- भारत में अल नीनो का असर दिखना शुरू हो गया है. जून का महीना 100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा है.
- जून के महीने में अभी तक 42 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. जून में 92.2 फीसदी बारिश दर्ज हुई है.
- ऐसे में मॉनसून का इंतजार बढ़ गया है. हालांकि मौसम विभाग ने जुलाई में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है.
भारत में जून का महीना इस बार 100 सालों में सबसे सूखा गुजरा है. क्योंकि देशभर में 42 प्रतिशत बारिश कम हुई है. ऐसे में यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में मॉनसून को कमजोर करने में 'अल नीनो' का प्रभाव दिखना शुरू हो गया है. देश के कई राज्यों में अब तक मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है और दिल्ली-एनसीआर, यूपी समेत कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी है. कम बारिश का सीधा असर फसलों पर भी पडे़गा, बारिश नहीं होने से बुवाई का काम अब तक पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है.
जून के महीने में बारिश के आंकड़े
जून के महीने में भारत में इस बार औसत बारिश 92.2 मिलीमीटर दर्ज हुई है. जबकि जून के महीने में सामान्य बारिश 157.7 मिलीमीटर तक होती है. यानि इस बार कुल 42 प्रतिशत कम बारिश जून के महीने में हुई है. जून के आखिरी दिन यानि मंगलवार को अगर अच्छी बारिश होती है तो यह आंकड़ा 100 तक पहुंच सकता है. पिछले 100 सालों में यानि (1927-2026) के बीच में केवल दो बार ही देश में ऐसा मौका आया जब जून के महीने में कम बारिश हुई है. 2009 में जून के महीने में 87.5 मिलीमीटर और 2014 में 92.1 मिलीमीटर बारिश हुई थी. जो 100 मिलीमीटर से कम थी. बाकि सभी सालों में यह आंकड़ा ज्यादा रहा है. जबकि अब यह तीसरा मौका ऐसा आ रहा है, जब कम बारिश हो रही है.
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जुलाई में कैसा रहेगा बारिश का हाल ?
हालांकि राहतभरी खबर यह है कि आईएमडी के मुताबिक जुलाई के पहले हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है. खास तौर पर मध्य भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना जुलाई में है. जहां अब तक मॉनसून की बारिश में सबसे ज्यादा कमी देखी गई है. मध्य भारत में जून के महीने में अब तक 54 प्रतिशत कम बारिश हुई है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, उत्तर पश्चिम भारत में 30 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है. यहां भीषण गर्मी का दौर जारी है. ऐसे में अगर जुलाई में अच्छी बारिश होती है तो यह राहत भरा होगा.यानि देश के चारों क्षेत्रों में बारिश में इतनी बड़ी कमी बड़ी बात है. जिससे यह पता लगता है कि भारत में हर तरफ जून का महीना सूखा ही बीता है.जो इस बात का संकेत हो सकता है कि अल नीनो का असर भारत के मॉनसून पर पहले ही शुरू हो चुका है.
आने वाले समय में मजबूत होगा अल नीनो
अल नीनो को लेकर अमेरिकी एजेंसी 'इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी' की तरफ से भी पिछले हफ्ते अहम जानकारी दी गई थी. जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही गर्मी के बीच अल नीनो मध्यम स्तर की तीव्रता तक पहुंचने के पास है. जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अल नीनो आने वाले कुछ महीनों में और ज्यादा मजबूत हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो इस बात की संभावना और बढ़ जाती है कि भारत में मॉनसून पर इसका सीधा असर पड़ेगा.
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भारत में मॉनसून नहीं पकड़ पाया रफ्तार
भारत में इस बार 4 जून को मॉनसून की केरलम में एंट्री हुई थी. लेकिन इसके बाद से अब तक मॉनसून जिस रफ्तार से आगे बढ़ना चाहिए था उस रफ्तार से भारत में आगे नहीं बढ़ा है. जून के दौरान देश भर में रोजाना होने वाली बारिश अब तक केवल एक दिन ही सामान्य से ज्यादा रही है. बाकि दिन बारिश कम हुई है. मध्य भारत में बारिश की रफ्तार बहुत कम रही है. हालांकि जुलाई के महीने में मौसम विभाग ने अच्छी बारिश के संकेत दिए हैं.
क्या है अल नीनो
दरअसल, अल नीनो एक वैश्विक जलवायु पैटर्न है. यह तब बनता है जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है. यह एक आवर्ती घटना है, जिसके साथ हवा के बहाव में भी बदलाव होते हैं. ये बदलाव एशिया समेत दुनिया भर के कई देशों में मौसम को प्रभावित करता है. जिसमें भारत में भी मॉनसून प्रभावित होता है. जून में कम हुई बारिश का असर अल नीनो का ही प्रभाव माना जा रहा है.
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