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वोट पूरे थे तो प्रणव झा कैसे हारे? झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'भीतरघात' से बवाल, RJD को कांग्रेस की नसीहत

56 विधायकों के साथ झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन नंबर गेम में सबसे आगे था. वहीं, एनडीए के पास 24 विधायक विधानसभा में हैं, इनमें बीजेपी के 21 विधायक हैं.

वोट पूरे थे तो प्रणव झा कैसे हारे? झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'भीतरघात' से बवाल, RJD को कांग्रेस की नसीहत
झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'भीतरघात' से बवाल

झारखंड के राज्यसभा चुनाव में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद महागठबंधन के उम्मीदवार की हार ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है. शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने 56 विधायकों के समर्थन के दावे के बीच मिली इस चौंकाने वाली शिकस्त के बाद कांग्रेस और गठबंधन के नेताओं ने भीतरघात की आशंका जताते हुए कड़ी समीक्षा की मांग की है. कांग्रेस ने जहां इस हार के पीछे ‘बीजेपी के थैलीशाहों' के खेल को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं गठबंधन की एकजुटता का दावा करते हुए स्पष्ट किया है कि वे भाजपा के फूट डालो वाले मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे.

चुनाव परिणाम से कांग्रेस नेतृत्व हैरान

कांग्रेस नेताओं ने चुनाव नतीजों पर कड़ी हैरानी जताते हुए कहा कि महागठबंधन के पास 56 विधायकों का स्पष्ट और मजबूत आंकड़ा था. इस संख्या बल के आधार पर गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित होनी चाहिए थी. पार्टी ने दावा किया है कि कांग्रेस के एक-एक विधायक ने पूरी वफादारी के साथ पार्टी उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया है. पूरा वोट रहते हुए भी हार का सामना कैसे करना पड़ा, यह एक गंभीर सवाल है.

राज्यसभा चुनाव नतीजे को लेकर कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के भीतर भ्रम पैदा करके और दलों को आपस में लड़ाकर फायदा उठाना चाहती है. 

'गठबंधन के अस्तित्व पर आंच नहीं आने देंगे'

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर झारखण्ड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि हमारा गठबंधन अटूट है. हमें विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, लेकिन इस पुराने गठबंधन के अस्तित्व पर कोई आंच नहीं आने देंगे. उन्होंने साफ संदेश दिया कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है, हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे.

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसे नाजुक वक्त में अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि हार की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और राजद को भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. गठबंधन के नेताओं ने माना है कि इस धोखे के बाद अब सभी सहयोगी दलों को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचना होगा.

कांग्रेस के आरोप पर क्या बोली बीजेपी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा चुनाव परिणाम को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा पर लगाए आरोपों पर पलटवार किया है. साहू ने कहा कि इतनी किरकिरी के बाद भी कांग्रेस द्वारा सरकार में बने रहने वाला बयान कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता है. चाहे कितनी भी दुर्गति हो जाय, सत्ता से चिपके रहना कांग्रेस का तो स्वभाव ही है. अब इतनी दुर्गति के बावजूद भी कांग्रेस संतुष्ट है तो उनका भगवान ही मालिक है. कांग्रेस कहती है कि वे कोई भी विष पीने को तैयार हैं. वास्तविकता तो यह है कि  कांग्रेस सरकार से चिपककर मलाई खाने का काम कर रही है. जबकि कांग्रेस जैसे दल के हाथों में शासन होने के कारण असली विष तो जनता को पीना पड़ रहा है.

NDA समर्थित परिमल नथनानी ने कांग्रेस के प्रणव झा का हराया

IANS

क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल 

बता दें कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने कांग्रेस के प्रणव झा को हरा दिया. 2 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही है कि पर्याप्त संख्या में विधायक होने के बावजूद इंडिया ब्लॉक दोनों सीटें नहीं जीत सका. उसके खाते में सिर्फ में जेएमएम के बैद्यनाथ राम सीट दिलाने में कामयाब हो पाए. वहीं, क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस के साथ 'खेला' कर दिया और प्रणव झा चुनाव हार गए. 

ध्यान देने वाली बात है कि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोट चाहिए थे. इस हिसाब से दोनों सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत माना जा रही थी, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने इंडिया गठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. विधानसभा में NDA के 24 विधायकों के होने बावजूद परिमल नाथवानी को मिले 28 वोट, जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को सिर्फ 20 वोट ही मिले. जबकि बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले. दो वोट बीजेपी के और एक कांग्रेस का यानी कि कुल तीन वोट अमान्य पाए गए.   

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लेखक के बारे में
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हरिबंश शर्मा
संवाददाता
हरिवंश शर्मा पिछले 23 वर्षों के अनुभवी पत्रकार हैं और NDTV के वर्तमान में झारखंड संवाददाता हैं. वह आदिवासी बहुल राज्य झारखंड में  'जल, जंगल, जमीन' की... और पढ़ें
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