जापान की प्रधानमंत्री सनाई ताकाएची आज से 3 दिन के नई दिल्ली दौरे पर हैं, जहां वो भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी. सनाई ताकाएची (Sanae Takaichi) अक्टूबर 2025 में पुरुषों के वर्चस्व वाले जापान की पहली प्रधानमंत्री बनी थीं. रॉक बैंक, जूडो कराटे चैंपियन के साथ उन्हें महंगी बाइक और स्पोर्ट्स कारों का शौक रहा है, जो जापान के पुरुष प्रधान समाज में एक मिसाल है. शिंजो आबे की करीबी रहीं ताकाएची ने कंजरवेटिव लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की कमान संभाली. फिर फरवरी 2026 के चुनाव में भारी बहुमत हासिल कर अपनी ताकत साबित की. वो जापान के दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे की बेहद करीबी और पसंदीदा राजनेता रही हैं.
सनाई ताकाएची का जुनून
आम लड़कियों से अलग ताकाएची के शौक भी जुदा हैं. यूनिवर्सिटी के दिनों में सनाई रॉक बैंड में ड्रम बजाया करती थीं. उन्हें आज भी हैवी मेटल म्यूजिक पसंद है और फुरसत के पलों में इसे खूब बजाती हैं.
बाइक और स्पोर्ट्स कारों का शौक
बाइकर्स और स्पोर्ट्स कार का उन्हें शौक है. वो कावासाकी जैसी भारी मोटरसाइकिलें चलाती रही हैं. उनके पास 1991 मॉडल की पुरानी स्पोर्ट्स कार टोयोटा है, जिससे वे 20 सालों तक संसद आती-जाती रही थीं.
मार्शल आर्ट्स और एडवेंचर पसंद
ताकाएची को मार्शल आर्ट्स और रोमांच भरे खेलों एडवेंचर गेम्स का काफी शौक है. जूडो-कराटे और स्कूबा डाइविंग (Scuba Diving) की भी वो अच्छी खिलाड़ी हैं. उन्हें जापानी कॉमिक्स मैंगा पढ़ने की वो बेहद शौकीन हैं. वो बाकायदा जापानी संसद में एनीमे, मैंगा और गेम्स को बढ़ावा देने की वकालत करती हैं.
तलाक और फिर दोबारा शादी
सनाई ताकाएची की शादीशुदा जिंदगी जापानी सोच से बिल्कुल जुदा है. उन्होंने साल 2004 में साथी नेता ताकु यामामोतो से शादी की थी. राजनीतिक व्यस्तता और मतभेदों के चलते 2017 में दोनों का तलाक हो गया. लेकिन साल 2021 में दोनों ने दोबारा एक-दूजे का होने का फैसला कर शादी कर ली.
पति ने अपनाया पत्नी का सरनेम
दोबारा शादी के बाद सनाई ताकाएची ने अपना सरनेम नहीं बदला, बल्कि पति ताकु ने अपना नाम बदला. जापान के इतिहास में ऐसा कम ही देखने को मिलता है. दोबारा शादी के बाद उनके पति ताकु ने अपना सरनेम बदलकर ताकु ताकाएची कर लिया. राजनीति छोड़ चुके उनके पति ताकु खुद पर्दे के पीछे रहकर उनका साथ देते हैं. चकाचौंध से दूर वो अपनी प्रधानमंत्री पत्नी का समर्थन करते हैं. इस जोड़े के तीन बच्चे हैं, जो उनके पति की पहली शादी से हैं.
जापान का पारिवारिक ढांचा
जापान का पारंपरिक पारिवारिक ढांचा इऐ (Ie) व्यवस्था यानी घराना या खानदान पर चलता है. इसमें परिवार का सबसे बुजुर्ग पुरुष ही सर्वेसर्वा होता है. संपत्ति और वंश का नाम हमेशा बड़े बेटे को ही ट्रांसफर होता है. जापान के नागरिक कानून (Civil Code) के मुताबिक, शादी के बाद पति-पत्नी को एक ही सरनेम रखना होता है. द जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 96 फीसदी मामलों में महिलाओं को सरनेम बदलना पड़ता है. भारत की तरह पुरुष का काम बाहर पैसा कमाना और महिला का काम घर संभालना और बच्चों की परवरिश करना होता है.
सैलरीमैन कल्चर
जापानी कंपनियों में भी पुरुषों का दबदबा है. ऑफिस के लिए अपनी जान लगा देना ही बड़प्पन माना जाता है. बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, कामकाजी महिलाओं के गर्भवती होने पर उन्हें नौकरी छोड़ने या डिमोशन को मजबूर होना पड़ता है.कंपनियों को लगता है कि मां बनने के बाद वो ऑफिस को 14-16 घंटे नहीं दे पाएंगी. सीईओ और बोर्ड मेंबर्स में महिलाएं कम हैं. बिजनेस मीटिंग और पार्टियों में महिलाओं की कम भागीदारी होती है. महिला कर्मियों को अक्सर ज्यादा ग्रोथ और प्रमोशन वाले मौके नहीं मिलते हैं.
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