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सरकार क्या कह रही, विपक्ष के अपने दावे... जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुलगती राजनीति

विपक्ष के कई बड़े चेहरे भी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में आ चुके हैं. केंद्र सरकार भी एक्शन मोड में है, हर दावे का जवाब दिया जा रहा है, विपक्ष को निशाने पर लिया जा रहा है.

सरकार क्या कह रही, विपक्ष के अपने दावे... जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुलगती राजनीति
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर होती राजनीति
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है. विपक्ष के कई बड़े चेहरे भी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में आ चुके हैं. केंद्र सरकार भी एक्शन मोड में है, हर दावे का जवाब दिया जा रहा है, विपक्ष को निशाने पर लिया जा रहा है. पक्ष-विपक्ष की इस राजनीति को नेताओं की बयानबाजी से आसानी से समझा जा सकता है.

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार युवाओं की मांग को स्वीकार करें और मंत्री खुद स्वीकार कर रहे थे इसलिए परीक्षा दोबारा हुई. पेपर लीक कोई पहली बार नहीं हुए हैं लगातार भारत सरकार के अंदर और भारत सरकार और यूपी सरकार से में प्रतियोगिता चल रही है कि कौन ज्यादा पेपर लीक करवाएगा. अगर भारत सरकार पेपर लीक कराती है तो यूपी सरकार भी पेपर लीक कराती है अगर वहां पर डेढ़ सौ पेपर लीक हुए हैं तो यहां पर 20 पेपर लीक हो चुके हैं...पेपर लीक हो नहीं रहे बल्कि कराए जा रहे हैं छात्रों को नौकरी न मिल जाए, और जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे तब तक सदन में हम आवाज उठाते रहेंगे. जिन बच्चों की जान गई है उनके परिवारों की जो मांग है वो मानी जाए.

निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस विरोध प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि यह मामला इस देश के छात्र, युवाओं से जुड़ा है, खासकर उनके परीक्षा की तैयारी, परीक्षा पेपर लीक और री-एग्जाम से ये उस उम्र के बच्चों के लिए बहुत सेंसिटिव हैं जो तैयारी कर रहे हैं. अगर सरकार सेंसिटिव नहीं है या रिएक्ट नहीं कर रही है, तो मैं समझ सकती हूं कि विपक्ष इस तरह का हमला क्यों कर रहा है. प्रधानमंत्री के लेवल पर असल में आज के ऐलान से बहुत पहले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और उन लोगों को सज़ा देने का भरोसा दिया गया है जिन्होंने पेपर लीक करके, पेपर खरीदकर, पेपर बेचकर एग्जाम की पवित्रता को तोड़ा है. इस ऐलान से भी पहले, सरकार ने उन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था जिन्होंने असल में यह जुर्म किया था. देश में ऐसे लोग हैं, आम नागरिक हैं जिन्होंने अपने मतलब के लिए पेपर खरीदे और बेचे, पेपर लीक किए, उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

टीएमसी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने क्या कहा?

पीएम नरेंद्र मोदी के सख्त एक्शन लेने के आश्वासन पर शत्रुघ्न सिन्हा ने बयान दिया है. उन्होंने बोला कि बड़ी देर कर दी. राहुल गांधी के मांग के जवाब में और छात्र जो आज धरना पर बैठे हुए हैं उनके समस्याओं के समाधान के प्रक्रिया में आज पीएम मोदी आए हुए हैं और उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को कहा है और दोषियों पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई करेंगे. जिन लोगों ने करोड़ों बच्चों का जीवन बर्बाद करने की कोशिश की उनके माता-पिता को चोट पहुंचाई है उसके लिए आप कह रहे हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे. मैं समझता हूं ये सब खोखली बाते हैं.

गिरिराज सिंह ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जब नीट का पेपर लीक हुआ था तब प्रधानमंत्री ने बच्चों को भरोसा दिया. फिर से परीक्षा हुई, 22-23 लाख बच्चे परीक्षा में शामिल हुए. अब एडमिशन भी ले रहे हैं...छात्रों के कंधे पर रखकर ये लोग बंदूक चला रहे हैं. इनको समाधान नहीं चाहिए. रोज-रोज मांग बदल रहे हैं. सरकार कह रही है कि नीट पर चर्चा करो. ये अलग शर्त ले आए सपा दूसरी बात कह रही है. केजरीवाल की पार्टी तीसरी बात कह रही है. प्रधानमंत्री से ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं होगा. उन्होंने जो कहा कि फास्टट्रैक लाएंगे. मेरा पूरा विश्वास है कि बात से ही रास्ता निकलता है.

पीयूष गोयल ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष को आड़े हाथों लेने का काम किया है. उन्होंने कहा है कि आज पीएम मोदी ने साफ़ कर दिया है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाएगी. ऐसे कामों के दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाकर सज़ा दी जाएगी...हम कांग्रेस पार्टी और विपक्ष से गुज़ारिश करते हैं कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें. भागें नहीं, चर्चा करें. हम विपक्ष के चर्चा से भागने और उसके राजनीतिकरण की कड़ी निंदा करते हैं.

सपा सांसद इकरा हसन ने क्या कहा?

सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि 20 जुलाई को आंदोलन के मुख्य नेताओं को जब मिलने बुलाया गया तब उनके 4 घंटे वहां बर्बाद किए गए. एक बहुत महत्वपूर्ण दिन था. इतने लोग इकट्ठा थे? उन्होंने अपना मांग पत्र दिया बदले में ना कोई आश्वासन दिया ना कोई उत्तर दिया...किसी भी धरने या आंदोलन का नियम होता है कि खुले मंच पर कोई भी बात हो निर्णय भी उनके बीच में लिया जाता है.

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