- राम मंदिर ट्रस्ट ऑडिट में दानपात्र से नकदी और दूसरी चीजें गायब होने का शक हुआ.
- दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में भी संदिग्ध गतिविधि देखी गई.
- नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि चोरी को सांठगांठ कहना गलत है.
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदा चोरी का मामले गहराता जा रहा है. जून की शुरुआत में इस मामले का खुलासा हुआ. राम मंदिर ट्रस्ट जब अपना रूटीन ऑडिट (खातों की जांच) कर रहा था, तब दानपात्र से नकदी और दूसरी चीजें गायब होने का शक हुआ. जब मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई, तो वहां काम करने वाले एक कर्मचारी की हरकतें संदिग्ध लगीं. इसके बाद ट्रस्ट ने अंदरूनी तौर पर मामले की जांच शुरू की और शुरुआत में इसे गोपनीय रखा गया.
जब यह मामला गहराया तब राज्य सरकार ने एसआईटी जांच का गठन कर दिया. इस मामले में SIT के बड़े अधिकारी विजय विश्वास पंत (IAS, लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर, किरण एस (IPS, पुलिस महानिरीक्षक), नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग) शामिल हैं.
एनडीटीवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 'मंदिर निर्माण समिति' के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी को सांठगांठ कहना गलत है. नृपेंद्र मिश्र ने कहा, "दान की गिनती की निगरानी में चूक हुई है. इस मामले से प्रधानमंत्री भी चिंतित हैं. एसआईटी इसकी जांच कर रहा है. लेकिन मंदिर निर्माण समिति का इससे कोई वास्ता नहीं है."
उन्होंने कहा, "कंस्ट्रक्शन कमिटी का लेखा जोखा चढ़ावे से नहीं आता है उसका हिसाब किताब अलग है. जुडिशियल इंक्वायरी में वक्त लगता है इसलिए एसआईटी जांच ज़रूरी है. मुमकिन है गिनती में लगे कर्मचारी ट्रस्ट के करीब रहे होंगे क्योंकि सब सेवादार है. एसआईटी ने कंस्ट्रक्शन कमेटी से कोई डिटेल अभी नहीं मांगी है."
कितने का गबन हुआ?
राम मंदिर के चढ़ावे का गबन कब से हो रहा है और अब तक कितने पैसे चोरी किए जा चुके होंगे इसपर नृपेंद्र मिश्र ने NDTV को बताया, "अभी तो यह बता पाना मुश्किल है. अव्वल तो कि ये कब से हो रही है. रसीद कितनी हो सकती हैं ये सब देखना होगा. लेकिन हमने दो-तीन साल के आंकड़े देखे हैं. हर महीने दर्शन करने गए श्रद्धालु करीब 10-12 करोड़ का चंदा देते हैं. अगर न्यूनतम की बात करें तो ये कभी कभी 4 करोड़ महीना भी होता है. यानी सालभर में 75-80 करोड़ रुपये औसतन जमा होते हैं. इसमें अब ये देखना होगा कि अब तक कितना जमा हो गया होगा. ताकि पता लगाया जा सके कि कितने का गबन हो गया है."
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी आंकड़ो के मुताबिक, पिछले 11 माह में 16 करोड़ श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के दर्शन किए हैं. इस दौरान मंदिर को 83 करोड़ का चंदा हासिल हुआ है. यानी एक भक्त सिर्फ 5 रुपये का दान दे रहा है. नृपेंद्र मिश्र कहते हैं, "ये आंकड़ा तो कम है, मैं समझता हूं कि लोगों ने इससे अधिक ही दान दिया होगा. अभी इसपर टिप्पणी करना तो कठिन हैं."
सीसीटीवी फुटेज नहीं होने पर क्या बोले?
श्री राम मंदिर में चंदे को चोरी होने के आरोप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. विपक्ष का आरोप है कि डोनेशन रूम का सीसीटीवी फुटेज गायब कर दिया गया है.
नृपेंद्र मिश्र बोले, "सीसीटीवी की एक अवधि होती है. डोनेशन रूम में लगे सीसीटीवी की अविध 45 दिन की है. इसके बाद ये अपने आप इरेज हो जाती है. इसे आर्काइव किया जा सकता था लेकिन वो नहीं हुआ. जांच में इससे कठिनाई आएगी. हाल के 45 दिन की फुटेज में ये संकेत मिला है कि चंदे के पैसे के साथ कुछ इधर-उधर हुआ है. कोई व्यक्ति विशेष उस पैसे को अपने पास रख रहा है."
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