झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच आयोग के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले सीआईडी की तरफ से उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसके बाद खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया था. रांची में छात्रों के विधानसभा घेराव और लाठीचार्ज के बीच ये बड़ा कदम उठाया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि एल खियांग्ते कौन हैं और कैसे वो JPSC परीक्षा में हुई धांधली को लेकर सीआईडी के रडार पर आ गए.
कौन हैं एल खियांग्ते?
एल. खियांग्ते 1988 बैच के झारखंड कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं. इससे पहले खियांग्ते झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं. फरवरी 2025 में उन्हें झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने JPSC अध्यक्ष पद पर बिठाया था, तब ये पद कई महीनों से खाली पड़ा था. एल. खियांग्ते झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके है. इनमें मुख्य सचिव के अलावा गृह एवं कार्मिक विभाग में अपर मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों में प्रधान सचिव और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक जैसे पद शामिल रहे हैं.
ऐसे हुई गिरफ्तारी
2 जुलाई 2026 को जब झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आया तो इस परीक्षा को लेकर सवाल उठने लगे, जब जांच हुई तो पता चला कि वाकई गड़बड़ी हुई थी और फिर गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ. इसी बीच 22 जुलाई 2026 को खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और अब 10 अगस्त 2026 को JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID ने उन्हें गिरफ्तार किया है.
चेयरमैन बनते ही विवादों में रहे खियांग्ते
खियांग्ते मूल रूप से मिजोरम के आदिवासी समुदाय से आते हैं, जिनके प्रशासनिक सफर के चलते झारखंड सरकार ने उन्हें राज्य लोक सेवा आयोग की कमान सौंपी थी. हालांकि उनके इस पद पर बैठने के बाद से ही कई ऐसी परीक्षाएं आयोजित हुईं, जिन्हें लेकर गंभीर सवाल उठे. इन परीक्षाओं में झारखंड सिविल सर्विस एग्जाम, प्रोजेक्ट मैनेजर, मेडिकल कॉलेज असिस्टेंट, फॉरेस्ट रेंज अफसर, प्रोफेसर भर्ती और बाकी कई तरह के एग्जाम शामिल हैं.
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