विज्ञापन

गांधी मैदान से परेड ग्राउंड, फ्रीडम पार्क से आजाद मैदान तक... देश के हर बड़े शहर में है एक जंतर-मंतर

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को डेजिग्नेटेड प्रोटेस्ट साइट की लिस्ट से हटा दिया है. इसके बाद देश के बाकी दूसरे 'जंतर-मंतर' चर्चा में आ गए हैं. जानते हैं देश और दुनिया में कहां-कहां 'जंतर-मंतर' जैसे प्रदर्शन स्थल हैं?

गांधी मैदान से परेड ग्राउंड, फ्रीडम पार्क से आजाद मैदान तक... देश के हर बड़े शहर में है एक जंतर-मंतर
जंतर-मंतर पर अब विरोध प्रदर्शन या धरना नहीं हो सकेगा.
AFP
नई दिल्ली:

दिल्ली का जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन करने की जगह नहीं रहा. पुलिस ने विरोद प्रदर्शनों के बीच पुलिस ने जंतर-मंतर से डेजिग्नेटेड प्रोटेस्ट साइट का दर्जा छीन लिया. इसकी जगह अब विरोध प्रदर्शन और धरने के लिए तीन नई जगहें तय की गई हैं. ये जगहें हैं- रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान.

रामलीला मैदान मध्य जिले में स्थित है और यह जंतर मंतर से 4 किलोमीटर दूर है, जबकि पूर्वी जिले का सीबीडी मैदान 12 से 13 किलोमीटर दूर है और उत्तरी जिले में बुराड़ी मैदान लगभग 21 किलोमीटर दूर है.

जंतर-मंतर अब प्रोटेस्ट करने की जगह नहीं रहा, लेकिन इतिहास के झरोखे में झांकें या वर्तमान में नजर डालें तो देश के हर बड़े शहर में 'जंतर-मंतर' है.

समय के साथ सार्वजनिक सुविधा के नाम पर इनमें से कई जगहों को भले ही विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों की लिस्ट से हटा दिया गया, लेकिन कुछ जगहें आज भी 'अभिव्यक्ति की आजादी के केंद्र' या 'प्रतिरोध स्थल' के तौर पर बनी हुई हैं.

इनमें से कुछ जगहें ब्रिटिश हुकूमत के दमन की गवाह रही हैं, जबकि कई स्थलों को महात्मा गांधी और उनके सत्याग्रह से जुड़ाव के कारण खास पहचान मिली.

देश में कहां-कहां जंतर-मंतर?

मुंबई: आजाद मैदान

यह मूल रूप से ‘एस्प्लेनेड' नाम के एक विशाल खुले मैदान का हिस्सा था. 1857 के विद्रोह के दौरान यहां लोगों को सरेआम फांसी दी जाती थी. बाद में आजादी की लड़ाई के दौरान यह राष्ट्रवादी विरोध-प्रदर्शनों का एक मुख्य केंद्र बन गया. साल 1931 में महात्मा गांधी ने यहां एक विशाल रैली की थी.

आजाद मैदान से कुछ ही किलोमीटर दूर मुंबई का एक और विरोध-प्रदर्शन स्थल 'अगस्त क्रांति मैदान' मौजूद है, जहां से गांधी ने 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया था. पास में ही शिवाजी पार्क भी है, जो बड़ी राजनीतिक सभाओं और सार्वजनिक रैलियों के लिए एक और प्रमुख जगह है.

बेंगलुरु: फ्रीडम पार्क

लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर बना फ्रीडम पार्क बेंगलुरु में सार्वजनिक रैलियों और विरोध-प्रदर्शनों के लिए समर्पित स्थल है. शुरू में अंग्रेजों ने वहां एक केंद्रीय कारागार बनाया था, जहां कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया गया था और फांसी दी गई थी. 

आपातकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी समेत कई विपक्षी नेताओं को वहां कैद किया गया था. 2008 में केंद्रीय कारागार की जगह 'फ्रीडम पार्क' बनाया गया, जिसमें एक जेल संग्रहालय भी है.

कोलकाता: ब्रिगेड परेड ग्राउंड

प्लासी की लड़ाई में जीत के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं ने इसका परेड ग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल शुरू किया. यह मैदान आजादी के आंदोलन के दौरान विरोध-प्रदर्शन का एक मुख्य केंद्र बनकर उभरा, जहां रॉलेट एक्ट के खिलाफ देशबंधु चित्तरंजन दास ने एक बड़ी रैली भी आयोजित की थी.

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तत्कालीन सोवियत संघ के नेताओं के लिए एक सार्वजनिक स्वागत समारोह आयोजित किया था. 

इसके अलावा, पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत के बाद बांग्लादेश की स्थापना पर इंदिरा गांधी ने यहां एक कार्यक्रम के लिए मुजीबुर रहमान को आमंत्रित किया था. ब्रिगेड परेड ग्राउंड पश्चिम बंगाल में रैलियों के आयोजन के लिए पसंदीदा स्थल भी रहा है, फिर चाहे वह वामपंथी सरकार का दौर रहा हो या तृणमूल कांग्रेस या भाजपा का शासन.

एस्प्लेनेड के पास स्थित रानी राशमोनी एवेन्यू, शहीद मीनार मैदान और कॉलेज स्क्वायर कोलकाता में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित अन्य स्थल हैं.

पटना: गांधी मैदान

पहले 'पटना लॉन्स' और 'बांकीपुर मैदान' के नाम से जाना जाने वाला यह विशाल मैदान गंगा के किनारे स्थित है और यहां कई ऐतिहासिक विरोध-प्रदर्शन और रैलियां हुई हैं. 

अंग्रेजों ने इस मैदान को सैन्य अभ्यास, घुड़दौड़, पोलो और गोल्फ के लिए विकसित किया था. बाद में यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रैलियों का एक प्रमुख स्थल बन गया, जहां चंपारण आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े प्रदर्शन भी आयोजित किए गए.

मुहम्मद अली जिन्ना ने 1938 में यहां मुस्लिम लीग के एक अहम अधिवेशन की मेजबानी की, जबकि 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की बैठक आयोजित की. आजादी के बाद जब जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के खिलाफ 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया, तो यह मैदान जेपी आंदोलन को गति देने वाला प्रमुख केंद्र बन गया.

Latest and Breaking News on NDTV

चेन्नई: तिलक घाट

मरीना बीच पर स्थित तिलक घाट का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के नाम पर रखा गया था. आजादी के आंदोलन के दौरान यह जगह विरोध-प्रदर्शन का एक अहम केंद्र थी, जहां महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और एनी बेसेंट जैसे कई बड़े नेताओं ने लोगों को संबोधित किया था. हालांकि, अब तिलक घाट विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों में शामिल नहीं है.

चेन्नई में वल्लुवर कोट्टम और स्वामी शिवानंद सलाई विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित अन्य प्रमुख जगहें थीं. मार्च 2025 में वल्लुवर कोट्टम में प्रदर्शन की अनुमति रद्द करने के बाद पुलिस ने स्वामी शिवानंद सलाई को विरोध-प्रदर्शन के लिए एक वैकल्पिक जगह के तौर पर निर्धारित किया.

दिल्ली: बोट क्लब

जंतर-मंतर को एक वेधशाला के बजाय प्रदर्शन स्थल के तौर पर पहचान मिलने से पहले, संसद और राष्ट्रपति भवन के पास स्थित बोट क्लब का विशाल लॉन रैलियों, प्रदर्शनों और आंदोलनों का मुख्य केंद्र हुआ करता था.

महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में 1988 में हुए किसान आंदोलन के दौरान ट्रैक्टर और मवेशियों के साथ पांच लाख से ज्यादा लोगों की भारी भीड़ जुटी थी, जिसके बाद बोट क्लब पर विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगाने की शुरुआत हुई. 

साल 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बोट क्लब पर विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. हालांकि, 2018 में अदालत के एक आदेश ने जंतर-मंतर के साथ-साथ इसे कुछ समय के लिए फिर से विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी.

लुटियंस दिल्ली की इन दो जगहों से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित रामलीला मैदान भी विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों में शामिल है, लेकिन इसके लिए कुछ कीमत भी चुकानी पड़ती है. 

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह भारत में शामिल करने की मांग को लेकर रामलीला मैदान से ही सत्याग्रह शुरू किया था. समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने 25 जून 1975 को (जब आपातकाल लागू हुआ था) यहां एक बड़ी रैली को संबोधित किया था.

दूसरे शहरों में भी कई जगह

लखनऊ में 'इको गार्डन' है, पणजी में 'आजाद मैदान' और 'कैम्पल परेड ग्राउंड' हैं, हैदराबाद में 'धरना चौक', 'गन पार्क' और 'लिवरी सर्कल' हैं, और जयपुर में 'शहीद स्मारक' है.

दुनियाभर में कहां-कहां हैं 'जंतर-मंतर'?

  • हाइड पार्क, लंदन: लंदन के प्रसिद्ध हाइड पार्क के उत्तर-पूर्वी कोने में स्थित स्पीकर्स कॉर्नर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए समर्पित है. 19वीं सदी के मध्य से यह सार्वजनिक भाषणों और बहस का पारंपरिक स्थल रहा है. कार्ल मार्क्स और व्लादिमीर लेनिन जैसे नेताओं के अलावा जॉर्ज ऑरवेल जैसी प्रसिद्ध हस्तियां भी यहां अपनी बात रख चुकी हैं. आज भी रविवार की सुबह यहां लोगों की भीड़ जुटना आम बात है, जो विभिन्न वक्ताओं के विचार सुनती है. इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना पूर्व सूचना दिए यहां किसी भी विषय पर बोल सकता है, बशर्ते पुलिस को उसका भाषण कानून के अनुरूप लगे.
  • ट्राफलगर स्क्वायर, लंदन: संग्रहालयों, कला दीर्घाओं, सांस्कृतिक स्थलों और ऐतिहासिक इमारतों से घिरा यह स्थान लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र है. यहां वीकेंड में राजनीतिक, धार्मिक और अन्य मुद्दों पर अक्सर रैलियां और प्रदर्शन होते हैं. लंदन के मेयर इस लोकतांत्रिक परंपरा का समर्थन करते हैं और ऐसे आयोजनों के लिए इस चौक का इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं.
  • व्हाइटहॉल/पार्लियामेंट स्क्वायर, लंदन: वेस्टमिंस्टर पैलेस (संसद भवन) के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित यह स्थान सरकारी कार्यालयों, डाउनिंग स्ट्रीट और वेस्टमिंस्टर एबे से सीधे जुड़ा है. ब्रिटिश सरकार और न्यायपालिका के केंद्र के नजदीक होने के कारण यह सार्वजनिक सभाओं का प्रमुख स्थल है.
  • यूनियन स्क्वायर, न्यूयॉर्क: न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन में स्थित यूनियन स्क्वायर पार्क एक ऐतिहासिक सार्वजनिक चौक और राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल है. उन्नीसवीं सदी के मध्य से यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, श्रमिक आंदोलनों और राजनीतिक प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है.
  • लाफायेट स्क्वायर, वॉशिंगटन: व्हाइट हाउस के उत्तर में स्थित यह स्थान एक सदी से भी अधिक समय से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शोक सभाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़े प्रदर्शनों का स्थल रहा है. वर्ष 1889 में लोहे की बाड़ और दरवाजे हटाए जाने के बाद से यहां कोई बाड़ नहीं रही है, जिससे यह स्थान अधिक खुला हो गया था. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन यहां स्थायी बाड़ लगाने की योजना बना रहा है.
  • नेशनल मॉल/अमेरिकी कैपिटल परिसर, वॉशिंगटन: साल 1964 में वाशिंगटन मार्च और 1970 में पृथ्वी दिवस जैसे कई ऐतिहासिक आयोजनों में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक यहां जुटे थे.
Latest and Breaking News on NDTV
  • तकसीम स्क्वायर, इस्तांबुल (तुर्किये): शहर के मध्य में स्थित यह ऐतिहासिक सार्वजनिक स्थल कड़ी सुरक्षा के लिए भी जाना जाता है. इसके बावजूद यह श्रमिक रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और अन्य सभाओं का प्रमुख केंद्र रहा है.
  • हांग लिम पार्क, सिंगापुर: इस पार्क का नाम उस कारोबारी के नाम पर पड़ा, जिसने इसके लिए जमीन दान की थी. यहां सिंगापुर की पहली राजनीतिक रैलियां आयोजित हुई थीं. अब यहां सामुदायिक कार्यक्रम भी होते हैं. पार्क में स्थित स्पीकर्स कॉर्नर सिंगापुर का एकमात्र निर्धारित खुला स्थल है, जहां नागरिक भाषण दे सकते हैं या प्रदर्शन कर सकते हैं.
  • प्लेस डे ला बास्तील, पेरिस: फ्रांसीसी क्रांति के प्रतीक के रूप में पहचाने जाने वाले इस स्थान पर कई विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक सभाएं और नागरिक मार्च आयोजित किए गए हैं.
  • तहरीर स्क्वायर, काहिरा: पहले इस्माइलिया स्क्वायर के नाम से जाना जाने वाला यह चौक दशकों से विरोध प्रदर्शनों का पारंपरिक स्थल रहा है. यहां 1977 में रोटी की कीमतों को लेकर हुए दंगे और 2011 की मिस्र की क्रांति जैसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए.
  • प्लाजा दे मायो, ब्यूनस आयर्स: ब्यूनस आयर्स का यह सबसे पुराना सार्वजनिक चौक शहर के इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है.
  • उहुरू पार्क, नैरोबी: शहर के केंद्रीय कारोबारी क्षेत्र में स्थित यह सार्वजनिक पार्क प्रदर्शनों, रैलियों और नागरिक समाज के आंदोलनों का ऐतिहासिक स्थल रहा है. साल 2024 में कर वृद्धि के खिलाफ जेन-जी के प्रदर्शन भी यहां हुए थे.
  • मैदान नेजालेझनोस्ती, कीव: कीव स्क्वायर के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस स्थान पर स्वतंत्रता स्मारक स्थित है. यहां नागरिक और राजनीतिक गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है.
  • जोकालो, मेक्सिको सिटी: आधिकारिक तौर पर प्लाजा दे ला कॉन्स्टिट्यूशन कहलाने वाला यह शहर का मुख्य चौक है. यहां नागरिक सभाएं, राजनीतिक रैलियां और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं. इसके आसपास राष्ट्रपति का कार्यालय और मेक्सिको सिटी का मेट्रोपॉलिटन कैथेड्रल स्थित हैं.
  • प्लाजा इटालिया, सैंटियागो: आधिकारिक तौर पर प्लाजा बाक्वेदानो कहलाने वाले इस स्थान को प्रदर्शनकारी अक्सर प्लाजा दे ला दिग्निदाद भी कहते हैं. यह शहर का प्रमुख स्थल है और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों, सभाओं तथा राष्ट्रीय समारोहों के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है.

ये वीडियो भी देखें- टाइट सिक्योरिटी के बावजूद जंतर-मंतर कैसे पहुंचे आशुतोष रांका? 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Jantar Mantar, Protest Site, Protest Across The Country, Delhi News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com