सर्दी ने दस्तक दे दी है और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की राजधानी भी बदलने वाली है. इसे 'दरबार मूव' कहा जाता है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को 'दरबार मूव' की तैयारियों का जायजा लिया. यह जम्मू-कश्मीर की राजधानी को श्रीनगर से जम्मू और जम्मू से श्रीनगर बदलने की प्रक्रिया है.
मंगलवार को मीटिंग के दौरान उमर अब्दुल्ला ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे श्रीनगर से जम्मू तक दफ्तरों के सुचारू, सुरक्षित और बेहतर तालमेल के साथ शिफ्टिंग करें. साथ ही कर्मचारियों के लिए भी सुविधाएं करें.
जम्मू-कश्मीर में यह परंपरा 150 साल से भी ज्यादा पुरानी है. हालांकि, 2021 में इस परंपरा पर रोक लगा दी गई थी. पिछले साल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फिर से इस परंपरा को शुरू कर दिया.
क्या होता है इसमें?
जम्मू-कश्मीर की यह परंपरा 150 साल से भी ज्यादा पुरानी है. इसकी शुरुआत 1872 में डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने की थी.
इस परंपरा को इसलिए शुरू किया गया था, क्योंकि सर्दियों के समय घाटी में बहुत कड़ाके की ठंड पड़ती है. इस कारण सर्दियों में प्रशासन को श्रीनगर से जम्मू और गर्मियों में जम्मू से श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाता था.
इसके तहत हर साल सरकारी दफ्तर, फाइलें, कंप्यूटर, टेबल-कुर्सी को श्रीनगर से जम्मू शिफ्ट किया जाएगा. सारा सामान ट्रकों में भरकर लगभग 300 किलोमीटर दूर भेजा जाता है. लगभग 10 हजार कर्मचारी एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं.
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यहीं से चलती है सरकार
जम्मू-कश्मीर की राजधानी हर साल नवंबर के पहले हफ्ते में श्रीनगर से जम्मू शिफ्ट होती है. सरकार का कामकाज मई के पहले हफ्ते में वापस श्रीनगर आ जाता है.
सीएम सेक्रेटेरिएट और सिविल सेक्रेटेरिएट के सभी विभागों समेत 39 दफ्तर पूरी तरह से शिफ्ट हो जाते हैं, जबकि 47 विभाग कैंप से काम करते हैं.
पिछले साल सरकार ने जो आदेश जारी किया था, उसके मुताबिक जो विभाग कैंप से काम करते हैं, उनमें 33% स्टाफ या 10 अधिकारी ही साथ काम करते हैं. गर्मी शुरू होने पर ये सभी दफ्तर कश्मीर वापस आ जाएंगे.

Photo Credit: IANS
इसे बंद क्यों कर दिया था?
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया था. इसके बाद 2021 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 'दरबार मूव' की परंपरा भी खत्म कर दी थी.
तब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने खर्च कम करने के उपायों का हवाला देते हुए इसे रोकने का आदेश दिया था. तब दावा किया गया था कि इससे हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत होगी.
हालांकि, इस फैसले का जम्मू के कारोबारियों पर बुरा असर पड़ा था. कई लोगों का मानना है कि 'दरबार मूव' स्थानीय कारोबारियों के लिए अहम है.
जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला ने 'दरबार मूव' की परंपरा को बहाल करने का वादा किया था. चुनाव जीतने के बाद उमर अब्दुल्ला ने इस परंपरा को फिर शुरू कर दिया.
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