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ISI और आतंकी शहजाद भट्टी के निशाने पर पश्चिमी UP, कैसे बना रहे रिक्रूटमेंट सेंटर, जांच में बड़ा खुलासा

ISI Conspiracy West UP: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) और आतंकी शहजाद भट्टी की नई प्लानिंग सामने आई है. जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश इनका नया रिक्रूटमेंट सेंटर बन रहा है. यहां से बड़े पैमानों पर युवाओं को ट्रैप किया जा रहा है.

ISI और आतंकी शहजाद भट्टी के निशाने पर पश्चिमी UP, कैसे बना रहे रिक्रूटमेंट सेंटर, जांच में बड़ा खुलासा
ISI के निशाने पर पश्चिमी यूपी के युवा
नई दिल्ली:

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) और आतंकी शहजाद भट्टी के निशाने पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश नजर आ रहा है.  पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी बड़े पैमाने पर मेरठ, सहारनपुर, मथुरा और गाजियाबाद के युवाओं को ट्रैप कर रही है. यह आईएसआई और आतंकी शहजाद भट्टी का नया रिक्रूटमेंट सेंटर है. क्योंकि दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को शहजाद भट्टी के जिस मॉड्यूल का खुलासा किया इनमें 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जिनमें 6 गाजियाबाद के हैं. जो पश्चिमी यूपी का अहम शहर माना जाता है. इससे पहले मार्च 2026 में गाजियाबाद पुलिस से शहजाद भट्टी से जुड़े 21 आरोपी पकड़े थे. इनमें में भी अधिकतर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे. इस तरह मार्च से लेकर अब तक शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 26 से ज्यादा आरोपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासतौर पर गाज़ियाबाद से गिरफ्तार हुए हैं. 

सेना की निगरानी की साजिश का खुलासा 

दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है. उनमें  कई नाबालिग और 2 महिलाएं भी शामिल हैं. इस नेटवर्क का मकसद था भारत के सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील जगहों की जानकारी जुटाकर दुश्मन देश तक पहुंचाना और भविष्य में बड़े आतंकी हमलों की जमीन तैयार करना. पाकिस्तान में बैठे हैंडलर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में मौजूद युवाओं को जोड़ते थे और उन्हें निर्देश देते थे कि वे किन-किन जगहों की रेकी करें और किस तरह की जानकारी जुटाएं. आरोपी रेलवे स्टेशन, सेना के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन बनाकर इन हैंडलर्स को भेजते थे. बदले में उन्हें  5 से 20 हजार रुपए तक मिलते थे.

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पुलवामा भी गए थे आरोपी

मार्च में गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से चार कश्मीर के पुलवामा भी गए थे. वहां जाकर भी उन्होंने कई संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान को भेजी थी. सूत्रों के मुताबिक पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में एक और बड़े हमले की साजिश रची जा रही थी. इस साजिश का सबसे खतरनाक पहलू था रेलवे स्टेशनों पर कैमरे लगाने की योजना. जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली से जम्मू तक हर बड़े रेलवे स्टेशन पर सोलर सिस्टम से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी कर रहे थे. इन कैमरों का इस्तेमाल सेना की मूवमेंट और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाना था. पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन पर ऐसे कैमरे लगाए भी जा चुके थे. इन कैमरों की खास बात यह थी कि इनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान में देखी जा रही थी. यानी दुश्मन देश भारत के अंदर बैठकर हर गतिविधि पर नजर रख रहा था. मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इन कैमरों को बरामद कर लिया है और उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.

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देशभर में 50 जगहों पर कैमरा लगाने की थी योजना 

जांच में यह भी सामने आया है कि देशभर में करीब 50 ऐसे कैमरे लगाने की योजना थी. अगर यह साजिश पूरी तरह सफल हो जाती, तो देश की सुरक्षा के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी. आरोपी अपने मोबाइल फोन में एक खास एप्लिकेशन इंस्टॉल करते थे, जिसके जरिए वे फोटो, वीडियो और लोकेशन सीधे विदेश भेजते थे. इस ऐप को चलाने की ट्रेनिंग उन्हें विदेश में बैठे हैंडलर्स की तरफ से ऑनलाइन दी जाती थी. जांच में यह भी सामने आया है कि अब तक 450 से ज्यादा फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे जा चुके हैं. इस नेटवर्क में युवाओं को जोड़ने के लिए खास रणनीति अपनाई जाती थी. ऐसे युवाओं को टारगेट किया जाता था जो तकनीकी रूप से सक्षम हों, जैसे मोबाइल मैकेनिक, सीसीटीवी ऑपरेटर या कंप्यूटर से जुड़े लोग भी शामिल थे. इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को पैसे का लालच देकर इस काम में शामिल किया जाता था. महिलाओं और नाबालिगों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो.

सिम कार्ड रैकेट पर भी बड़ा खुलासा

जांच में एक और बड़ा खुलासा ओटीपी और सिम कार्ड रैकेट को लेकर हुआ है.  आरोपी भारतीय मोबाइल नंबरों पर आने वाले ओटीपी विदेश भेजते थे, ताकि वहां बैठे लोग इन नंबरों से व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट चला सकें. इसके लिए आरोपी 500 से 5000 रुपये तक लेते थे. सिम कार्ड हासिल करने के लिए ये लोग स्नैचिंग, फर्जी दस्तावेज और एजेंट्स के जरिए प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदने जैसे तरीके अपनाते थे. पैसों के लेन-देन के लिए आरोपी यूपीआई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे, लेकिन सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं लेते थे. इसके बजाय वे जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाकर वहां से नकद राशि हासिल करते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके. यह तरीका काफी हद तक सफल भी रहा, क्योंकि इससे उनकी ट्रांजैक्शन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था. 

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लेखक के बारे में
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मुकेश सिंह सेंगर
डेप्युटी एडिटर - क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन
साल 2003 में मीडिया करियर की शुरुआत BAG Films से हुई। शुरुआती दिनों से ही अपराध और खोजी पत्रकारिता में गहरी दिलचस्पी रही। 2005 में NDTV से जुड़े और उस... और पढ़ें
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