दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई झारखंड की छात्रा नूतन टोप्पो ने अपनी दर्दभरी आपबीती साझा की है. मंगलवार को रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने उस दिन की घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया. नूतन फिलहाल रांची के एक निजी अस्पताल में उपचार करा रही हैं. उन्हें हाल ही में बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
गुमला जिले की रहने वाली नूतन टोप्पो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं. छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए वह जंतर-मंतर पहुंची थीं. उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थीं और छात्रों की आवाज बुलंद करना चाहती थीं.
आंसू गैस और लाठीचार्ज के बाद मची अफरा-तफरी
नूतन के अनुसार 20 जुलाई की दोपहर प्रदर्शन के दौरान अचानक पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, वॉटर कैनन चलाया और लाठीचार्ज शुरू कर दिया. इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और छात्र-छात्राएं अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. उन्होंने बताया कि वह भी वहां से निकलकर राजीव चौक की ओर पहुंचीं. कुछ देर बाद कई छात्र फिर से एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन जारी रखने लगे. इसी दौरान हालात और तनावपूर्ण हो गए.
फायरिंग जैसी आवाज और कान में गंभीर चोट
नूतन ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों को अपनी ओर आते देखा. तभी अचानक उन्हें फायरिंग जैसी आवाज सुनाई दी. इसके तुरंत बाद उनके दाहिने कान में गंभीर चोट लगी और वह घायल हो गईं.
उन्होंने कहा कि आज तक उन्हें यह नहीं पता चल सका है कि उनके कान में चोट किस वजह से लगी. यह चोट पैलेट गन से लगी, किसी गोली से लगी या किसी अन्य वस्तु से, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. हालांकि चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा.
दो घंटे चली सर्जरी
घटना के बाद उनके साथियों ने उन्हें दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया. नूतन के अनुसार वहां उनकी करीब दो घंटे तक सर्जरी हुई. उन्होंने दावा किया कि उनका दाहिना कान लगभग कट चुका था. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. इसके बाद वह आगे के इलाज के लिए रांची लौट आईं, जहां उनका उपचार जारी है.
निष्पक्ष जांच की मांग
नूतन टोप्पो ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी सादी वर्दी में मौजूद थे. साथ ही कई वर्दीधारी कर्मियों की नेम प्लेट भी दिखाई नहीं दे रही थी.
उन्होंने कहा कि घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्हें इतनी गंभीर चोट कैसे लगी. नूतन का कहना है कि छात्रों की आवाज को सुना जाना चाहिए और इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
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