूनी नहीं था.
सुप्रीम कोर्ट का जवाब: कोर्ट ने कहा, “नहीं”, यह कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल अकादमिक चर्चा है और इसका याचिकाकर्ता को किसी भी तरह का लाभ नहीं मिलेगा.
सुप्रीम कोर्ट का जवाब: कोर्ट ने साफ कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा किसी भी राहत के हकदार नहीं हैं. उपरोक्त कारणों से किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है.
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