- जबलपुर के बरगी डैम हादसे ने मध्य प्रदेश सहित पूरे देश को गहरे में झकझोर दिया है
- एनडीटीवी ने क्रूज के पायलट से एक्सक्लूसिव बातचीत की जिसमें उन्होंने पहली बार चुप्पी तोड़ी
- पायलट ने कैमरे पर हाथ जोड़कर पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और अपनी जिम्मेदारी स्वीकारी
जबलपुर के बरगी डैम हादसे ने एमपी को ही नहीं बल्कि पूरे देश को ही झकझोर दिया है. मां के साथ लिपटे बेटे की तस्वीर ने तो हर देशवासी को रुला दिया. उस क्रूज में हंसी खुशी से चहकते परिवार को क्या पता था कि अगले पल उनके साथ ऐसा हो जाएगा. अब एनडीटीवी से क्रूज के पायलयट एक्सक्लूसिव बातचीच की है. पहली बार एनडीटीवी के कमरे पर पायलट ने हादसे को लेकर चुप्पी तोड़ी है. कैमरे पर क्रूज के पायलट ने हाथ जोड़कर पीड़ित परिवारों से माफी मांगी है. इसके अलावा क्रूज के पायलट ने मौसम और उस वक्त की स्थिति पर बड़ा खुलासा भी किया है.
हादसे के वक्त कैसा था मौसम?
एनडीटीवी से खास बातचीत में क्रूज के पायलट ने बताया कि यात्रा के समय मौसम सामान्य था, लेकिन बीच समुद्र में पहुंचते ही अचानक तेज हवाएं चलने लगीं. पायलट के अनुसार, हालात बिगड़ते देख उन्होंने तुरंत नाव को वापस मोड़ दिया.हालांकि, तूफान अचानक बहुत तेज हो गया और नाव से ऊंची‑ऊंची लहरें टकराने लगीं. कुछ ही देर में नाव के अंदर पानी भरना शुरू हो गया, जिससे यात्रियों में अफरा‑तफरी मच गई. पायलट ने कहा कि मैंने तुरंत रिसेप्शन को सूचना दी और दुर्घटना की आशंका जताते हुए दूसरी नाव भेजने का अनुरोध किया था. पायलट का कहना है कि शुरुआत में यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया, क्योंकि उस समय कई लोग नाच‑गाना कर रहे थे और आनंद ले रहे थे.

पायलट ने यह भी दावा किया कि खराब मौसम को लेकर उन्हें किसी तरह की आधिकारिक चेतावनी या लौटने का निर्देश नहीं दिया गया था. उन्होंने बताया कि उन्हें 15 साल से अधिक का अनुभव है और अपने पूरे करियर में उन्होंने ऐसा हालात पहले कभी नहीं देखा. पायलट के अनुसार, जब नाव किनारे से करीब 100 मीटर दूर थी, तब उन्हें एहसास हुआ कि सुरक्षित तरीके से पहुंच पाना मुश्किल हो सकता है. इसी दौरान इंजन रूम में पानी भरने लगा, जिसके बाद नाव पर से नियंत्रण पूरी तरह खो गया, और वह किनारे तक पहुंचने से पहले ही बेबस हो गई.
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पायलट ने हादसे को लेकर किए नए खुलासे
पायलट का दावा है कि नाव से बाहर निकलने से पहले उन्होंने अधिकतम यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने को कहा था. उन्होंने कहा कि नाव डूबने के दौरान वह आखिरी लोगों में से थे, जिन्होंने नाव छोड़ी.पायलट के अनुसार, उनके पास वैध लाइसेंस और सभी आवश्यक प्रशिक्षण हैं, जिनमें गोवा से प्राप्त लाइफ‑सेविंग सर्टिफिकेशन भी शामिल है. उन्होंने बताया कि हर दो साल में अधिकारियों की ओर से नियमित प्रशिक्षण कराया जाता है.पायलट ने कहा कि अचानक आए भीषण तूफान के कारण नाव को सुरक्षित दिशा में ले जाने का समय ही नहीं मिला. उन्होंने यह भी दावा किया कि नाव पर मानक तीन‑सदस्यीय क्रू की जगह केवल दो कर्मचारी मौजूद थे.
पायलट का आरोप है कि “ऑरेंज अलर्ट” जैसी मौसम स्थिति होने के बावजूद उन्हें किसी तरह की पूर्व मौसम चेतावनी नहीं दी गई थी.
उन्होंने बताया कि क्रूज़ शुरू होने के 30 मिनट के भीतर ही यह घटना हो गई. भावुक होते हुए पायलट ने माफी मांगी और कहा कि वह गहरे सदमे में है, ठीक से खाना‑पीना और सो पाना भी मुश्किल हो गया है. पायलट ने दावा किया कि यात्रियों की जान बचाने के लिए उन्होंने जो भी संभव था, वह किया और इस घटना को “एक प्राकृतिक आपदा” बताया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कम वेतन मिलता था, परिवार की जिम्मेदारियां थीं और यही नौकरी उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी.
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