
बिहार में 'आम युद्ध' शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव नजदीक है और नेता हमले का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते। दरअसल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी अभी मुख्यमंत्री आवास में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि नीतीश कुमार की सरकार ने वहां लगे फलों और सब्ज़ियों की पहरेदारी के लिए पुलिस बिठा दी है, ताकि वो फल, सब्ज़ी ना ले सकें। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं, उनका कहना है कि उन्हें अवाम की चिंता है, आम की नहीं।
नीतीश ने कहा, जिनको आम की चिंता है, उनको बढ़िया से आम दे देना चाहिए। अगर कोई कीमत वगैरह का मामला आता है, तो हम उसकी भरपाई अपनी तनख्वाह से कर देंगे।
उन्होंने कहा, केंद्र बिहार को दी जाने वाली राशि पर राजनीति कर रहा है, लेकिन इस बार बिहार के लोग झांसे में नहीं आएंगे, क्योंकि काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती।
नीतीश ने दिल्ली एसीबी के मामले पर कहा कि बिहार के अफसरों को लाने के केजरीवाल सरकार के फैसले पर केंद्र अड़ंगा डाल रहा है। नीतीश ने कहा कि वह केजरीवाल को और मदद देने को तैयार हैं। वहीं उन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए लालू यादव की पार्टी आरजेडी से गठबंधन मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
उधर, जीतन राम मांझी ने नीतीश पर पलटवार करते हुए कहा, नीतीश जो कर रहे हैं वह उन्हें हरगिज नहीं करना चाहिए। चुनावी गठजोड़ के बारे में मांझी ने कहा कि लालू नीतीश से पहले समर्थन वापस लें फिर वे आगे की बात करेंगे।
इससे पूर्व खबरें आई थीं कि बिहार सरकार ने पटना एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को वहां मौजूद आम और लीची का आनंद लेने से रोकने के लिए 24 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है।
मांझी जो कि गत फरवरी महीने में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री आवास में रह रहे हैं, जबकि नीतीश 7 सकुर्लर रोड स्थित एक सरकारी आवास में रह रहे हैं।
नीतीश-मांझी और 'आम' युद्ध
- मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास के फल-सब्ज़ियों का मामला
- अभी भी मुख्यमंत्री निवास में जीतनराम मांझी रहते हैं
- फरवरी में सीएम की कुर्सी जाने के बाद भी डटे हैं मांझी
- बिहार सरकार ने फल-सब्ज़ियों पर लगाया पहरा
- पेड़ों-सब्ज़ियों की सुरक्षा में 24 पुलिसवाले तैनात
- सरकार ने आठ सब इंस्पेक्टर, 16 कांस्टेबल लगाए
- मांझी की पार्टी का आरोप-फोन-केबल भी काटा गया
आम पर पहरा क्यों?
-पटना का 1-अणे मार्ग मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास
-मुख्यमंत्री ही कर सकते हैं फल-सब्ज़ियों का सेवन
-कोई दूसरा सेवन करे तो क़ीमत देनी होगी
-बाज़ार में बेचने पर सरकारी ख़ज़ाने में जाएंगे पैसे
नीतीश ने कहा, जिनको आम की चिंता है, उनको बढ़िया से आम दे देना चाहिए। अगर कोई कीमत वगैरह का मामला आता है, तो हम उसकी भरपाई अपनी तनख्वाह से कर देंगे।
उन्होंने कहा, केंद्र बिहार को दी जाने वाली राशि पर राजनीति कर रहा है, लेकिन इस बार बिहार के लोग झांसे में नहीं आएंगे, क्योंकि काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती।
नीतीश ने दिल्ली एसीबी के मामले पर कहा कि बिहार के अफसरों को लाने के केजरीवाल सरकार के फैसले पर केंद्र अड़ंगा डाल रहा है। नीतीश ने कहा कि वह केजरीवाल को और मदद देने को तैयार हैं। वहीं उन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए लालू यादव की पार्टी आरजेडी से गठबंधन मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
उधर, जीतन राम मांझी ने नीतीश पर पलटवार करते हुए कहा, नीतीश जो कर रहे हैं वह उन्हें हरगिज नहीं करना चाहिए। चुनावी गठजोड़ के बारे में मांझी ने कहा कि लालू नीतीश से पहले समर्थन वापस लें फिर वे आगे की बात करेंगे।
इससे पूर्व खबरें आई थीं कि बिहार सरकार ने पटना एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को वहां मौजूद आम और लीची का आनंद लेने से रोकने के लिए 24 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है।
मांझी जो कि गत फरवरी महीने में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री आवास में रह रहे हैं, जबकि नीतीश 7 सकुर्लर रोड स्थित एक सरकारी आवास में रह रहे हैं।
नीतीश-मांझी और 'आम' युद्ध
- मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास के फल-सब्ज़ियों का मामला
- अभी भी मुख्यमंत्री निवास में जीतनराम मांझी रहते हैं
- फरवरी में सीएम की कुर्सी जाने के बाद भी डटे हैं मांझी
- बिहार सरकार ने फल-सब्ज़ियों पर लगाया पहरा
- पेड़ों-सब्ज़ियों की सुरक्षा में 24 पुलिसवाले तैनात
- सरकार ने आठ सब इंस्पेक्टर, 16 कांस्टेबल लगाए
- मांझी की पार्टी का आरोप-फोन-केबल भी काटा गया
आम पर पहरा क्यों?
-पटना का 1-अणे मार्ग मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास
-मुख्यमंत्री ही कर सकते हैं फल-सब्ज़ियों का सेवन
-कोई दूसरा सेवन करे तो क़ीमत देनी होगी
-बाज़ार में बेचने पर सरकारी ख़ज़ाने में जाएंगे पैसे
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