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झारखंड में छात्रों के आंदोलन का श्रेय न मिलने को बीजेपी को मलाल, खनन कानून पर JMM को करेगी एक्सपोज

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन समाप्त हो गया है. लेकिन बीजेपी को दरअसल, इस बात का मलाल है कि उसे श्रेय नहीं मिला है.

झारखंड में छात्रों के आंदोलन का श्रेय न मिलने को बीजेपी को मलाल, खनन कानून पर JMM को करेगी एक्सपोज
अमित शाह के साथ झारखंड के बीजेपी नेता
नई दिल्ली:

झारखंड के बीजेपी नेताओं को इस बात का मलाल है कि राज्य में पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में छात्र आंदोलन की सफलता का श्रेय उन्हें नहीं मिला. गृह मंत्री अमित शाह के साथ राज्य बीजेपी के नेताओं की बैठक में इस बात का ज़िक्र भी किया गया. बीजेपी नेताओं के मुताबिक इस आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्रवाई की और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और अन्य नेताओं को इसकी क्रेडिट मिल गई. बीजेपी ने छात्रों के समर्थन में राज्य बंद का आह्वान किया लेकिन उसे भी अधिक सफलता नहीं मिल सकी. बीजेपी नेताओं ने अमित शाह को बताया कि पार्टी ने छात्रों की आवाज सड़क से लेकर विधानसभा तक पुरजोर ढंग से उठाई है. 

बीजेपी की क्या है तैयारी 

इस मामले में सीबीआई जांच की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है. इसके लिए बाबूलाल मरांडी ने सीएम सोरेन को पत्र भी लिखा है. दरअसल, इस मामले की जांच या तो हाईकोर्ट के आदेश पर या राज्य सरकार की सिफारिश पर ही हो सकती है. ऐसे में देखा जा रहा है कि क्या कोई प्रत्याशी इसके लिए अदालत का रास्ता लेता है या नहीं. इस बीच हाईकोर्ट ने जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को रद्द करने के सोरेन सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है.

अमित शाह से नेताओं की मुलाकात 

बुधवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से राज्य बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की. इसमें राज्य के हालात को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. राज्य में बीजेपी के चार पूर्व मुख्यमंत्री हैं- अर्जुन मुंडा, रघुबर दास, चंपई सोरेन और बाबूलाल मरांडी. यह चारों शाह से मिलने वाले नेताओं में शामिल थे. इनके अलावा राज्य बीजेपी के वर्तमान अध्यक्ष आदित्य साहू और पूर्व अध्यक्ष दीपक प्रकाश रविंद्र राय और संगठन महासचिव कर्मवीर सिंह आदि भी शामिल थे. सूत्रों के मुताबिक शाह ने राज्य से जुड़े सभी मुद्दों पर खुल कर बात की और उनका मार्गदर्शन किया.

राज्य बीजेपी नेताओं ने उन्हें बताया कि सीएम हेमंत सोरेन हाल ही में संसद द्वारा पारित माइन्स एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन संशोधन विधेयक को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं. सोरेन के मुताबिक इससे राज्य सरकार के अधिकार प्रभावित होंगे और आर्थिक नुकसान होगा. उनका विरोध विशेष रूप से कानून के सेक्शन 9 D को लेकर है. इसके तहत राज्य सरकारों को खनन भूमि पर नए कर लगाने का अधिकार नहीं होगा जब तक कि वे केंद्र सरकार की शर्तों का पालन नहीं करतीं. सोरेन इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बता रहे हैं. कांग्रेस शासित राज्य इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना भी बना रहे हैं.

बीजेपी नेताओं के मुताबिक नया कानून राज्यों के हित में है और इससे नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही लिथियम और कोबाल्ट जैसी क्रिटिकल मिनरल्स के खनन के नए अवसर पैदा होंगे. निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और राजस्व का केंद्र और राज्य में आनुपातिक रूप से बंटवारा होगा कल की बैठक में तय किया गया कि विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों का मुकाबला करने के लिए जल्दी ही केंद्र सरकार सारे तथ्य देश के सामने रखेगी. इसके लिए वरिष्ठ मंत्री पीयूष गोयल की प्रेस कांफ्रेंस भी आयोजित की जा सकती है.

आदिवासियों के मुद्दे पर सोरेन को घेरेगी बीजेपी 

परिसीमन के मुद्दे पर भी सोरेन सरकार ने केंद्र को खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. राज्य में विधानसभा सीटों का परिसीमन होना है. साथ ही परिसीमन विधेयक पारित होने की सूरत में सीटों की संख्या भी बढ़नी है. जेएमएम का आरोप है कि आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को कम करने की साजिश की जा रही है. वहीं बीजेपी का कहना है कि यह जवाब दिया जाए कि आदिवासियों की संख्या में लगातार कमी क्यों आ रही है? क्या इसके लिए धर्मांतरण और बांग्लादेशियों की घुसपैठ जिम्मेदार नहीं है. बीजेपी ने तय किया है कि इस मुद्दे पर राज्य भर में अभियान चला कर सोरेन सरकार को एक्सपोज किया जाएगा.

सोरेन संग नहीं होगा गठजोड़

बीजेपी सूत्रों ने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर जेएमएम का साथ लेने की कोशिशें हो रही हैं. उनके मुताबिक इसकी संभावना अभी कम है. वे बीजेपी और जेएमएम के गठबंधन की अटकलों को भी खारिज करते हैं. दरअसल, बिहार में बीजेपी की बंपर जीत के बाद अटकलें शुरू हुईं थीं कि जेएमएम कांग्रेस और आरजेडी से रिश्ता तोड़ कर बीजेपी के साथ आ सकती है. लेकिन बीजेपी नेताओं ने कहा कि ऐसी कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि तमाम तरह से दरकिनार किए जाने के बावजूद कांग्रेस सोरेन सरकार से हटने को तैयार नहीं है.
 

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