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ईरान भारत के और जहाजों को होर्मुज में दे सकता है रास्ता, जानिए क्यों अराघची का दौरा है 'गुड न्यूज'

28 फरवरी 2026 को आयतुल्लाह खामनेई की शहादत के बाद शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारत आ रहे हैं. वे भारत में दो दिनों तक रुकेंगे और इस दौरान BRICS देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे.

ईरान भारत के और जहाजों को होर्मुज में दे सकता है रास्ता, जानिए क्यों अराघची का दौरा है 'गुड न्यूज'
  • विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारत में BRICS सम्मेलन में भाग लेने के लिए 14 मई को पहुंचेंगे और दो दिन रुकेंगे.
  • उप विदेश मंत्री डॉ. काजेम गरीबाबादी ने कहा कि परमाणु हथियार बनाने का ईरान का कोई इरादा नहीं है.
  • अमेरिका की नाकाबंदी हटाने और जमी हुई संपत्तियां जारी करने पर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को तैयार है.

भारत की अध्यक्षता में 14–15 मई को होने वाली BRICS Summit में भाग लेने के लिए ईरान के विदेश मंत्री भारत पहुंच रहे हैं. खबर लिखे जाने तक वे ईरान से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं. इसी बीच भारत में ईरान के दूतावास पहुंचे ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. काजेम गरीबाबादी ने पत्रकारों से ऑफ‑रिकॉर्ड बातचीत में ईरान का रोडमैप साझा किया. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर लगी नाकाबंदी हटाता है और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां जारी करता है, तो ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए तैयार है.

परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान

डॉ. गरीबाबादी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश का उद्देश्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है. उन्होंने बताया कि ईरान ने परमाणु मुद्दे समेत सभी विवादित विषयों पर स्थायी समाधान के लिए 30 दिनों तक गहन वार्ता का प्रस्ताव भी दिया था.

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भारत एक मित्र देश: ईरानी उप विदेश मंत्री

भारत के साथ संबंधों पर जोर देते हुए ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक मित्र देश है, जिसके लिए अब तक 11 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा चुकी है. हम और अधिक जहाजों को रास्ता देने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, सभी जहाजों को अनुमति देना संभव नहीं होगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पारदर्शी शुल्क लगाया जाएगा.

अमेरिका ने मांगी थी युद्धविराम की पहल

युद्ध विराम को लेकर किए जा रहे दावों को खारिज करते हुए डॉ. गरीबाबादी ने कहा कि इसकी पहल अमेरिका की ओर से की गई थी, न कि ईरान की तरफ से. उन्होंने कहा कि ईरान युद्धविराम के पक्ष में नहीं था, क्योंकि वर्तमान स्थिति ‘न शांति, न युद्ध' की है. हालांकि, कूटनीतिक समाधान की तलाश में हमने बातचीत की मेज पर आना स्वीकार किया.

खामनेई की शहादत के बाद पहली भारत यात्रा

28 फरवरी 2026 को आयतुल्लाह खामनेई की शहादत के बाद शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारत आ रहे हैं. वे भारत में दो दिनों तक रुकेंगे और इस दौरान BRICS देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे. उनके साथ रूस के विदेश मंत्री भी इस बैठक में शामिल होंगे, जो पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. अराघची का यह भारत दौरा कच्चे तेल और क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

उप विदेश मंत्री का भारत में स्वागत

अराघची से पहले ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. काज़ेम गरीबाबादी भारत पहुंचे. विदेश मंत्रालय में पश्चिम एशिया मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने उनका स्वागत किया. इस दौरान हुई उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली भी मौजूद रहे.

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